प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना PMMSY:हरियाणा में ‘नीली क्रांति’ को रफ्तार, मत्स्य क्षेत्र में 760 करोड़ से ज्यादा निवेश को मंजूरी

Pradhan Mantri Matsya Sampada Yojana

हरियाणा में ‘नीली क्रांति’ को रफ्तार, मत्स्य क्षेत्र में 760 करोड़ से ज्यादा निवेश को मंजूरी

हरियाणा में मत्स्य पालन क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत राज्य के 760.87 करोड़ रुपए के प्रस्तावों को मंजूरी दी गई है। इस पहल का उद्देश्य न केवल मत्स्य उत्पादन बढ़ाना है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देना और रोजगार के नए अवसर पैदा करना भी है। केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री ने राज्यसभा में जानकारी देते हुए बताया कि स्वीकृत प्रस्तावों में केंद्र सरकार की हिस्सेदारी 262.16 करोड़ रुपए है, जिसमें से 168.61 करोड़ रुपए की राशि पहले ही जारी की जा चुकी है। यह निवेश वर्ष 2020-21 से 2024-25 के बीच विभिन्न परियोजनाओं के लिए किया गया है।

सरकार का फोकस केवल उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि मत्स्य पालन से जुड़ी पूरी वैल्यू चेन को मजबूत करने पर है। इसके तहत राज्य में मत्स्य अवसंरचना और जलीय कृषि के विकास पर विशेष जोर दिया जा रहा है। आधुनिक तकनीकों को अपनाने, नए तालाबों के निर्माण और उत्पादन क्षमता में वृद्धि के जरिए इस क्षेत्र को संगठित और लाभकारी बनाया जा रहा है।

योजना के अंतर्गत बड़े पैमाने पर परियोजनाएं स्वीकृत की गई हैं। करीब 3766 हेक्टेयर क्षेत्र में नए मत्स्य तालाबों का निर्माण किया जा रहा है, जिससे उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि की उम्मीद है। इसके अलावा 166 मछली कियोस्क, 130 पुनर्चक्रण मत्स्य पालन प्रणाली (RAS), 326 बायोफ्लॉक यूनिट, 11 मीठे पानी की हैचरी और 48 फिश फीड मिलों को मंजूरी दी गई है। यह सभी परियोजनाएं आधुनिक और टिकाऊ मत्स्य पालन को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभाएंगी।

मत्स्य क्षेत्र में सप्लाई चेन को मजबूत करने के लिए भी महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। राज्य में 23 आइस प्लांट और कोल्ड स्टोरेज इकाइयों का निर्माण किया जा रहा है, जिससे मछली के संरक्षण और परिवहन में होने वाले नुकसान को कम किया जा सकेगा। इसके साथ ही एक एकीकृत एक्वा पार्क और 9 सजावटी मछली पालन इकाइयों की स्थापना भी की जा रही है, जो इस क्षेत्र को और विविधता प्रदान करेगी। इस योजना का लाभ जमीनी स्तर पर भी देखने को मिल रहा है। Hisar और Karnal जैसे जिलों में मछली पालकों को आर्थिक सहायता दी गई है। हिसार में 514.51 लाख रुपए और करनाल में 1151.95 लाख रुपए की मदद से स्थानीय किसानों की आय में वृद्धि हुई है और उन्हें नए अवसर मिले हैं।

मत्स्य पालन को अब हरियाणा में एक लाभकारी व्यवसाय के रूप में देखा जाने लगा है। इस योजना के तहत विशेष रूप से महिलाओं और अनुसूचित जाति समुदाय को प्रोत्साहित किया जा रहा है, जिससे सामाजिक और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिल रहा है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए द्वार खुल रहे हैं और पलायन की समस्या को भी कम करने में मदद मिल रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह योजना हरियाणा में ‘नीली क्रांति’ को गति देने में अहम भूमिका निभा रही है। उत्पादन बढ़ने के साथ-साथ किसानों की आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की जा रही है। आधुनिक तकनीकों और बेहतर प्रबंधन के जरिए मत्स्य पालन को एक संगठित और टिकाऊ उद्योग के रूप में विकसित किया जा रहा है।

सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले वर्षों में हरियाणा को मत्स्य उत्पादन के क्षेत्र में अग्रणी राज्यों में शामिल किया जाए। इसके लिए निरंतर निवेश, तकनीकी सहयोग और प्रशिक्षण कार्यक्रमों पर जोर दिया जा रहा है। कुल मिलाकर, प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के प्रभावी क्रियान्वयन से हरियाणा में मत्स्य पालन क्षेत्र नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ रहा है। यह पहल न केवल किसानों की आय बढ़ाने में मददगार साबित हो रही है, बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था को भी नई मजबूती दे रही है।

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