रामलला की प्राण प्रतिष्ठा वाले दिन देश भर में एक बार फिर दीपावली मनाई जाएगी। विभिन्न धार्मिक आयोजन किये जाएंगे। रामभक्तों की ओर से अयोध्या से आए पूजित अक्षत घर घर पहुंचाए जा रहे हैं। इस अक्षत वितरण के लिए बाकायदा शोभायात्रा निकाली जा रही हैं। गांव और मोहल्ले से लेकर शहर की गलियां इन दिनों श्री रामलला के जयकारों से गूंज रही हैं। यह उत्साह केवल भारत में ही नहीं हैं। भारत से हजारों किलोमीटर दूर मॉरीशस में भी लोग उत्साहित हैं। बता दें कि अयोध्या में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ ही देश विदेश के कई सहित कई सीनियर नेता मौजूद रहेंगे। इस पूरे कार्यक्रम को दुनिया के कई देशों में लाइव टेलीकास्ट भी किया जाएगा।
- मॉरीशस में हिंदू धर्म मानने वाले बड़ी संख्या में रहते हैं
- मॉरीशस में रहती है करीब 48.5% आबादी हिंदू
- अफ्रीका का इकलौता ऐसा देश, जहां बड़ी तादाद में रहते हैं हिंदू
- भारत से करीब 5839 किमी दूर बसा है मॉरिशस
- मॉरीशस की भारत से समुद्री दूरी 3153 समुद्री मील है
मॉरीशस की सरकार ने तो रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के मौके पर 22 जनवरी के दिन हिंदू धर्म मानने वाले कर्मचारियों के लिए दो घंटे की छुट्टी देने की घोषणा की है। इस दौरान हिंदू धर्म को मानने वाले कर्मचारी स्थानीय कार्यक्रमों में हिस्सा ले सकेंगे। मॉरीशस की कैबिनेट ने इस तरह के एक प्रस्ताव को मंजूरी भी दे दी है। मॉरीशस कैबिनेट की ओर से जारी किए प्रस्ताव में कहा गया है कि भारत में 22 जनवरी के दिन अयोध्या में प्रभु श्री राम के मंदिर का उद्घाटन होना है जो एक ऐतिहासिक घटना है। यह अयोध्या में भगवान श्री राम की वापसी का भी प्रतीक है। इसे ध्यान में रखते हुए मॉरीशस में 22 जनवरी के दिन दोपहर 2 बजे से हिंदुओं को दो घंटे की विशेष छुट्टी दी जाएगी।
मॉरीशस के पीएम ने जताई खुशी
मॉरीशस के पीएम प्रविंद कुमार जुगनाथ ने भी कैबिनेट के इस फैसले पर खुशी जताई और कहा कि मॉरीशस सरकार की हिंदुओं की भावनाओं के साथ परंपराओं का सम्मान करने के लिए छोटी सी कोशिश है। वहीं मॉरीशस के सांसद महेंद गंगा प्रसाद ने भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रति आभार जताया और कहा था कि सिर्फ पीएम नरेन्द्र मोदी ही अयोध्या को फिर से दुनिया के सामने ला सकते थे और उन्होंने ऐसा कर दिखाया। सांसद महेन्द्र गंगा प्रसाद ने कहा वे और मॉरीशस में रह रहे हिंदू आज इस बात से गौरांवित हैं। बेहद खुश हैं कि, प्रभु श्री राम की जन्म भूमि में उनका मंदिर बन गया है।
मॉरीशस में 48.5% हिन्दू आबादी
इस अफ्रीकी देश मॉरीशस की बात करें तो यहां हिंदू सबसे बड़ा धर्म है। 2011 की रिपोर्ट के मुताबिक यहां करीब 48.5% आबादी हिंदू है। अफ्रीका का यह इकलौता ऐसा देश है जहां इतनी बड़ी संख्या में हिंदू धर्म को मानने वाले लोग निवास करते हैं। विश्व स्तर पर देखें तो हिंदुओं की आबादी के मामले में भारत के बाद नेपाल और मॉरीशस का ही नाम सामने आता है। मॉरीशस में हिंदू धर्म का आगमन उस समय हुआ जब भारतीय मजदूरों को कॉन्ट्रैक्ट के आधार पर फ्रांसीसी कॉलोनियों में ले जाया गया था। इसके बाद इन्हें मॉरीशस के साथ ही हिंद महासागर के कई दूसरे द्वीपों पर ब्रिटिश कॉलोनियों में भी काम पर लगाया गया था। इन मजदूरों को मुख्य रूप से महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और आंध्र प्रदेश से ले जाए गए थे। बाद में इन हिन्दू मजदूरों में बड़ी संख्या में लोगों ने मॉरीशस में ही अपना घर बना लिया और वहां बस गए।





