भारतीय राजनीति में बहुत कम चेहरे ऐसे होते हैं जो कम उम्र में इतनी तेज़ी से पहचान बना लें। राघव चड्ढा उन्हीं में से एक हैं। महज़ 37 वर्ष की उम्र में वे देश के सबसे युवा राज्यसभा सदस्यों में गिने जाते हैं। पंजाब से 2022 में राज्यसभा पहुंचने वाले राघव चड्ढा ने राजनीति से पहले चार्टर्ड अकाउंटेंसी जैसी पेशेवर दुनिया में अपनी मजबूत पहचान बनाई थी। पढ़ाई, करियर, आंदोलन, चुनाव और संसद—हर पड़ाव पर उनका सफ़र अलग कहानी कहता है।
चार्टर्ड अकाउंटेंट से सांसद तक का सफ़र
दिल्ली में जन्मे राघव चड्ढा की शुरुआती पढ़ाई-लिखाई राजधानी में ही हुई। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के श्री वेंकटेश्वर कॉलेज से स्नातक की डिग्री हासिल की और इसके बाद चार्टर्ड अकाउंटेंसी की कठिन राह चुनी। पढ़ाई के साथ-साथ उन्होंने विदेश में भी अकादमिक अनुभव लिया और लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से आगे की शिक्षा प्राप्त की।
राजनीति में आने से पहले राघव ने कॉर्पोरेट सेक्टर में बतौर सीए काम किया। उन्होंने डेलॉइट और ग्रांट थॉर्नटन जैसी नामी कंपनियों में सेवाएं दीं। खेलों में भी उनकी रुचि रही है—वे राज्य स्तर के बैडमिंटन खिलाड़ी रह चुके हैं और आज भी खाली समय में कोर्ट पर उतरना पसंद करते हैं।

आंदोलन से पार्टी राजनीति में एंट्री
2011 में शुरू हुए इंडिया अगेंस्ट करप्शन आंदोलन ने राघव चड्ढा की दिशा बदल दी। उस समय वे लंदन में प्रैक्टिस कर रहे थे, लेकिन देश में चल रहे भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन से जुड़ने के लिए भारत लौट आए। आंदोलन के बाद उन्होंने आम आदमी पार्टी का दामन थाम लिया और अरविंद केजरीवाल के साथ संगठन निर्माण में जुट गए।
2012 में उन्हें पार्टी का कोषाध्यक्ष बनाया गया। बाद में वे दिल्ली के तत्कालीन उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के सलाहकार भी रहे। संगठनात्मक अनुभव के दम पर 2018–19 में उन्हें दक्षिणी दिल्ली लोकसभा क्षेत्र का प्रभारी बनाया गया। 2019 का लोकसभा चुनाव उन्होंने लड़ा, हालांकि जीत नहीं मिली। इसके बावजूद पार्टी में उनकी भूमिका लगातार बढ़ती गई।

विधानसभा, राज्यसभा और संसद में मुद्दों की आवाज़
फरवरी 2020 में राघव चड्ढा ने राजिंदर नगर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की। इसके दो साल बाद, 21 मार्च 2022 को आम आदमी पार्टी ने उन्हें पंजाब से राज्यसभा भेजा। इसी के साथ वे उच्च सदन के सबसे युवा सदस्यों में शामिल हो गए।
संसद में राघव चड्ढा ने आम लोगों से जुड़े विषयों को प्रमुखता से उठाया। गिग वर्कर्स के अधिकार, मिलावटी खाद्य पदार्थों का खतरा, और हवाई अड्डों पर खाने-पीने की बढ़ती कीमतों जैसे मुद्दों पर उन्होंने सरकार का ध्यान आकर्षित किया। कई बार उनके सवाल और भाषण सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बने।
विवाद, निजी जीवन और सुर्खियां
राघव चड्ढा का राजनीतिक सफ़र विवादों से भी अछूता नहीं रहा। 2018 में उपमुख्यमंत्री के सलाहकार के रूप में उनकी नियुक्ति को लेकर विवाद हुआ, जब तत्कालीन गृह मंत्री के आदेश से कुछ सलाहकारों की नियुक्तियां रद्द कर दी गईं। 2023 में दिल्ली शराब नीति मामले में ईडी की चार्जशीट में उनका नाम आने से भी सियासी हलचल मची। इसी साल राज्यसभा में एक प्रस्ताव से जुड़े हस्ताक्षर विवाद के चलते उनका निलंबन भी हुआ।
राजनीति के साथ-साथ उनका निजी जीवन भी चर्चा में रहा। अभिनेत्री परिणीति चोपड़ा से सगाई और फिर 24 सितंबर 2023 को हुई शादी ने उन्हें सियासी गलियारों के बाहर भी सुर्खियों में ला दिया।
संपत्ति की बात करें तो राघव चड्ढा की कुल नेट वर्थ 2020 तक लगभग 20 लाख रुपये आंकी गई थी। उनके पास 2009 मॉडल की मारुति स्विफ्ट डिज़ायर कार है, कुछ बैंक जमा, शेयर-बॉन्ड और सीमित आभूषण शामिल हैं—जो उन्हें अपेक्षाकृत सादगी पसंद नेता के रूप में पेश करते हैं।
राघव चड्ढा की कहानी आधुनिक राजनीति की उस पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करती है, जो पेशेवर पृष्ठभूमि, आंदोलन का अनुभव और संसद में सक्रिय भूमिका—तीनों को साथ लेकर चलती है। कम उम्र, तेज़ तर्रार छवि और मुद्दों पर मुखरता ने उन्हें राष्ट्रीय राजनीति में एक अलग पहचान दी है।