प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत सरकार का ‘दलहन आत्मनिर्भरता मिशन’ केवल दाल उत्पादन बढ़ाने का कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह देश की भावी पीढ़ी को सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने का एक बड़ा अभियान है। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर भारत का लक्ष्य तभी पूरा होगा जब देश अनाज के साथ-साथ दाल और तिलहन उत्पादन में भी आत्मनिर्भर बनेगा।
प्रधानमंत्री ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा “दलहन आत्मनिर्भरता मिशन का मकसद केवल उत्पादन बढ़ाना नहीं, बल्कि हमारे किसानों की आय बढ़ाना, पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करना और भावी पीढ़ियों के लिए एक स्थायी कृषि व्यवस्था बनाना है।”
दाल उत्पादन में आत्मनिर्भरता की दिशा
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि देश में हर साल लगभग 27 मिलियन टन दाल की जरूरत होती है, जबकि उत्पादन करीब 25 मिलियन टन तक पहुंचा है। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य आने वाले कुछ वर्षों में भारत को 100% दाल आत्मनिर्भर देश बनाना है। इसके लिए सरकार ने नए बीज, सिंचाई योजनाएं, मिनी-किट वितरण और किसान पाठशाला कार्यक्रम शुरू किए हैं ताकि छोटे किसान भी आधुनिक तकनीक से खेती कर सकें।
किसानों की आय बढ़ाने की प्रतिबद्धता
प्रधानमंत्री ने कहा कि किसानों की आय को दोगुना करने की दिशा में दलहन मिशन की बड़ी भूमिका है। उन्होंने बताया कि सरकार दाल उत्पादकों को बीज पर सब्सिडी, फसल बीमा, न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) और क्लस्टर डेमो प्रोजेक्ट्स जैसी सुविधाएं दे रही है। “आज हम जो निवेश बीज, सिंचाई और तकनीक में कर रहे हैं, वही आने वाले वर्षों में किसानों की आमदनी बढ़ाने का आधार बनेगा।”
पोषण सुरक्षा में दालों की भूमिका
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि दालें प्रोटीन का सबसे सस्ता और पौष्टिक स्रोत हैं।
उन्होंने कहा कि “अगर हर परिवार को पोषणयुक्त भोजन देना है, तो हमें दालों में आत्मनिर्भर होना ही पड़ेगा। इस मिशन से पोषण सुरक्षा, स्वास्थ्य सुधार और खाद्य संतुलन तीनों में सुधार होगा।
भावी पीढ़ी के लिए टिकाऊ कृषि
प्रधानमंत्री ने कहा कि यह मिशन किसानों की अगली पीढ़ी के लिए सतत (Sustainable) कृषि प्रणाली तैयार करेगा। दलहनी फसलें मिट्टी की उर्वरता बढ़ाती हैं और कम पानी में भी अच्छी उपज देती हैं। उन्होंने कहा कि “यह मिशन हमारी भावी पीढ़ियों के लिए एक हरित और समृद्ध भारत का रास्ता खोलेगा।
राज्यों और किसानों से अपील
प्रधानमंत्री मोदी ने सभी राज्यों से इस अभियान में अधिकाधिक भागीदारी की अपील की।
उन्होंने कहा कि राज्यों के सहयोग से यह मिशन राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा के साथ पोषण सुरक्षा को भी मजबूत करेगा। साथ ही उन्होंने किसानों से कहा कि वे दलहन फसलों की विविधता अपनाएं, जिससे मिट्टी की सेहत और आमदनी दोनों में सुधार हो।
जय किसान’ से ‘आत्मनिर्भर भारत’ तक
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन के अंत में कहा जब हमारे किसान समृद्ध होंगे, तब ही भारत आत्मनिर्भर होगा। दलहन आत्मनिर्भरता मिशन, किसान सशक्तिकरण और नई पीढ़ी के उज्जवल भविष्य की दिशा में उठाया गया एक ऐतिहासिक कदम है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का “दलहन आत्मनिर्भरता मिशन” न सिर्फ दाल उत्पादन का कार्यक्रम है, बल्कि कृषि सुधार, पोषण सुरक्षा और आने वाली पीढ़ियों के सशक्त भारत की मजबूत नींव रखने वाला एक राष्ट्र निर्माण अभियान है।