विजयादशमी पर संघ की शताब्दी….अब चलेगा संघ का सिक्का…पीएम मोदी करेंगे स्मारक टिकट-सिक्का जारी
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) इस वर्ष अपनी स्थापना के 100 वर्ष पूरे कर रहा है। विजयादशमी के दिन 1925 में डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने संघ की नींव रखी थी। तब से अब तक यह संगठन राष्ट्र सेवा और सामाजिक समरसता के लिए समर्पित रहा है। 2 अक्टूबर को संघ की शताब्दी के उपलक्ष्य में देशभर में बड़े पैमाने पर कार्यक्रम आयोजित होंगे। संघ के 100 साल पूरे होने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्मारक डाक टिकट और स्मारक सिक्का जारी करेंगे। यह कार्यक्रम आरएसएस के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले की मौजूदगी में आयोजित होगा।
- संघ शताब्दी पर भव्य आयोजन
- 2 अक्टूबर को संघ की शताब्दी
- पीएम मोदी करेंगे स्मारक डाक टिकट और सिक्का जारी
पीएम मोदी ने की प्रशंसा
प्रधानमंत्री मोदी ने हाल ही में अपने ‘मन की बात’ संबोधन में आरएसएस की प्रेरणादायक यात्रा की चर्चा की। उन्होंने कहा कि संघ ने देश को बौद्धिक गुलामी से मुक्त कराने की दिशा में निरंतर कार्य किया है। पीएम ने स्वयंसेवकों की अनुशासनप्रियता और राष्ट्र प्रथम की भावना की सराहना की। उन्होंने कहा कि आरएसएस का हर कार्य भारत के हित में और समाज की एकता के लिए समर्पित रहता है। मोदी ने यह भी याद दिलाया कि स्वयं वे भी संघ प्रचारक रह चुके हैं और संगठन से मिले संस्कारों ने उन्हें राष्ट्र सेवा की ओर प्रेरित किया।
गुरुजी गोलवलकर को किया याद
पीएम मोदी ने संघ के दूसरे सरसंघचालक एम. एस. गोलवलकर, जिन्हें गुरुजी के नाम से जाना जाता है, को याद किया। उन्होंने कहा कि गुरुजी का यह कथन—“यह मेरा नहीं, राष्ट्र का है”—ने लाखों स्वयंसेवकों को त्याग और सेवा का मार्ग दिखाया। मोदी ने कहा कि संघ की असली ताकत त्याग, सेवा और अनुशासन में निहित है। यही मूल्य संघ को सौ वर्षों से जीवंत बनाए हुए हैं। उन्होंने संघ को न केवल संगठन बल्कि राष्ट्र निर्माण का एक सतत आंदोलन बताया।
नागपुर में हुआ विशेष कार्यक्रम
पिछले दिनों नागपुर में संघ प्रमुख मोहन भागवत ने शताब्दी वर्ष को समर्पित कार्यक्रम में ‘संघ गीत’ संग्रह का विमोचन किया था। इस कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस भी उपस्थित रहे। एल्बम में प्रसिद्ध गायक शंकर महादेवन द्वारा गाए गए 25 गीत शामिल हैं। महादेवन ने इनमें से 10 गीत मंच से प्रस्तुत भी किए। भागवत ने कहा कि ये गीत मातृभूमि के प्रति समर्पण और जीवन की तपस्या का प्रतीक हैं। उन्होंने इन्हें स्वयंसेवकों के अनुभवों की जीवंत अभिव्यक्ति बताया।
राष्ट्रव्यापी अभियान की तैयारियां
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत 2 अक्टूबर को नागपुर स्थित मुख्यालय से वार्षिक विजयादशमी संबोधन देंगे। इसी के साथ अगले एक वर्ष तक देशभर में शताब्दी से जुड़े कार्यक्रमों की श्रृंखला शुरू होगी। इस दौरान एक राष्ट्रव्यापी जनसंपर्क अभियान चलाया जाएगा। विभिन्न राज्यों में सामाजिक समरसता, शिक्षा, संस्कृति और राष्ट्रीय एकता पर हजारों संगोष्ठियों का आयोजन होगा। बताया जाता है कि संघ के पास हर भारतीय भाषा में गीत मौजूद हैं, जिनकी संख्या 25 से 30 हजार के बीच है। इन गीतों को भी पूरे वर्ष के दौरान विशेष रूप से प्रस्तुत किया जाएगा।
विजयादशमी 2025 राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के लिए ऐतिहासिक बनने जा रही है। सौ वर्षों की यह यात्रा त्याग, सेवा और राष्ट्र प्रथम की भावना का प्रतीक है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा स्मारक टिकट और सिक्का जारी किया जाना इस अवसर को और भी विशेष बना देगा। नागपुर से लेकर पूरे देश में होने वाले कार्यक्रम आने वाले वर्ष तक संघ की शताब्दी को जन-जन तक पहुंचाएंगे। (प्रकाश कुमार पांडेय)





