करोड़ों की दौलत से सजे मां लक्ष्मी के दरबार, रतलाम से देवास तक आस्था और समृद्धि का अनूठा संगम

Ratlam and Dewas temples dedicated to Goddess Lakshmi

दिवाली का पर्व आते ही देशभर में मां लक्ष्मी के स्वागत की तैयारियां शुरू हो जाती हैं। कहीं घरों में दीप जलाए जाते हैं, कहीं रंगोली सजती है तो कहीं सोने-चांदी की खरीदारी को शुभ माना जाता है। लेकिन मध्य प्रदेश में मां लक्ष्मी के दो ऐसे दरबार हैं, जहां दीपावली पर धन-दौलत की ऐसी सजावट होती है, जिसे देखकर हर कोई हैरान रह जाता है। यहां मां लक्ष्मी का श्रृंगार फूलों और रोशनी से ही नहीं, बल्कि करोड़ों रुपये के नोटों, सोने-चांदी के आभूषणों और विदेशी मुद्राओं से किया जाता है।

रतलाम का माणक चौक स्थित श्री महालक्ष्मी मंदिर और देवास का श्री योगमाया महालक्ष्मी मंदिर, दोनों ही दीपावली पर अपनी अनूठी परंपरा के कारण विशेष पहचान रखते हैं। इन मंदिरों में धन का प्रदर्शन भर नहीं होता, बल्कि भक्तों की श्रद्धा, विश्वास और मां लक्ष्मी के प्रति समर्पण का अद्भुत दृश्य दिखाई देता है।

रतलाम: जहां भक्तों की अमानत से सजता है मां का दरबार

Diwali 2022:इकलौता मंदिर जहां भक्तों के गहनों-नोटों से होता है लक्ष्मीजी का श्रृंगार,पांच दिन ही खुलते हैं पट - Diwali 2022 Ratlam Mahalaxmi Temple Importance And Significance See Mahalakshmi Mandir Photos - Amar Ujala Hindi News Live
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दिवाली स्पेशल: महालक्ष्मी के इस मंदिर में प्रसाद के रूप में भक्तों को मिलते हैं पैसे, धन के खजाने भरती है मां

उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, इस परंपरा के दौरान सजावट में करीब 200 से 300 करोड़ रुपये तक की नकदी और आभूषण शामिल होने का दावा किया जाता है। महाराष्ट्र, गुजरात और उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों से श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं।

इस परंपरा की सबसे खास बात है धन की वापसी। भाई दूज के बाद भक्तों की जमा कराई गई नकदी और आभूषण उन्हें लौटा दिए जाते हैं। श्रद्धालु इसे मां लक्ष्मी का प्रसाद और आशीर्वाद मानते हैं।

यहां धन केवल सजावट का माध्यम नहीं, बल्कि भक्त और भगवान के बीच विश्वास का प्रतीक बन जाता है। अपनी जीवनभर की बचत और कीमती आभूषण मां के दरबार में सौंपना श्रद्धा के उस भाव को दिखाता है, जिसमें भक्त अपनी संपत्ति को भी ईश्वर की कृपा मानता है।

देवास: पांच करोड़ के नोट, ढाई करोड़ के गहनों से सजा दरबार

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इसमें करीब पांच करोड़ रुपये के भारतीय नोट और ढाई करोड़ रुपये के स्वर्ण आभूषण शामिल हैं। इतना ही नहीं, 15 देशों की विदेशी मुद्रा भी मां के दरबार की सजावट में शामिल की गई है।

श्रद्धालुओं की ओर से उपलब्ध कराई गई विदेशी मुद्राएं इस सजावट को अंतरराष्ट्रीय स्वरूप देती हैं। धनतेरस से शुरू हुआ पांच दिवसीय दीपावली उत्सव यहां विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। 6 से 11 नवंबर तक श्रद्धालुओं के लिए विशेष दर्शन व्यवस्था की गई है।

देवास के इस मंदिर की खासियत यह है कि यहां भारतीय मुद्रा के साथ विदेशी करेंसी और स्वर्ण आभूषणों का अनूठा संगम दिखाई देता है। यह बताता है कि मां लक्ष्मी के प्रति श्रद्धा की कोई भौगोलिक सीमा नहीं है। देश-विदेश में रहने वाले भक्त भी अपनी आस्था के माध्यम से इस परंपरा से जुड़ते हैं।

रतलाम और देवास: परंपरा अलग, आस्था का भाव एक

इन दोनों मंदिरों की सजावट में कुछ समानताएं हैं तो कुछ खास अंतर भी हैं।

विशेषता रतलाम देवास
मंदिर माणक चौक महालक्ष्मी मंदिर योगमाया महालक्ष्मी मंदिर
सजावट भक्तों की नकदी और आभूषण नोट, स्वर्ण आभूषण और विदेशी मुद्रा
बताई गई राशि करीब 200-300 करोड़ रुपये करीब 7.50 करोड़ रुपये
विशेष परंपरा भाई दूज के बाद अमानत वापसी पांच दिवसीय दीपावली उत्सव
खास पहचान भक्तों की अमानत से श्रृंगार 15 देशों की मुद्रा से सजावट

धन की देवी की पूजा और भारतीय संस्कृति का दर्शन

भारतीय संस्कृति में धन को कभी केवल भौतिक संपत्ति के रूप में नहीं देखा गया। धन को धर्म, कर्म, दान और लोककल्याण से जोड़कर समझा गया है। मां लक्ष्मी को समृद्धि, वैभव और सौभाग्य की देवी माना जाता है। लेकिन धार्मिक दर्शन में लक्ष्मी की कृपा का अर्थ केवल धनवान होना नहीं, बल्कि जीवन में सुख, शांति, सद्बुद्धि और संतोष का होना भी है।

रतलाम और देवास के मंदिर इसी आस्था को एक अलग रूप में सामने लाते हैं। भक्त अपनी संपत्ति मां के चरणों में समर्पित करते हैं। करोड़ों रुपये की सजावट के बीच सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस धन को भक्त अपनी निजी उपलब्धि नहीं, बल्कि ईश्वर की कृपा मानते हैं।

यहां एक बड़ा सांस्कृतिक संदेश भी छिपा है। धन तभी सार्थक है, जब उसके साथ विश्वास, सद्भाव और सेवा का भाव हो। मां लक्ष्मी की आराधना हमें धन कमाने के साथ उसका सदुपयोग करने की प्रेरणा भी देती है।

मध्य प्रदेश की धार्मिक पहचान को नई पहचान

रतलाम और देवास के ये दोनों मंदिर मध्य प्रदेश की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत के खास आकर्षण हैं। दीपावली के दौरान यहां उमड़ने वाली श्रद्धालुओं की भीड़ धार्मिक पर्यटन की संभावनाओं को भी सामने लाती है। ऐसी अनूठी परंपराएं स्थानीय स्तर पर रोजगार, व्यापार और पर्यटन गतिविधियों को भी प्रोत्साहित कर सकती हैं। दूसरे शहरों और राज्यों से आने वाले श्रद्धालु स्थानीय बाजारों और कारोबार से भी जुड़ते हैं।

करोड़ों की सजावट, आस्था अनमोल

रतलाम में करोड़ों की अमानत से सजा मां लक्ष्मी का दरबार हो या देवास में विदेशी मुद्राओं और स्वर्ण आभूषणों से जगमगाता मंदिर, दोनों जगह एक ही भाव दिखाई देता है- मां लक्ष्मी के प्रति अटूट श्रद्धा। यहां नोटों की चमक है, सोने की आभा है और विदेशी मुद्राओं का आकर्षण भी है। लेकिन इन सबसे ऊपर भक्तों का विश्वास है। क्योंकि मां लक्ष्मी के दरबार में धन की कीमत करोड़ों में हो सकती है, लेकिन सच्ची श्रद्धा का कोई मूल्य नहीं होता। यही रतलाम और देवास के इन दोनों मंदिरों की सबसे बड़ी विशेषता है।

दिवाली का पर्व आते ही देशभर में मां लक्ष्मी के स्वागत की तैयारियां शुरू हो जाती हैं। कहीं घरों में दीप जलाए जाते हैं, कहीं रंगोली सजती है तो कहीं सोने-चांदी की खरीदारी को शुभ माना जाता है। लेकिन मध्य प्रदेश में मां लक्ष्मी के दो ऐसे दरबार हैं, जहां दीपावली पर धन-दौलत की ऐसी सजावट होती है, जिसे देखकर हर कोई हैरान रह जाता है। यहां मां लक्ष्मी का श्रृंगार फूलों और रोशनी से ही नहीं, बल्कि करोड़ों रुपये के नोटों, सोने-चांदी के आभूषणों और विदेशी मुद्राओं से किया जाता है।

रतलाम का माणक चौक स्थित श्री महालक्ष्मी मंदिर और देवास का श्री योगमाया महालक्ष्मी मंदिर, दोनों ही दीपावली पर अपनी अनूठी परंपरा के कारण विशेष पहचान रखते हैं। इन मंदिरों में धन का प्रदर्शन भर नहीं होता, बल्कि भक्तों की श्रद्धा, विश्वास और मां लक्ष्मी के प्रति समर्पण का अद्भुत दृश्य दिखाई देता है।

रतलाम: जहां भक्तों की अमानत से सजता है मां का दरबार

Diwali 2022:इकलौता मंदिर जहां भक्तों के गहनों-नोटों से होता है लक्ष्मीजी का श्रृंगार,पांच दिन ही खुलते हैं पट - Diwali 2022 Ratlam Mahalaxmi Temple Importance And Significance See Mahalakshmi Mandir Photos - Amar Ujala Hindi News Live
Mahalakshmi temple started getting decorated with currency notes | नोटों के बंधनवार से सजने लगा महालक्ष्मी मंदिर: धनतेरस से भाईदूज तक रहेगी सजावट; मंदिर में नोट, आभूषण रखते हैं भक्त - Ratlam News | Dainik Bhaskar
दिवाली स्पेशल: महालक्ष्मी के इस मंदिर में प्रसाद के रूप में भक्तों को मिलते हैं पैसे, धन के खजाने भरती है मां

उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, इस परंपरा के दौरान सजावट में करीब 200 से 300 करोड़ रुपये तक की नकदी और आभूषण शामिल होने का दावा किया जाता है। महाराष्ट्र, गुजरात और उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों से श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं।

इस परंपरा की सबसे खास बात है धन की वापसी। भाई दूज के बाद भक्तों की जमा कराई गई नकदी और आभूषण उन्हें लौटा दिए जाते हैं। श्रद्धालु इसे मां लक्ष्मी का प्रसाद और आशीर्वाद मानते हैं।

यहां धन केवल सजावट का माध्यम नहीं, बल्कि भक्त और भगवान के बीच विश्वास का प्रतीक बन जाता है। अपनी जीवनभर की बचत और कीमती आभूषण मां के दरबार में सौंपना श्रद्धा के उस भाव को दिखाता है, जिसमें भक्त अपनी संपत्ति को भी ईश्वर की कृपा मानता है।

देवास: पांच करोड़ के नोट, ढाई करोड़ के गहनों से सजा दरबार

Diwali 2022:इकलौता मंदिर जहां भक्तों के गहनों-नोटों से होता है लक्ष्मीजी का श्रृंगार,पांच दिन ही खुलते हैं पट - Diwali 2022 Ratlam Mahalaxmi Temple Importance And Significance See Mahalakshmi Mandir Photos - Amar Ujala Hindi News Live
Mahalakshmi temple started getting decorated with currency notes | नोटों के बंधनवार से सजने लगा महालक्ष्मी मंदिर: धनतेरस से भाईदूज तक रहेगी सजावट; मंदिर में नोट, आभूषण रखते हैं भक्त - Ratlam News | Dainik Bhaskar
Mahalaxmi Temple Ratlam : महालक्ष्मी मंदिर में शुरू हुई सजावट, नोटों की लड़ियां लगाई गईं - Mahalaxmi Temple Ratlam: Diwali Decoration from currency and jewelry in temple

इसमें करीब पांच करोड़ रुपये के भारतीय नोट और ढाई करोड़ रुपये के स्वर्ण आभूषण शामिल हैं। इतना ही नहीं, 15 देशों की विदेशी मुद्रा भी मां के दरबार की सजावट में शामिल की गई है।

श्रद्धालुओं की ओर से उपलब्ध कराई गई विदेशी मुद्राएं इस सजावट को अंतरराष्ट्रीय स्वरूप देती हैं। धनतेरस से शुरू हुआ पांच दिवसीय दीपावली उत्सव यहां विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। 6 से 11 नवंबर तक श्रद्धालुओं के लिए विशेष दर्शन व्यवस्था की गई है।

देवास के इस मंदिर की खासियत यह है कि यहां भारतीय मुद्रा के साथ विदेशी करेंसी और स्वर्ण आभूषणों का अनूठा संगम दिखाई देता है। यह बताता है कि मां लक्ष्मी के प्रति श्रद्धा की कोई भौगोलिक सीमा नहीं है। देश-विदेश में रहने वाले भक्त भी अपनी आस्था के माध्यम से इस परंपरा से जुड़ते हैं।

रतलाम और देवास: परंपरा अलग, आस्था का भाव एक

इन दोनों मंदिरों की सजावट में कुछ समानताएं हैं तो कुछ खास अंतर भी हैं।

विशेषता रतलाम देवास
मंदिर माणक चौक महालक्ष्मी मंदिर योगमाया महालक्ष्मी मंदिर
सजावट भक्तों की नकदी और आभूषण नोट, स्वर्ण आभूषण और विदेशी मुद्रा
बताई गई राशि करीब 200-300 करोड़ रुपये करीब 7.50 करोड़ रुपये
विशेष परंपरा भाई दूज के बाद अमानत वापसी पांच दिवसीय दीपावली उत्सव
खास पहचान भक्तों की अमानत से श्रृंगार 15 देशों की मुद्रा से सजावट

धन की देवी की पूजा और भारतीय संस्कृति का दर्शन

भारतीय संस्कृति में धन को कभी केवल भौतिक संपत्ति के रूप में नहीं देखा गया। धन को धर्म, कर्म, दान और लोककल्याण से जोड़कर समझा गया है। मां लक्ष्मी को समृद्धि, वैभव और सौभाग्य की देवी माना जाता है। लेकिन धार्मिक दर्शन में लक्ष्मी की कृपा का अर्थ केवल धनवान होना नहीं, बल्कि जीवन में सुख, शांति, सद्बुद्धि और संतोष का होना भी है।

रतलाम और देवास के मंदिर इसी आस्था को एक अलग रूप में सामने लाते हैं। भक्त अपनी संपत्ति मां के चरणों में समर्पित करते हैं। करोड़ों रुपये की सजावट के बीच सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस धन को भक्त अपनी निजी उपलब्धि नहीं, बल्कि ईश्वर की कृपा मानते हैं।

यहां एक बड़ा सांस्कृतिक संदेश भी छिपा है। धन तभी सार्थक है, जब उसके साथ विश्वास, सद्भाव और सेवा का भाव हो। मां लक्ष्मी की आराधना हमें धन कमाने के साथ उसका सदुपयोग करने की प्रेरणा भी देती है।

मध्य प्रदेश की धार्मिक पहचान को नई पहचान

रतलाम और देवास के ये दोनों मंदिर मध्य प्रदेश की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत के खास आकर्षण हैं। दीपावली के दौरान यहां उमड़ने वाली श्रद्धालुओं की भीड़ धार्मिक पर्यटन की संभावनाओं को भी सामने लाती है। ऐसी अनूठी परंपराएं स्थानीय स्तर पर रोजगार, व्यापार और पर्यटन गतिविधियों को भी प्रोत्साहित कर सकती हैं। दूसरे शहरों और राज्यों से आने वाले श्रद्धालु स्थानीय बाजारों और कारोबार से भी जुड़ते हैं।

करोड़ों की सजावट, आस्था अनमोल

रतलाम में करोड़ों की अमानत से सजा मां लक्ष्मी का दरबार हो या देवास में विदेशी मुद्राओं और स्वर्ण आभूषणों से जगमगाता मंदिर, दोनों जगह एक ही भाव दिखाई देता है- मां लक्ष्मी के प्रति अटूट श्रद्धा। यहां नोटों की चमक है, सोने की आभा है और विदेशी मुद्राओं का आकर्षण भी है। लेकिन इन सबसे ऊपर भक्तों का विश्वास है। क्योंकि मां लक्ष्मी के दरबार में धन की कीमत करोड़ों में हो सकती है, लेकिन सच्ची श्रद्धा का कोई मूल्य नहीं होता। यही रतलाम और देवास के इन दोनों मंदिरों की सबसे बड़ी विशेषता है।

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