मोदी का मिशन सीमांचल…राहुल का दौरा, ओवैसी फैक्टर और 24 मुस्लिम बहुल सीटों पर BJP की बड़ी सियासी जंग सीमांचल पर सबकी नजर..!

मोदी का मिशन सीमांचल

राहुल का दौरा, ओवैसी फैक्टर और 24 मुस्लिम बहुल सीटों पर बीजेपी की बड़ी सियासी जंग

सीमांचल पर सबकी नजर

बिहार विधानसभा चुनाव की तारीख भले ही औपचारिक रूप से घोषित न हुई हो, लेकिन राजनीतिक दलों की गतिविधियों ने साफ कर दिया है कि सियासी तपिश चरम पर है। इसी बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सोमवार को होने वाला पूर्णिया दौरा बेहद अहम माना जा रहा है। मिथिलांचल, चंपारण और मगध के बाद अब बीजेपी की निगाहें सीमांचल पर हैं। यह इलाका मुस्लिम बहुल है और यहां 24 विधानसभा सीटें आती हैं। सत्ता की कुंजी अक्सर इसी क्षेत्र से होकर गुजरती है। यही वजह है कि राहुल गांधी से लेकर असदुद्दीन ओवैसी तक सबकी नजरें सीमांचल पर टिकी हुई हैं।

पीएम मोदी की सौगातों की झड़ी

प्रधानमंत्री मोदी पूर्णिया एयरपोर्ट के नए टर्मिनल भवन का उद्घाटन करेंगे। इसके साथ ही करीब 40 हजार करोड़ रुपये की योजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन भी करेंगे। इन योजनाओं में सड़क, बिजली, शिक्षा और कृषि से जुड़े बड़े प्रोजेक्ट शामिल हैं।रेल कनेक्टिविटी: प्रधानमंत्री चार नई ट्रेनों को हरी झंडी दिखाएंगे, जिनमें अररिया-गलगलिया, जोगबनी-दानापुर वंदे भारत एक्सप्रेस, सहरसा-अमृतसर और जोगबनी-इरोड अमृत भारत एक्सप्रेस शामिल हैं। ऊर्जा परियोजना: भागलपुर के लिए अल्ट्रा सुपर क्रिटिकल पावर प्रोजेक्ट का शिलान्यास किया जाएगा। जल परियोजना: 2680 करोड़ रुपये की कोसी-मेची परियोजना और 2170 करोड़ की विक्रमशिला-कटारिया रेल लाइन का उद्घाटन होगा। रेल नेटवर्क विस्तार: 4410 करोड़ की अररिया-गलगलिया रेल लाइन भी जनता को समर्पित की जाएगी।

आवास: प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बने 40,920 घरों की चाबी लाभार्थियों को सौंपी जाएगी।

मखाना बोर्ड: प्रधानमंत्री राष्ट्रीय मखाना बोर्ड के गठन का ऐलान करेंगे। सरकार का दावा है कि इससे इस उद्योग में रोजगार और आय दोनों बढ़ेंगे।

विकास के बहाने सियासत

प्रधानमंत्री मोदी का सीमांचल दौरा महज विकास योजनाओं तक सीमित नहीं है। इसे विधानसभा चुनाव से जोड़कर देखा जा रहा है। बीजेपी और जेडीयू जहां विकास के मुद्दे पर जनता को साधने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं आरजेडी और कांग्रेस बेरोजगारी और महंगाई पर सरकार को घेर रही हैं। ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम सीमांचल में अपनी पकड़ मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मोदी का सीमांचल दौरा सीधे-सीधे मुस्लिम वोट बैंक पर असर डालने वाला है। हालांकि, बीजेपी इस इलाके में 2020 के चुनावों में अपेक्षा से कम सीटें जीत पाई थी। यही वजह है कि इस बार प्रधानमंत्री व्यक्तिगत रूप से विकास का चेहरा बनकर यहां पहुंच रहे हैं।

राहुल गांधी और ओवैसी का समीकरण

कांग्रेस नेता राहुल गांधी भी आने वाले दिनों में सीमांचल का दौरा करने वाले हैं। उनकी रणनीति यहां अल्पसंख्यक और युवा वोटरों को साधने की होगी। उधर, असदुद्दीन ओवैसी पहले से ही सीमांचल में सक्रिय हैं और 2020 में उनकी पार्टी ने यहां आरजेडी और कांग्रेस को सीधी चुनौती दी थी। ओवैसी मुस्लिम वोटों को बांटकर सियासी समीकरण बदल सकते हैं। बीजेपी के लिए चुनौती यह है कि क्या वह विकास के मुद्दे पर मुस्लिम बहुल सीटों में अपनी स्थिति मजबूत कर पाएगी? या फिर राहुल गांधी और ओवैसी जैसे नेताओं की मौजूदगी से विपक्षी वोटों का बिखराव बीजेपी को फायदा पहुंचाएगा?

24 सीटों का गणित

सीमांचल की 24 सीटें बिहार विधानसभा में संतुलन बनाने में अहम मानी जाती हैं। इनमें अररिया, किशनगंज, कटिहार और पूर्णिया जैसे जिले शामिल हैं। यहां की आबादी में मुस्लिम वोटरों की हिस्सेदारी 40% से ज्यादा है। यही कारण है कि हर दल यहां पूरी ताकत झोंक रहा है। बीजेपी-जेडीयू की कोशिश है कि विकास योजनाओं और मोदी की लोकप्रियता के सहारे समर्थन जुटाया जाए। आरजेडी मुस्लिम-यादव समीकरण को मजबूती देने की रणनीति पर काम कर रही है। कांग्रेस राहुल गांधी के दौरे से अल्पसंख्यकों और युवाओं में अपनी पकड़ बनाना चाहती है। ओवैसी अपनी पार्टी एआईएमआईएम के जरिए मुस्लिम वोटों में सेंध लगाने का प्रयास कर रहे हैं।

संदेश और रणनीति

प्रधानमंत्री मोदी का यह सातवां बिहार दौरा है। इससे पहले अगस्त में उन्होंने गंगा नदी पर औंटा-सिमरिया पुल का उद्घाटन किया था। अब पूर्णिया से विकास योजनाओं का तोहफा देकर वह स्पष्ट संदेश देना चाहते हैं कि सीमांचल अब राजनीतिक हाशिये पर नहीं, बल्कि केंद्र में है। बीजेपी का फोकस यहां पहली बार सिर्फ चुनावी रैलियों तक सीमित नहीं है। इस बार बड़े पैमाने पर इंफ्रास्ट्रक्चर, कृषि और उद्योग की योजनाओं की घोषणा की जा रही है, ताकि विकास का लाभ सीधे वोट में तब्दील हो सके। सीमांचल का इलाका बिहार की सियासत का अहम केंद्र बन गया है। मोदी का दौरा, राहुल गांधी की सक्रियता और ओवैसी का फैक्टर—तीनों मिलकर इस बार का चुनावी समीकरण और भी रोचक बना रहे हैं। सवाल यही है कि क्या मोदी विकास की सौगातों के जरिए सीमांचल में कमल खिला पाएंगे? या फिर राहुल-ओवैसी और आरजेडी-कांग्रेस की तिकड़ी बीजेपी की राह मुश्किल कर देगी? बिहार की राजनीति का भविष्य काफी हद तक सीमांचल की इन 24 सीटों पर टिका है। (प्रकाश कुमार पांडेय)

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