पीएम नरेंद्र मोदी ने रविवार 15 जून को तीन देशों की यात्रा पर रवाना हुए। इससे पहले उन्होंने कहा है कि उनकी कनाडा, साइप्रस और क्रोएशिया की यात्रा आतंकवाद के सभी स्वरूप और उसकी अभिव्यक्तियों से निपटने के लिए वैश्विक समझ को और अधिक बढ़ाने का अवसर प्रदान करेगी।
- पीएम मोदी आज से 3 देशों की यात्रा पर
- PM साइप्रस, कनाडा और क्रोएशिया के दौरे पर होंगे
- कनाडा में जी-7 शिखर सम्मेलन में करेंगे हिस्सा
- जी-7 बैठक में वैश्विक मुद्दों पर होगी चर्चा
- कनाडा के पीएम मार्क कार्नी से द्विपक्षीय बैठक भी तय
बता दें पश्चिम एशिया में ईरान और इज़रायल के बीच जारी युद्ध ने न केवल राजनीतिक अस्थिरता को बढ़ाया है, बल्कि नागरिक और वीआईपी विमानों के लिए भी नया संकट खड़ा कर दिया है। युद्ध क्षेत्र में बढ़ते खतरों के चलते कई देशों ने अपनी हवाई सीमाएं बंद कर दी हैं। जिससे अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के रूट प्रभावित हो रहे हैं। इसका सीधा असर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तीन देशों की यात्रा पर भी पड़ा है। जिन्हें अब लंबा और सुरक्षित हवाई मार्ग अपनाना पड़ा।
प्रधानमंत्री मोदी रविवार सुबह साढ़े सात बजे दिल्ली से रवाना हुए। वे सबसे पहले सायप्रस जाएंगे। फिर वहां से कनाडा में आयोजित हो रही G7 शिखर बैठक में भाग लेने के लिए कनानास्किस रवाना होंगे। लेकिन दिल्ली से सायप्रस के बीच सामान्यतः 8-9 घंटे में तय होने वाला सफर अब लंबा हो गया है, क्योंकि पारंपरिक रूट में पड़ने वाले ईरान, इराक, सीरिया, लेबनान और इज़रायल जैसे देशों की हवाई सीमाएं अब युद्ध के कारण असुरक्षित या पूरी तरह बंद हैं।
इसके अलावा, भारत-पाकिस्तान के बीच 7 से 10 मई के बीच हुए सैन्य तनाव के बाद से पाकिस्तानी हवाई सीमा भारतीय विमानों के लिए पहले से ही बंद है। ऐसे में PM मोदी का एयर इंडिया-1 विमान अब वैकल्पिक मार्ग से होते हुए सायप्रस के लारनका शहर तक पहुंच रहा है। जो अधिक दूरी और समय ले रहा है।
बताया जाता है कि VIP विमानों के लिए भी कोई विशेष रियायत नहीं है, और मौजूदा परिस्थितियों में उन्हें भी उन्हीं प्रतिबंधों का पालन करना पड़ रहा है जो सामान्य उड़ानों पर लागू हैं। सुरक्षा और भू-राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए एयरस्पेस प्लानिंग एक जटिल कार्य बन गया है।
दरअसल ईरान पर इज़रायल की ओर से 13 जून को किए गए हवाई हमलों के बाद से क्षेत्रीय तनाव चरम पर है। इसके जवाब में ईरान ने भी अपनी सैन्य तैयारियों को बढ़ा दिया है और कई देशों ने अपनी हवाई सीमाओं को अस्थायी रूप से बंद कर दिया है। इसका असर सिर्फ यात्रियों की उड़ानों पर नहीं बल्कि कार्गो और माल ढुलाई पर भी पड़ा है।
हवाई किराये और मालभाड़े में वृद्धि की आशंका
जानकारों का कहना है कि भारत से यूरोप और अमेरिका के लिए उड़ानों का समय 1-2 घंटे तक बढ़ गया है, जिससे न केवल यात्रियों की यात्रा लंबी हो रही है, बल्कि विमानन कंपनियों की ईंधन और संचालन लागत में लगभग 10-12% तक की वृद्धि हो रही है। इसके चलते आने वाले दिनों में हवाई किराए और माल भाड़े में भी इजाफा हो सकता है। रूस-यूक्रेन युद्ध क्षेत्र को पहले ही उड़ानों के लिए वर्जित माना गया है और अब पश्चिम एशिया का भी बड़ा भाग असुरक्षित हो जाने से वैश्विक विमानन पर दोहरे संकट की स्थिति उत्पन्न हो गई है। आने वाले समय में यदि तनाव और बढ़ता है तो अंतरराष्ट्रीय उड़ानों की दिशा और लागत में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। …(प्रकाश कुमार पांडेय)





