अजब गजब है ये सियासत,दमोह में जो सांसद थे वही चुने गए विधायक,क्या सांसद से विधायक बनेंगे प्रहलाद?

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मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में कई रोचक और रहस्य के साथ संयोग से भरे हुए नजरे भी सामने आ रहे हैं। बात करें दमोह जिले की तो यहां रोचक तथ्य सामने आया है। वह यह की दमोह में 34 साल से बीजेपी के करीब 9 सांसद चुने गए। इसे संयोग करें या कुछ और यह सभी पहले या बाद में विधायक भी बने और विधानसभा की दहलीज तक पहुंचे। बीजेपी से अब चुनाव मैदान में प्रहलाद पटेल भी आ गए हैं। केंद्रीय मंत्री पहलाद पटेल को भाजपा ने नरसिंहपुर विधानसभा क्षेत्र से चुनाव मैदान में उतारा है।

साल 1962 में दमोह पन्ना लोकसभा सीट अस्तित्व में आई थी तब से लेकर आज तक दमोह पन्ना लोकसभा सीट से 17 सांसद चुनकर लोकसभा की दहलीज तक पहुंचे। जिनमें से आठ सांसद कांग्रेस और जो सांसद भाजपा के जीते। आश्चर्य की बात है। सभी विधायक और सांसद रहे। यह रिवाज 1989 से शुरू हुआ था। उसे समय पन्ना राजधानी के लोकेंद्र सिंह दमोह से पहली बार लोकसभा के लिए चुने गए। इससे पहला पन्ना के विधायक चुने गए थे। उनके बाद सांसद बने रामकृष्ण कुसमारिया हों या चंद्रवंशी और शिवराज सिंह लोधी सभी के समय यह परंपरा कायम रही।

रामकृष्ण कुसमारिया 1991 से 1999 तक चार बार रहे सांसद

बता दे रामकृष्ण कुसमारिया 1991 से 1999 तक चार बार सांसद चुनकर लोकसभा पहुंचे बाद में पथरिया और जाता विधानसभा सीट से चुनकर राज्य सरकार में मंत्री बने इसी तरह चंद्रभान सिंह लोधी की बात करें तो 2004 में वे सांसद चुने गए थे। जबकि वह बीजेपी के टिकट पर इससे पहले विधायक चुने गए। चंद्रभान सिंह ने लोकसभा सांसद का चुनाव विधायक रहते हुए ही लड़ा था।

क्या सांसद से विधायक बनेंगे प्रहलाद?

वहीं शिवराज सिंह लोधी बात की करें तो चंद्रभान सिंह लोधी के बाद साल 2009 में शिवराज लोधी सांसद चुने गए वह बंदा के रहने वाले हैं जबकि वे पहले बांदा से विधायक चुने गए थे। कुछ इसी तरह का संयोग प्रहलाद सिंह पटेल के साथ भी बनता नजर आ रहा है। पहले 2014 उसके बाद 2019 में प्रहलाद पटेल दमोह संसदीय सीट से उनका लोकसभा पहुंचे और केंद्रीय मंत्री बने। अब बीजेपी ने उन्हें नरसिंहपुर से विधानसभा चुनाव मैदान में उतार दिया है। राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि लोकसभा सीट दमोह पर यह परंपरा की लंबे समय से कायम है। खासकर बीजेपी में ऐसा हुआ। सबसे ज्यादा चुनाव डॉक्टर रामकृष्णावरिया लोकसभा और विधानसभा पहुंचे कुसमारिया चार बार लोकसभा चुनाव लड़े। चार बार विधानसभा। पिछले चुनाव में बीजेपी से टिकट न मिलने पर रामकृष्ण कुसमरिया निर्दलीय मैदान में उतर गए हालांकि उन्हें हार का सामना करना पड़ा था।

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