राजस्थान में ये पार्टियां बन सकती हैं कांग्रेस-बीजेपी का नया सिरर्दद, केजरीवाल, बेनीवाल के बाद ओवैसी भी सक्रिय,आरएलपी भी जुटा रही जाट वोट बैंक

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मरुभूमि राजस्थान में साल के अंत में विधानसभा के चुनाव होना हैं। वैसे राजस्थान में कांग्रेस और बीजेपी के बीच ही सत्ता के लिए संघर्ष होता रहा है। लेकिन इस बार सियासत की हवा में दूसरी पार्टियों के झंडे बैनर भी लहरा रहे हैं। जिससे माना जा रहा है कि इस बार चार पार्टियां बीजेपी और कांग्रेस के बीच खड़ी नजर आएंगी। जिससे दोनों दल को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है, क्योंकि ये वो पार्टियां है जिनका कुछ खास इलाकों में अपना वोट बैंक भी है। जिसमें राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी RLP, ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहाद-उल-मुस्लिमीन (AIMIM), आम आदमी पार्टी AAP और भारतीय ट्राइबल पार्टी BTP हैं।

दिल्ली-पंजाब के बाद राजस्थान पर ‘AAP’ की नजर

आम आदमी पार्टी इस बार हिन्दी भाषी राज्यों के विधानसभा चुनाव को लेकर सक्रिय नजर आ रही है। पार्टी के संयोजक और दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल गुजरात विधानसभा चुनाव के बाद से सक्रिय हो गए हैं। राजस्थान के साथ ही छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश पर भी आप की नजर बनी हुई है। बात करें राजस्थान की तो यहां आम आदमी पार्टी ने मध्यम वर्ग, शिक्षित और गरीब वर्ग में पैठ नाना शुरु कर दिया है। उसने दिल्ली और पंजाब की अपनी सरकारों की योजनाओं को गिनाया जा रहा है। राज्य में फ्री बिजली देनो। स्कूल और अस्पताल संबंधी योजनाओं का प्रभावी तरीके से लागू किये जाने के दावे और वादे किये जा रहे हैं। खासतौर पर पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और गुजरात से सटे विधानसभा क्षेत्रों पर आम आदमी पार्टी मेहनत कर रह रही है। पिछले दिनों 13 मार्च को जयपुर में आप संयोजक और दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल और पंजाब के सीएम भगवंत मान ने शक्ति प्रदर्शन किया था। इतना ही नहीं जयपुर के सांगानेरी गेट से अजमेरी गेट तक तिरंगा यात्रा भी निकाली थी।

जाट वोट बैंक के सहारे आरएलपी

बात करें राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी की तो इसकी ताकत जाट वोट बैंक माना जा सकता है।  जाट बहुल सीटों पर इस पार्टी की पकड़ भी है। इस पार्टी के संयोजक हनुमान बेनीवाल हैं जो नागौर से लोकसभा सांसद भी हैं। हनुमान बेनीवाल की रालोपा बीजेपी और कांग्रेस के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन सकती है। बेनीवाल नेइस बार विधानसभा चुनावों में रालोपा के पहले या दूसरे नंबर पर आने का दावा भी किया है। दरअसल चार साल पहले अस्तित्व में आई आरएलपी वर्तमान में बीजेपी और कांग्रेस के लिए चुनौती बन उभरी है। आरएलपी की मूल ताकत जाट वोट बैंक को माना जाता है। पार्टी अध्यक्ष हनुमान बेनीवाल नागौर से सांसद हैं। वे लगातार 3 बार विधायक भी रह चुके हैं। उनकी पार्टी के पास फिलहाल तीन विधायक और एक सांसद सहित 100 से अधिक पंचायत समिति सदस्य हैं। पिछले चार साल में हुए 9 उपचुनाव में आरएलपी ने औसतन 30 से 35 हजार वोट हासिल किये हैं। ऐसे में विधानसभा और उसके बाद होने वाले लोकसभा चुनाव में बीजेपी और कांग्रेस के सामने प्रदेश के सबसे बड़े वोट बैंक पर आरएलपी की भी तगड़ी दावेदारी दिखाई दे सकती है।

ओवैसी की AIMIM की नई चुनौती

ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहाद-उल-मुस्लिमीन के संयोजक असदुद्दीन ओवैसी फिलहाल हैदराबाद से लोकसभा सांसद हैं। हाल ही में ओवैसी ने राजस्थान के पूर्व डिप्टी सीएम और कांग्रेस के युवा नेता सचिन पायलट को टोंक सीट छोड़कर किसी गुर्जर बहुल सीट से चुनाव लड़ने की सलाह दी थी। इतना ही नहीं ओवैसी चुनावी रणनीति बनाने के लिए टोंक, भरतपुर और जोधपुर तक का सियासी सफर भी कर चुके हैं। टोंक में ही उन्होंने सचिन पायलट और जोधपुर में सीएम अशोक गहलोत पर तीखे बयानों से हमला किया था। माना जा रहा है कि एआईएमआईएम की ताकत मुस्लिम वोट बैंक है। राजस्थान में करीब 35 विधानसभा सीटे ऐसी हैं जहां मुस्लिम वर्ग का खासा असर है। पिछले दिनों असदुद्दीन ओवैसी जोधपुर पहुंचे थे। जहां उन्होंने सीएम अशोक गहलोत के मोहल्ले में जाकर जनसंपर्क किया। और राजस्थान की गहलोत सरकार पर निशाना साधा। साथ ही कहा कि वे यहां किसी को हराने नहीं बल्कि जीतने आए हैं।

पायलट का ओवैसी को जवाब

राजस्थान में चुनावी सभा के दौरान असदुद्दीन ओवैसी ने पायलट को सीट बदलने की सलाह दी थी। इस बयान को सचिन पायलट ने गंभीरता से लिया और यह कहते हुए जवाब दिया किचार साल बीत गए। ओवैसी को टोंक की याद नहीं आई, अब जबकि चुनाव सामने हैं तो उन्हें और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दोनों को सवाई माधोपुर दौसा और टोंक सब याद आने लगे हैं।

चार चुनौतियों से निपटकर राजस्थान में राज कर सकेंगी बीजेपी और कांग्रेस

 

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