उपराष्ट्रपति चुनाव पर बढ़ी सियासी हलचल : NDA उम्मीदवार के सामने इंडिया गठबंधन की रणनीति पर सबकी निगाहें…!

Political stir increases in Vice Presidential election India Alliance strategy against NDA candidate

उपराष्ट्रपति चुनाव पर बढ़ी सियासी हलचल : एनडीए उम्मीदवार के सामने इंडिया गठबंधन की रणनीति पर सबकी निगाहें

देश में इस समय उपराष्ट्रपति चुनाव को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। एनडीए ने तमिलनाडु से ताल्लुक रखने वाले और मौजूदा महाराष्ट्र के राज्यपाल सी.पी. राधाकृष्णन को अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया है। जैसे ही यह ऐलान हुआ, विपक्षी दलों की गतिविधियां भी बढ़ गईं। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने इंडिया गठबंधन के सहयोगियों से उम्मीदवार के नाम पर सुझाव मांगने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

कांग्रेस की सोच और रणनीति

कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि जरूरी नहीं कि विपक्षी उम्मीदवार कांग्रेस से ही हो। अगर अन्य दल कोई न्यूट्रल और साफ-सुथरे बैकग्राउंड वाला नाम सुझाते हैं, तो कांग्रेस उस पर सहमत हो सकती है। पार्टी मानती है कि राधाकृष्णन के आरएसएस बैकग्राउंड के चलते चुनाव को केवल औपचारिकता बनाकर नहीं छोड़ा जाना चाहिए। कांग्रेस चाहती है कि वैचारिक स्तर पर बीजेपी-आरएसएस का मुकाबला किया जाए और विपक्ष का उम्मीदवार मैदान में उतरे।

राहुल गांधी की भूमिका

रणनीति तय करने में राहुल गांधी की भी अहम भूमिका रहने वाली है। वे 19 अगस्त की शाम दिल्ली पहुंचेंगे और 21 अगस्त को बिहार में अपनी यात्रा पर लौटेंगे। इस बीच वे कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे के साथ-साथ शरद पवार, हेमंत सोरेन और तेजस्वी यादव जैसे नेताओं से बातचीत करेंगे। सहमति बनते ही विपक्ष उम्मीदवार का नाम घोषित कर सकता है।

समाजवादी पार्टी का रुख

समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा, “उपराष्ट्रपति की जगह खाली है, और चुनाव तो होना ही था। अभी हम लोग बैठकर फैसला लेंगे कि क्या करना है।” एसपी फिलहाल अपने पत्ते खोलने से बच रही है और गठबंधन की बैठक का इंतजार कर रही है।

कांग्रेस नेताओं की प्रतिक्रियाएं

कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने कहा कि बीजेपी का उम्मीदवार घोषित करना उनका आंतरिक मामला है, लेकिन विपक्ष अपनी रणनीति तय करेगा। वहीं, कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर ने राधाकृष्णन के आरएसएस से संबंधों को रेखांकित करते हुए कहा कि इंडिया गठबंधन इस मुद्दे पर जल्द निर्णय लेगा। कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने भी उम्मीद जताई कि विपक्ष के बीच आम सहमति बन जाएगी और जल्द नाम सार्वजनिक होगा।

शिवसेना (यूबीटी) का रुख

शिवसेना (यूबीटी) के नेता संजय राउत ने साफ कहा कि सी.पी. राधाकृष्णन पार्टी कैडर के आदमी हैं, जिनका संबंध आरएसएस से रहा है। उन्होंने कहा, “अगर महाराष्ट्र के राज्यपाल उपराष्ट्रपति बनेंगे तो हम खुशी जाहिर करेंगे, लेकिन चुनाव तो होगा ही। विपक्ष भी अपनी तरफ से रणनीति बनाएगा।”
साथ ही उन्होंने कहा कि उपराष्ट्रपति चुनाव से ज्यादा देश के सामने वोट चोरी का मुद्दा गंभीर है, जिस पर ध्यान केंद्रित रखना चाहिए।

तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) का रुख

टीएमसी के सूत्रों का कहना है कि पार्टी चाहती है विपक्ष भी उम्मीदवार उतारे। टीएमसी का मानना है कि मुकाबला होना चाहिए ताकि जनता को लगे कि विपक्ष केवल बयानबाजी नहीं, बल्कि संस्थागत पदों पर भी बीजेपी को चुनौती देने की तैयारी में है।

एनडीए का समीकरण और विपक्ष की चुनौती

एनडीए ने सी.पी. राधाकृष्णन को उम्मीदवार बनाकर तमिलनाडु और दक्षिण भारत के सामाजिक समीकरण साधने की कोशिश की है। राधाकृष्णन न केवल आरएसएस से जुड़े रहे हैं, बल्कि वे तमिलनाडु बीजेपी के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। मौजूदा समय में वे महाराष्ट्र के राज्यपाल हैं। उनके नाम के जरिए एनडीए ने विपक्ष पर दबाव बनाने का प्रयास किया है।

दूसरी ओर, विपक्षी दलों में यह बहस भी चल रही है कि क्या वास्तव में संख्याबल की स्थिति देखते हुए मुकाबला करना फायदेमंद होगा। कुछ दल मानते हैं कि परिणाम पहले से तय है, इसलिए ऊर्जा बचानी चाहिए। वहीं, कांग्रेस और टीएमसी जैसे दल चाहते हैं कि मुकाबला जरूर होना चाहिए, भले ही नतीजा एनडीए के पक्ष में जाए।

सहमति बनेगी या नहीं?

इंडिया गठबंधन के सामने सबसे बड़ी चुनौती आपसी सहमति बनाने की है। अब तक कई मौकों पर विपक्षी दलों में उम्मीदवारों के चयन को लेकर मतभेद उभरते रहे हैं। हालांकि, इस बार खड़गे और राहुल गांधी ने कोशिश शुरू कर दी है कि जल्द से जल्द एक नाम पर एकजुटता बनाई जाए। उपराष्ट्रपति चुनाव सिर्फ एक संवैधानिक पद के चुनाव तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच वैचारिक संघर्ष का भी प्रतीक बन चुका है। एनडीए ने सी.पी. राधाकृष्णन को मैदान में उतारकर संदेश दे दिया है कि वह दक्षिण भारत और आरएसएस विचारधारा को मजबूत करने की दिशा में है। अब सबकी नजर इंडिया गठबंधन पर है कि क्या वह समय रहते एकजुट होकर मजबूत उम्मीदवार उतार पाएगा या नहीं। आने वाले दिनों में राहुल गांधी की बैठकों और विपक्षी दलों की आपसी सहमति पर यह तय होगा कि उपराष्ट्रपति चुनाव सिर्फ औपचारिकता रहेगा या एक जोरदार राजनीतिक मुकाबले में तब्दील होगा। (प्रकाश कुमार पांडेय)

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