मराठी अस्मिता की जंग जारी, BMC हार के बाद BJP पर बरसे राज ठाकरे
मुंबई। बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) चुनाव 2026 के नतीजों ने महाराष्ट्र की राजनीति में नई लकीर खींच दी है। देश की सबसे अमीर नगर निकाय मानी जाने वाली 227 सीटों वाली बीएमसी में इस बार सत्ता का संतुलन पूरी तरह बदल गया। जहां भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, वहीं ठाकरे परिवार की दशकों पुरानी पकड़ को करारा झटका लगा है। चुनाव परिणाम सामने आते ही महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) प्रमुख राज ठाकरे ने बीजेपी और सत्ताधारी महायुति पर तीखा हमला बोला और कहा कि मराठी अस्मिता की लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है।
- BMC चुनाव में उलटफेर
- राज ठाकरे का हमला
- MNS को बड़ा झटका
- महायुति को स्पष्ट बहुमत
- मराठी राजनीति की परीक्षा
राज ठाकरे का आक्रामक तेवर
बीएमसी चुनाव में अपेक्षित सफलता न मिलने के बाद राज ठाकरे ने साफ शब्दों में कहा कि यह लड़ाई केवल सीटों की नहीं, बल्कि मराठी मानूस के हक और सम्मान की है। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव धनबल और सत्ता के दबाव में लड़ा गया, जहां क्षेत्रीय मुद्दों को पीछे धकेल दिया गया। राज ठाकरे ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा कि सत्ता की ताकत के सहारे मुंबई की राजनीति को नियंत्रित करने की कोशिश की जा रही है, लेकिन मराठी पहचान को कमजोर नहीं होने दिया जाएगा।
मराठी अस्मिता की लड़ाई जारी
राज ठाकरे ने यह भी स्पष्ट किया कि भले ही MNS को इस चुनाव में सीमित सीटें मिली हों, लेकिन संघर्ष जारी रहेगा। उन्होंने कार्यकर्ताओं से निराश न होने की अपील करते हुए कहा कि मराठी भाषा, संस्कृति और स्थानीय लोगों के अधिकारों की लड़ाई सड़कों से लेकर सदन तक जारी रहेगी। उनके मुताबिक यह चुनाव केवल एक नगर निकाय का नहीं, बल्कि महाराष्ट्र की आत्मा से जुड़ा हुआ था।
MNS का कमजोर प्रदर्शन
महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के लिए बीएमसी चुनाव 2026 निराशाजनक साबित हुआ। पार्टी को केवल 6 सीटों पर जीत मिली। मराठी अस्मिता, भाषा और स्थानीय रोजगार जैसे मुद्दों को केंद्र में रखकर लड़े गए चुनाव के बावजूद पार्टी अपेक्षित समर्थन नहीं जुटा सकी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि शहरी मतदाताओं में बिखराव और बड़े गठबंधनों के सामने अकेले चुनाव लड़ना MNS के लिए भारी पड़ गया। हालांकि पार्टी ने दावा किया है कि उसके निर्वाचित नगरसेवक बीएमसी में मराठी हितों की आवाज मजबूती से उठाएंगे।
ठाकरे परिवार को दोहरी चुनौती
इस चुनाव में ठाकरे परिवार की राजनीति दो मोर्चों पर बंटी नजर आई। एक ओर उद्धव बालासाहेब ठाकरे गुट (UBT) था, तो दूसरी ओर राज ठाकरे की MNS। दोनों ही दल मराठी अस्मिता की बात करते रहे, लेकिन वोटों का विभाजन इसका बड़ा कारण बना। इसका सीधा फायदा बीजेपी और महायुति को मिला, जिसने संगठित रणनीति और संसाधनों के दम पर बढ़त बनाई।
शिवसेना दो गुटों में बंटी
बीएमसी चुनाव में शिवसेना की स्थिति भी बदली हुई नजर आई। एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना, जो बीजेपी के साथ महायुति में शामिल थी, ने 29 सीटों पर जीत दर्ज की। वहीं उद्धव ठाकरे गुट की शिवसेना (UBT) ने 65 सीटें हासिल कर दूसरा स्थान प्राप्त किया। दोनों गुटों को मिलाकर शिवसेना का आंकड़ा 94 सीटों तक जरूर पहुंचा, लेकिन पार्टी की एकजुट पहचान अब बीते दौर की बात बनती दिख रही है।
महायुति को मिला स्पष्ट बहुमत
बीजेपी ने अकेले 89 सीटें जीतकर बीएमसी में सबसे बड़ी पार्टी का दर्जा हासिल किया। शिंदे गुट की शिवसेना की 29 सीटों को मिलाकर महायुति का कुल आंकड़ा 118 तक पहुंच गया, जो स्पष्ट बहुमत है। इस जीत के साथ ही बीएमसी पर शिवसेना की लगभग 25 साल पुरानी पकड़ पूरी तरह खत्म हो गई। माना जा रहा है कि अब बीएमसी में महायुति की सरकार बनना और मेयर पद पर उसका कब्जा तय है।
अन्य दलों की स्थिति
बीएमसी चुनाव में कांग्रेस को 24 सीटों पर जीत मिली, जबकि AIMIM ने 8 सीटें हासिल कीं। अन्य छोटे दलों और निर्दलीय उम्मीदवारों को सीमित सफलता मिली। हालांकि ये दल सत्ता संतुलन में निर्णायक भूमिका में नहीं दिख रहे हैं।
मुंबई की राजनीति में नया दौर
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बीएमसी चुनाव 2026 ने मुंबई की राजनीति में नए दौर की शुरुआत कर दी है। एक ओर जहां बीजेपी ने शहरी राजनीति में अपनी पकड़ मजबूत की है, वहीं क्षेत्रीय दलों के सामने अस्तित्व और प्रासंगिकता बनाए रखने की चुनौती खड़ी हो गई है। चुनाव हार के बावजूद राज ठाकरे ने यह स्पष्ट कर दिया है कि मराठियों के अधिकारों की लड़ाई थमने वाली नहीं है। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि MNS और UBT जैसे दल इस हार से क्या सबक लेते हैं और क्या मराठी राजनीति फिर से एकजुट होकर उभरती है या नहीं। फिलहाल, बीएमसी चुनाव ने महाराष्ट्र की सियासत को नए सिरे से परिभाषित कर दिया है।





