राम मंदिर चढ़ावा चोरी केस: चार्जशीट में क्या निकला? चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव को क्यों बनाया सरकारी गवाह

Ram Mandir donation theft case

अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की रकम चोरी के मामले में पुलिस की चार्जशीट ने जांच की दिशा और जिम्मेदारी को लेकर कई अहम तथ्य सामने रखे हैं। पुलिस ने चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव को आरोपी नहीं बनाया, बल्कि तीनों को गवाह के तौर पर शामिल किया है। वहीं चोरी के मामले में आठ लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई है।

1. तीन बड़े नाम आरोपी नहीं, गवाह

चार्जशीट के मुताबिक श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के पूर्व महासचिव चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव को मामले में आरोपी नहीं बनाया गया है। पुलिस ने उन्हें जांच के दौरान सामने आए घटनाक्रम से जुड़े गवाह के रूप में रखा है। इसलिए इसे कानूनी तौर पर ‘क्लीन चिट’ के रूप में रिपोर्ट किया जा सकता है, लेकिन अंतिम न्यायिक निष्कर्ष अदालत की प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।

2. 3 और 4 जून को पकड़ी गई चोरी

पुलिस के अनुसार चोरी का पहला मामला 3 जून 2026 को सामने आया। गणनाकर्मी मदन गोपाल निगम ने अविनाश शुक्ला, करुणेश पांडे, अनुकल्प मिश्रा और लव कुश मिश्रा को नोटों की गड्डी छिपाते देखा।

4 जून को अविनाश शुक्ला को दोबारा चोरी करते देखा गया। जांच और तलाशी के दौरान बाथरूम से 2.25 लाख रुपये बरामद किए गए।

3. चंपत राय को कब मिली जानकारी?

चार्जशीट के अनुसार 4 जून की रात चंपत राय को चोरी की जानकारी दी गई और उनसे संबंधित सीसीटीवी फुटेज भी साझा किए गए। 5 जून को अयोध्या पहुंचने के बाद कारसेवकपुरम में चंपत राय की अनिल मिश्रा और गोपाल राव के साथ बैठक हुई, जिसमें सीसीटीवी फुटेज देखे गए।

यहीं से चार्जशीट में दर्ज घटनाक्रम और 7 जून को दिए गए सार्वजनिक बयान के बीच का अंतर महत्वपूर्ण हो जाता है।

4. 7 जून के बयान पर सवाल

चार्जशीट में चंपत राय के 7 जून के बयान का भी उल्लेख है। उस बयान में उन्होंने कहा था कि ट्रस्ट का समय-समय पर आंतरिक ऑडिट होता है और उस समय भी ऑडिट की प्रक्रिया चल रही थी। उनके मुताबिक तब तक कोई उल्लेखनीय बात सामने नहीं आई थी।

पुलिस की टाइमलाइन के मुताबिक, इससे पहले 3 जून को चोरी पकड़ी जा चुकी थी और 5 जून को सीसीटीवी फुटेज भी देखे जा चुके थे। यही घटनाक्रम अब इस मामले का एक अहम तथ्यात्मक पहलू बन गया है।

5. चोरी का नेटवर्क कितना बड़ा?

चार्जशीट में सीसीटीवी के आधार पर चोरी की घटनाओं का विस्तृत ब्योरा दिया गया है। पुलिस के मुताबिक अविनाश शुक्ला 85 बार चोरी करता और चार बार चोरी में मदद करता दिखाई दिया। करुणेश पांडे ने दो बार चोरी की और 68 बार मदद की।

मनीष यादव करीब 50 दिनों की नौकरी के दौरान 16 बार चोरी और 19 बार मदद करता दिखाई दिया। लव कुश मिश्रा ने एक बार चोरी और 52 बार मदद की, जबकि अनुकल्प मिश्रा 56 बार चोरी में मदद करता दिखाई दिया।

6. रिटायर्ड बैंक कर्मचारी की भूमिका

जांच में रिटायर्ड बैंक कर्मचारी सुभाष श्रीवास्तव की भूमिका भी सामने आई। चार्जशीट के अनुसार उसने 25 और 30 मई को अविनाश शुक्ला की चोरी में मदद की थी। पुलिस का आरोप है कि उसके प्रभाव के कारण आरोपियों की सुरक्षा जांच में ढिलाई होती थी।

सुभाष श्रीवास्तव को दानपात्र से प्राप्त चढ़ावे को बैंक में जमा कराने की जिम्मेदारी दी गई थी और वह 7 जनवरी 2022 को रिटायर हुआ था।

7. करीब 98 लाख रुपये का बैंक रिकॉर्ड

पुलिस के मुताबिक गिरफ्तार किए गए सात आरोपियों के पास से 79 लाख 85 हजार 493 रुपये बरामद हुए। वहीं सभी आठ आरोपियों के बैंक खातों में कुल 98 लाख 30 हजार रुपये जमा होने की पुष्टि हुई है।

चार्जशीट में कुल 133 गवाह बनाए गए हैं। इनमें चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव के अलावा पुलिस अधिकारियों और 27 पुलिसकर्मियों के नाम भी शामिल हैं।

8. अब मामला अदालत में

इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि पुलिस की जांच के स्तर पर तीन प्रमुख पदाधिकारियों को आरोपी नहीं बनाया गया है, जबकि आठ लोगों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया गया है। अब चार्जशीट में दर्ज आरोप, बरामदगी, सीसीटीवी और गवाहियों की न्यायिक जांच आगे होगी। यानी राम मंदिर चढ़ावा चोरी केस में पुलिस ने जांच की जिम्मेदारी तय करते हुए एक तरफ आठ आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की है, तो दूसरी तरफ चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव की भूमिका को आरोपी के बजाय गवाह के रूप में दर्ज किया है।

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