राधाकृष्णन ने ली उपराष्ट्रपति पद की शपथ…समारोह में नजर आए धनखड़…त्यागपत्र के 53 दिन बाद पहली बार आए नजर
पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने जुलाई 2025 में अपने पद से इस्तीफा दिया था। इसके बाद पहली बार इस माह की 9 तारीख को सार्वजनिक बयान जारी कर उन्होंने राधाकृष्णन को बधाई दी थी। धनखड़ ने अपने पत्र में लिखा था कि देश के नए उपराष्ट्रपति की यह उपलब्धि देश के प्रतिनिधियों का विश्वास दर्शाती है।
देश के नए उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने शुक्रवार 12 सितंबर को 15वें उपराष्ट्रपति के तौर पर पद की शपथ ग्रहण की है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राधाकृष्णा को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। शपथ ग्रहण समारोह में देश के पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ भी शामिल हुए। वे समारोह में नजर आए।
- राधाकृष्णन ने ली उपराष्ट्रपति पद की शपथ
- सीपी राधाकृष्णन बने भारत के 15वें उपराष्ट्रपति
- राष्ट्रपति मुर्मू ने दिलाई पद और गोपनीयता की शपथ
- शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री मोदी
- अमित शाह और कई बड़े नेता मौजूद
- 15वें उपराष्ट्रपति बने सीपी राधाकृष्णन
- 53 दिन बाद पहली बार दिखे जगदीप धनखड़
शुक्रवार, 12 सितंबर 2025 को सीपी राधाकृष्णन ने भारत के 15वें उपराष्ट्रपति के रूप में शपथ ली। राष्ट्रपति भवन में आयोजित भव्य समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। उपराष्ट्रपति चुनाव में राधाकृष्णन ने इंडिया ब्लॉक उम्मीदवार सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज बी. सुदर्शन रेड्डी को परास्तकर जीत हासिल की है। इस चुनाव में कुल 788 सांसदों में से 767 ने मतदान किया। राधाकृष्णन को उम्मीद से ज्यादा 452 वोट मिले, जबकि विपक्षी उम्मीदवार सुदर्शन रेड्डी को केवल 300 वोटों से संतोष करना पड़ा। राधाकृष्णन की यह जीत भाजपा और एनडीए के लिए बड़ी राजनीतिक सफलता मानी जा रही है।
शपथ ग्रहण में दिखे पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़
शपथ समारोह की सबसे खास झलक रही पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ की मौजूदगी। धनखड़ ने 21 जुलाई 2025 को स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए अपने पद से इस्तीफा दिया था। इस्तीफे के बाद यह पहली बार था जब वे सार्वजनिक तौर पर दिखाई दिए। समारोह के दौरान धनखड़ अन्य पूर्व उपराष्ट्रपतियों वेंकैया नायडू और हामिद अंसारी के साथ बैठे नजर आए। इससे पहले उन्होंने 9 सितंबर को सीपी राधाकृष्णन को बधाई संदेश जारी किया था, लेकिन प्रत्यक्ष रूप से यह उनकी पहली सार्वजनिक उपस्थिति रही। धनखड़ ने 2022 में उपराष्ट्रपति पद संभाला था और तीन साल पूरे करने से पहले ही पद से हट गए। 21 जुलाई को उन्होंने अचानक इस्तीफा दिया, उस समय संसद का मॉनसून सत्र शुरू ही हुआ था। उन्होंने इस्तीफा देने के बावजूद उसी दिन राज्यसभा की कार्यवाही भी चलाई थी।
यही वजह रही कि विपक्ष ने उनके इस्तीफे पर सवाल उठाए। विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि अगर स्वास्थ्य कारण इतने गंभीर थे तो वे सत्र से पहले ही पद छोड़ सकते थे। इसके बाद उनके सार्वजनिक जीवन से पूरी तरह गायब हो जाने पर राजनीतिक हलकों और सोशल मीडिया में तरह-तरह की अटकलें लगाई जाने लगीं।
सरकार ने इसे धनखड़ का “निजी मामला” बताया, लेकिन उनकी चुप्पी और अनुपस्थिति चर्चा का विषय बनी रही। रिपोर्ट्स के अनुसार, उन्होंने इस्तीफे के बाद भी आधिकारिक आवास में ही रहना जारी रखा और अगस्त तक नया सरकारी आवास मिलने का इंतजार करते रहे।
समारोह में दिखी राजनीतिक एकजुटता
राधाकृष्णन के शपथ ग्रहण समारोह में राजनीतिक जगत की बड़ी हस्तियां मौजूद रहीं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
गृहमंत्री अमित शाह
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह
कई केंद्रीय मंत्री और सांसद
विपक्षी नेताओं ने भी समारोह में शिरकत की
यह समारोह न सिर्फ संवैधानिक औपचारिकता का प्रतीक रहा, बल्कि सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों के नेताओं के बीच मौजूद राजनीतिक शिष्टाचार का भी उदाहरण बना।
राधाकृष्णन की पृष्ठभूमि और उम्मीदें
सीपी राधाकृष्णन भाजपा के वरिष्ठ नेता और तमिलनाडु से आने वाले प्रभावशाली राजनेता हैं। उन्हें सादगी और साफ-सुथरी छवि के लिए जाना जाता है। उनकी जीत को दक्षिण भारत में भाजपा की पकड़ मजबूत करने की रणनीति से भी जोड़कर देखा जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उपराष्ट्रपति के रूप में उनका कार्यकाल भाजपा और एनडीए के लिए संसदीय राजनीति में और मजबूती लाने वाला होगा। संसद की कार्यवाही को सुचारू ढंग से चलाना, विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच संतुलन बनाना उनके लिए बड़ी चुनौती होगी।
धनखड़ की उपस्थिति का महत्व
धनखड़ का शपथ समारोह में आना कई मायनों में अहम माना जा रहा है। इससे यह संकेत गया कि वे सक्रिय सार्वजनिक जीवन से पूरी तरह दूर नहीं हुए हैं। उनके स्वास्थ्य और राजनीतिक भविष्य को लेकर उठ रही अटकलों पर भी कुछ हद तक विराम लगा। उनकी मौजूदगी ने शपथ ग्रहण समारोह की गरिमा को और बढ़ा दिया। प्रकाश कुमार पांडेय





