गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा- विश्व मंच पर हम आत्मविश्वास से भरे राष्ट्र के तौर पर उभरे

नई दिल्ली।  गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने राष्ट्र के नाम संदेश दिया। उन्होंने अपने संदेश में कहा- 74वें गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर, देश और विदेश में रहने वाले आप सभी भारत के लोगों को, मैं हार्दिक बधाई देती हूं। जब हम गणतंत्र दिवस मनाते हैं, तब एक राष्ट्र के रूप में हमने मिल-जुलकर जो उपलब्धियां प्राप्त की हैं, उनका हम उत्सव मनाते हैं।

पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने को रेखांकित किया

राष्ट्रपति ने कहा- पिछले साल भारत दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया। यह उपलब्धि, आर्थिक अनिश्चितता से भरी वैश्विक पृष्ठभूमि में प्राप्त की गई है। सक्षम नेतृत्व और प्रभावी संघर्षशीलता के बल पर हम शीघ्र ही मंदी से बाहर आ गए, और अपनी विकास यात्रा को फिर से शुरू किया।

उन्होंने महिला सशक्तीकरण पर भी जोर दिया और कहा कि महिला और पुरुष के बीच समानता अब केवल नारे नहीं रह गए हैं। मेरे मन में कोई संदेह नहीं है कि महिलाएं ही आने वाले कल के भारत को स्वरूप देने के लिए अधिकतम योगदान देंगी। सशक्तीकरण की यही दृष्टि अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों सहित, कमजोर वर्गों के लोगों के लिए सरकार की कार्य-प्रणाली का मार्गदर्शन करती है।

पर्यावरण पर राष्ट्रपति की क्लास

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा- वास्तव में हमारा उद्देश्य न केवल अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लोगों के जीवन की बाधाओं को दूर करना और उनके विकास में मदद करना है, बल्कि उन समुदायों से सीखना भी है। जनजातीय समुदाय के लोग, पर्यावरण की रक्षा से लेकर समाज को और अधिक एकजुट बनाने तक, कई क्षेत्रों में सीख दे सकते हैं।

अंत में उन्होंने हरेक भारतवासी को सराहा और कहा कि वह किसानों, मजदूरों, वैज्ञानिकों और इंजीनियरों की भूमिकाओं की सराहना करती हैं।

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