50% टैरिफ पर PM मोदी का सख्त रुख: आत्मनिर्भर भारत ही समाधान
India-US Tariff War : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारतीय उत्पादों पर लगाए गए 50% टैरिफ ने वैश्विक स्तर पर व्यापारिक तनाव बढ़ा दिया है। लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे राष्ट्रीय हित के खिलाफ बताते हुए चट्टान की तरह खड़े होने की नीति अपनाई है। भारत ने साफ कर दिया है कि उसकी ऊर्जा और आर्थिक नीतियां केवल घरेलू सुरक्षा व दीर्घकालिक विकास लक्ष्यों से संचालित होंगी।
टैरिफ का असर और भारत का जवाब
27 अगस्त से लागू इस टैरिफ में 25% पहले से था और अतिरिक्त 25% रूस से तेल आयात को दंडित करने के लिए जोड़ा गया। इसका सीधा असर भारत के अमेरिका को होने वाले निर्यात पर पड़ेगा, खासकर टेक्सटाइल, रत्न-आभूषण, चमड़ा और सीफूड जैसे श्रम आधारित उद्योगों पर। विशेषज्ञों का अनुमान है कि निर्यात में 40-55% तक की गिरावट हो सकती है।
बावजूद इसके, मोदी सरकार इसे एक अवसर में बदलने पर जोर दे रही है। “आत्मनिर्भर भारत” और “स्वदेशी” को ही इस संकट से निकलने का मंत्र माना जा रहा है। पीएम मोदी ने हाल ही में कहा था— “कठिनाइयों के समय राष्ट्रीय हित को सर्वोपरि रखें, किसानों और कृषि क्षेत्र की रक्षा के लिए कोई भी कीमत चुकानी पड़े तो तैयार रहना चाहिए।”
ऊर्जा सुरक्षा पर स्पष्ट रुख
विदेश मंत्रालय ने साफ कहा कि भारत का तेल आयात वैश्विक उपलब्धता और घरेलू जरूरतों पर आधारित है। 2024-25 में रूस से 8.8 करोड़ मीट्रिक टन कच्चा तेल आयात किया गया, जो कुल का 36% है। यदि यह बंद हुआ तो पेट्रोल-डीजल की कीमतें 9-12 अरब डॉलर प्रति वर्ष तक बढ़ सकती हैं और वैश्विक कच्चे तेल की कीमतें 200 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं।
मोदी-ट्रंप टकराव और कूटनीति
जर्मन अख़बार FAZ की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप ने हाल ही में मोदी को चार बार कॉल किया लेकिन उन्होंने जवाब नहीं दिया। यह मोदी की नाराजगी और सख्त रुख को दिखाता है। वहीं, विशेषज्ञ मानते हैं कि अमेरिका का इंडो-पैसिफिक गठबंधन भारत की ठंडी प्रतिक्रिया के कारण कमजोर हो रहा है।
मोदी जल्द ही चीन के तियानजिन में SCO शिखर सम्मेलन में शामिल होंगे, जहां वे शी जिनपिंग और पुतिन से मुलाकात करेंगे। यह “ट्रिपल एक्सिस” अमेरिका की रणनीति को चुनौती दे सकता है।
RSS और स्वदेशी का समर्थन
RSS प्रमुख मोहन भागवत ने भी मोदी के आत्मनिर्भर भारत अभियान को समर्थन दिया है। उन्होंने लोगों से स्वदेशी उत्पाद खरीदने और दबाव में झुकने से बचने की अपील की। इससे यह संदेश गया कि सरकार और संगठन इस मुद्दे पर एकमत हैं।
अमेरिका के लिए उल्टा असर
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा— चीन, यूरोपीय संघ और यहां तक कि अमेरिका खुद रूस से ऊर्जा खरीद रहे हैं, तो केवल भारत को क्यों निशाना बनाया जा रहा है? विशेषज्ञों के मुताबिक, भारत को दबाव में लाकर ट्रंप प्रशासन ने “सेल्फ गोल” किया है, क्योंकि भारत चीन को संतुलित करने के लिए अमेरिका का अहम साझेदार है।
आगे की राह
भारत अब अमेरिका पर निर्भरता घटाकर यूरोपीय संघ और यूके के साथ समझौते मजबूत कर रहा है। इलेक्ट्रिक वाहन निर्यात, ब्याज सब्सिडी और ऋण गारंटी जैसे कदमों से सरकार निर्यातकों को सहारा देने की योजना बना रही है। अमेरिकी दबाव और 50% टैरिफ के बावजूद मोदी सरकार झुकी नहीं है। आत्मनिर्भर भारत अब केवल नारा नहीं, बल्कि अमेरिका के दबाव के खिलाफ भारत का रणनीतिक हथियार बन चुका है।(प्रकाश कुमार पांडेय)