बिहार: राबड़ी देवी को खाली करना होगा 10 सर्कुलर रोड का आवास, 20 साल बाद आई ये नौबत

बिहार: राबड़ी देवी को खाली करना होगा 10 सर्कुलर रोड का आवास, 20 साल बाद आई ये नौबत

बिहार की राजनीति एक बार फिर गरमाई हुई है। सत्ता परिवर्तन के बाद अब सरकारी आवासों के पुनर्वितरण की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, और इसी क्रम में एक बड़ा फैसला सामने आया है। पूर्व मुख्यमंत्री और RJD नेता राबड़ी देवी को उनका सरकारी आवास 10 सर्कुलर रोड खाली करने का आदेश दिया गया है। लगभग 20 साल से यह बंगला उनके नाम पर आवंटित था, लेकिन अब उन्हें विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष की हैसियत से एक नया आवास दिया गया है।

सत्ता परिवर्तन के बाद आवास आवंटन में फेरबदल

पटना में नई एनडीए सरकार बनने के बाद मंत्रियों और महत्वपूर्ण पदों पर बैठे नेताओं के लिए नए आवास आवंटन किए जा रहे हैं। भवन निर्माण विभाग ने मंगलवार को जारी आदेश में राबड़ी देवी के आवास परिवर्तन को भी शामिल किया है। विभाग के संयुक्त सचिव-सह-भू-संपदा पदाधिकारी शिव रंजन द्वारा जारी आदेश में साफ कहा गया है कि 10 सर्कुलर रोड को अब खाली करना होगा और इसके बदले में 39 हार्डिंग रोड पर नया आवास दिया गया है। राबड़ी देवी अब बिहार विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष हैं, इसलिए उन्हें उनके पद के अनुरूप आवास उपलब्ध कराया गया है। यह बदलाव राज्य सरकार के उस निर्णय का हिस्सा है, जिसके तहत सभी पदाधिकारियों को उनकी रैंक के अनुसार आवास आवंटित किए जा रहे हैं।

20 वर्षों से था आवंटन, अब बदलना पड़ा घर

राबड़ी देवी को 10 सर्कुलर रोड का बंगला लगभग दो दशकों से आवंटित था। वर्ष 2005 के बाद से यह बंगला उनके पास ही रहा और लालू प्रसाद परिवार की राजनीतिक गतिविधियों का केंद्र भी यही बना रहा। कई महत्वपूर्ण राजनीतिक बैठकें और रणनीतियाँ इसी आवास से संचालित होती रहीं। लेकिन सत्ता के समीकरण बदलते ही अब आवास पुनर्वितरण की प्रक्रिया ने इस पुराने बंगले को भी प्रभावित कर दिया है। 20 साल से जिस आवास को राजनीतिक और पारिवारिक पहचान के रूप में देखा जाता था, उसे खाली करने का समय अब आ गया है।

जेडीयू का कटाक्ष—‘इस बार टोटी भी नहीं खोलेंगी’

राजनीतिक टिप्पणी और तंज भी इस फैसले के बाद शुरू हो चुके हैं। जेडीयू के प्रवक्ता नीरज कुमार ने इस मुद्दे पर राबड़ी देवी को निशाने पर लेते हुए कहा कि यदि सरकार ने आदेश दिया है तो उन्हें तुरंत आवास खाली कर देना चाहिए। उन्होंने पुरानी घटनाओं का जिक्र करते हुए कटाक्ष किया कि “हमें उम्मीद है कि इस बार राबड़ी देवी सरकारी संपत्ति को कोई नुकसान नहीं पहुंचाएंगी और न ही घर की ‘टोटी’ तक खोलेंगी।” यह बयान उन रिपोर्टों पर आधारित है जिनमें दावा किया गया था कि पूर्व में कुछ नेताओं ने सरकारी आवास खाली करते समय संपत्ति को नुकसान पहुँचाया था। जेडीयू ने उसी इतिहास को उछालते हुए राजनीतिक वार किया है।

भाजपा ने भी साधा निशाना, कहा—‘नज़र रहेगी पैनी’

भाजपा प्रवक्ताओं ने भी इस आवास परिवर्तन पर टिप्पणी करते हुए कहा है कि राबड़ी देवी के नए आवास में होने वाली गतिविधियों पर उनकी पार्टी की पैनी नज़र रहेगी। बीजेपी नेताओं ने कहा कि सरकार पारदर्शिता चाहती है और यह राबड़ी देवी जैसे वरिष्ठ नेताओं पर भी समान रूप से लागू होता है।

40 हार्डिंग रोड का नया आवास—नई भूमिका, नया घर

राबड़ी देवी को जो नया आवास दिया गया है, वह विधान परिषद के नेता प्रतिपक्ष के लिए तय मानकों के अनुसार है। 39 हार्डिंग रोड स्थित यह बंगला सरकारी मानकों के मुताबिक पूरी तरह से विकसित जगह है और सुरक्षा, प्रोटोकॉल और कार्यालय गतिविधियों के लिए उपयुक्त है। सरकार का कहना है कि यह आवंटन बिल्कुल नियमों के अनुरूप है और पद के हिसाब से किया गया है। विपक्ष हालांकि इसे राजनीतिक दबाव का परिणाम बता रहा है, लेकिन आधिकारिक तौर पर इसे नियमित प्रक्रिया कहा जा रहा है।

आवास विवाद—बिहार की राजनीति का पुराना अध्याय

बिहार में सत्ता परिवर्तन के बाद सरकारी बंगले खाली कराए जाने और दोबारा आवंटन का विवाद नया नहीं है। 2017 में नीतीश कुमार के NDA में जाने के बाद RJD के कई नेताओं को आवास खाली करने पड़े थे। उस समय भी आरोप लगे थे कि कुछ लोगों ने सरकारी संपत्तियों को नुकसान पहुँचाया या सामान उखाड़कर ले गए। यही वजह है कि इस बार सत्ताधारी दलों के नेता फिर से वही मुद्दा उठा रहे हैं।

राबड़ी देवी की चुप्पी, RJD ने इसे बताया ‘राजनीतिक बदले की कार्रवाई’

राबड़ी देवी की ओर से अभी तक इस पूरे मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन RJD नेताओं ने इस कदम को “राजनीतिक बदले की कार्रवाई” बताया है। लालू परिवार के करीबी नेताओं का कहना है कि सरकार विपक्ष की आवाज़ को कमजोर करने के लिए इस तरह के फैसले ले रही है। हालांकि सरकार का तर्क है कि आवास आवंटन नियमों के मुताबिक किया जा रहा है, और जिन पदों पर बदलाव हुआ है, उसी के आधार पर नया आवास दिया गया है। 10 सर्कुलर रोड का बंगला अब राबड़ी देवी को खाली करना होगा—यह फैसला न सिर्फ प्रशासनिक प्रक्रिया है, बल्कि यह बिहार की राजनीतिक हलचल का एक अहम संकेत भी है। विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच यह मुद्दा बहस का कारण बन चुका है। 20 साल बाद पहली बार घर बदलने की स्थिति आई है, और इस बदलाव ने राज्य में राजनीतिक बयानबाज़ी को और तेज़ कर दिया है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि राबड़ी देवी इस फैसले पर क्या प्रतिक्रिया देती हैं और क्या यह मुद्दा बिहार की राजनीति में नया तूफान खड़ा करता है या फिर एक औपचारिक प्रक्रिया बनकर रह जाता है।

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