रांची दुर्गा पूजा पंडाल विवाद: ‘वेटिकन सिटी’ थीम पर VHP ने जताया ऐतराज

Durga Puja pandal on the Vatican City theme

रांची दुर्गा पूजा पंडाल विवाद: ‘वेटिकन सिटी’ थीम पर VHP ने जताया ऐतराज

झारखंड की राजधानी रांची में इस बार एक दुर्गा पूजा पंडाल को ‘वेटिकन सिटी’ थीम पर सजाने को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। इस पंडाल के विषय को लेकर विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने कड़ी आपत्ति जताई है। VHP का आरोप है कि यह हिन्दुओं की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने और धर्मांतरण को बढ़ावा देने का प्रयास है। वहीं, आयोजकों का कहना है कि यह केवल एक कलात्मक प्रस्तुति है, और इसका किसी की आस्था या धार्मिक भावना को चोट पहुँचाने से कोई लेना-देना नहीं है।

VHP ने पंडाल को बताया धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाला

VHP के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने पंडाल के डिज़ाइन और थीम पर सवाल उठाते हुए कहा कि इसमें ईसाई धर्म के प्रतीक चिन्ह, मदर मैरी और अन्य धार्मिक चरित्रों की तस्वीरें लगाई गई हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि यह कदम धर्मांतरण को बढ़ावा देने और हिंदुओं की आस्था को चोट पहुंचाने के उद्देश्य से उठाया गया है। बंसल ने कहा, “अगर आयोजकों को इतनी ही धर्मनिरपेक्षता दिखानी है, तो क्या कभी चर्च या मदरसों के आयोजनों में किसी हिंदू देवी-देवता की तस्वीर लगाई जाती है?” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि झारखंड इकाई इस मामले पर जल्द सख्त निर्णय लेगी और आयोजकों से मांग की है कि वे तुरंत पंडाल से ईसाई धार्मिक प्रतीकों को हटा दें। VHP का यह रवैया इस बात को दर्शाता है कि संगठन धार्मिक प्रतीकों के उपयोग और किसी भी समुदाय की आस्था को ठेस पहुंचाने के मामलों में संवेदनशील है। स्थानीय और राष्ट्रीय स्तर पर यह विवाद तेजी से चर्चा का विषय बन गया है।

आयोजन समिति ने दी सफाई

इस विवाद के बीच आरआर स्पोर्टिंग क्लब के अध्यक्ष विक्की यादव ने कहा कि वे पिछले 50 सालों से दुर्गा पूजा का आयोजन कर रहे हैं और हर साल पंडाल की थीम अलग रखी जाती है। उन्होंने बताया कि इस बार उन्होंने कोलकाता के श्रीभूमि स्पोर्टिंग क्लब की 2022 की थीम को रांची में उतारने का फैसला किया था।

यादव ने कहा, “कोलकाता में यह थीम काफी लोकप्रिय रही थी और भारी भीड़ जुटी थी। रांची में भी जनता की प्रतिक्रिया सकारात्मक है। किसी की भावना आहत करने का कोई उद्देश्य नहीं है। पूजा पूरी तरह वैदिक परंपराओं के अनुसार आयोजित की जा रही है।”

आयोजन समिति का यह कहना है कि यह थीम धर्मनिरपेक्ष दृष्टिकोण से तैयार की गई है। यादव ने जोर देकर कहा, “हम एक धर्मनिरपेक्ष देश में रहते हैं। दुर्गा पूजा का आनंद सभी समुदाय के लोग लेते हैं। हमने केवल कलात्मक दृष्टिकोण से वेटिकन सिटी की प्रतिकृति बनाई है।”

कलात्मक प्रस्तुति और सांस्कृतिक पहलू

विशेषज्ञों का कहना है कि त्योहारों में थीम आधारित पंडाल बनाना एक आम प्रथा है। शहर और गाँवों में हर साल विभिन्न थीम पर सजावट की जाती है। रांची का यह विवाद इस परंपरा और धार्मिक संवेदनशीलता के टकराव को उजागर करता है।

कलात्मक दृष्टि से देखें तो वेटिकन सिटी थीम में चर्च, गिरजाघर और धार्मिक प्रतीकों का चित्रण शामिल है। आयोजकों का दावा है कि यह सांस्कृतिक और ऐतिहासिक प्रस्तुति है, जिसका उद्देश्य सिर्फ दर्शकों को आकर्षित करना और कला का आनंद देना है।  सांस्कृतिक विश्लेषकों का कहना है कि ऐसे विवाद समाज में संवाद का अवसर भी प्रदान करते हैं। यह देखने का विषय होगा कि प्रशासन, सामाजिक संगठन और स्थानीय जनता इस विवाद को किस रूप में हल करते हैं।

प्रशासन और समाज की भूमिका

अब देखना यह है कि इस मामले में प्रशासन और समाज के अन्य संगठन किस प्रकार की प्रतिक्रिया देते हैं। स्थानीय प्रशासन ने फिलहाल पंडाल पर किसी प्रकार की सख्त कार्रवाई नहीं की है। वहीं समाज के विभिन्न संगठन और नागरिक इस पर विभिन्न दृष्टिकोण रख रहे हैं। कुछ लोग इसे धार्मिक भावनाओं का उल्लंघन मानते हैं, जबकि कई लोग इसे कलात्मक स्वतंत्रता के तहत देखते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे विवाद अक्सर मीडिया और सोशल मीडिया पर तेज़ी से फैलते हैं। इस कारण आयोजकों को संतुलित और संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाना चाहिए, ताकि किसी की भावनाओं को चोट न पहुंचे।

रांची में दुर्गा पूजा पंडाल को वेटिकन सिटी थीम पर सजाने को लेकर खड़ा विवाद दर्शाता है कि धार्मिक और सांस्कृतिक संवेदनशीलता और कलात्मक स्वतंत्रता के बीच संतुलन बनाए रखना कितना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। VHP का आरोप है कि यह हिन्दुओं की आस्था को ठेस पहुँचाने का प्रयास है, जबकि आयोजकों का दावा है कि यह केवल कलात्मक प्रस्तुति है और किसी की भावनाओं को चोट पहुँचाने का उद्देश्य नहीं है। इस विवाद की अंततः परिणति प्रशासन और सामाजिक संगठनों के फैसलों पर निर्भर करेगी। यह देखने वाली बात होगी कि आगामी दिनों में रांची और झारखंड के समाज इस मामले को किस रूप में सुलझाते हैं और दुर्गा पूजा की सांस्कृतिक महत्ता को कैसे संरक्षित किया जाता है। प्रकाश कुमार पांडेय

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