PM Modi SCO Summit China LIVE: पीएम मोदी और शी जिनपिंग के बीच मीटिंग शुरू, तिआनजिन के यिंगबिन होटल में चल रही बैठक
तिआनजिन (चीन)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविवार को चीन के उत्तरी शहर तिआनजिन पहुंचे, जहां वह 31 अगस्त से 1 सितंबर तक शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। सम्मेलन की औपचारिक शुरुआत से पहले ही उन्होंने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात की। दोनों नेताओं की यह मुलाकात तिआनजिन के प्रतिष्ठित यिंगबिन होटल में हो रही है।
यह बैठक स्थानीय समयानुसार दोपहर 12 बजे ओर भारतीय समयानुसार सुबह 9:30 बजे शुरू हुई। पीएम नरेन्द्र मोदी का चीन का यह दौरा करीब 7 साल के लंबे असे्र बाद हो रहा है। हालांकि चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से उनकी यह दूसरी मुलाकात है। पिदले दस महीनों में यह दूसरी मुलाकात हुई है। इससे पहले दोनों ही वैश्विक नेताओं के बीच BRICS 2024 सम्मेलन (कजान, रूस) में मुलाकात हुई थी।
भारत-चीन रिश्तों में नरमी का संकेत
मोदी और शी की मुलाकात ऐसे समय पर हो रही है जब भारत और चीन के रिश्तों में कुछ नरमी देखी जा रही है। हाल के वर्षों में सीमा विवाद और आर्थिक तनाव ने रिश्तों को प्रभावित किया था, लेकिन इस मुलाकात को संबंधों को नए सिरे से गति देने की पहल माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह द्विपक्षीय बैठक केवल औपचारिकता भर नहीं है, बल्कि यह दोनों देशों के बीच विश्वास बहाली और व्यापारिक सहयोग बढ़ाने का प्रयास भी हो सकता है।
अमेरिका-भारत तनाव के बीच अहम मुलाकात
यह मुलाकात ऐसे समय हो रही है जब भारत और अमेरिका के बीच रिश्तों में खटास आई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस से तेल खरीदने को लेकर भारत पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाया है। इस पृष्ठभूमि में मोदी और जिनपिंग की बैठक को बेहद अहम माना जा रहा है।
सूत्रों के मुताबिक, प्रधानमंत्री मोदी 1 सितंबर को रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ भी द्विपक्षीय वार्ता कर सकते हैं। ऐसे में SCO सम्मेलन भारत, चीन और रूस के बीच नई रणनीतिक समझ का मंच साबित हो सकता है।
शी जिनपिंग की कूटनीतिक सक्रियता
SCO सम्मेलन से पहले चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने भी अपनी कूटनीतिक सक्रियता दिखाई। उन्होंने रविवार को तिआनजिन में अज़रबैजान के राष्ट्रपति इल्हाम अलीयेव, आर्मेनिया के प्रधानमंत्री निकोल पशिनियन और मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू से द्विपक्षीय मुलाकात की।
इन बैठकों में क्षेत्रीय सहयोग, व्यापार और सुरक्षा जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। जानकारों के मुताबिक, SCO चीन के लिए एक ऐसा मंच है जहां वह अपने पड़ोसी और साझेदार देशों के साथ रिश्तों को मजबूत कर अपनी भूराजनीतिक स्थिति मजबूत कर सकता है।
तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोगन तिआनजिन पहुंचे
SCO शिखर सम्मेलन के लिए तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप एर्दोगन रविवार सुबह तिआनजिन पहुंच गए। हालांकि इंडोनेशिया के राष्ट्रपति ने चीन दौरा रद्द कर दिया क्योंकि जकार्ता में व्यापक विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं, जिनमें प्रदर्शनकारियों ने सरकारी ढांचे को नुकसान पहुंचाया है।
पुतिन का चीन दौरा और पश्चिमी प्रतिबंध
इस सम्मेलन में रूस की भूमिका भी काफी अहम मानी जा रही है। राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन रविवार से चीन के चार दिवसीय दौरे पर हैं। उन्होंने अपने दौरे से ठीक पहले पश्चिमी देशों पर निशाना साधा और कहा कि प्रतिबंधों ने रूस की अर्थव्यवस्था को मंदी की ओर धकेल दिया है। पुतिन ने चीन की सरकारी न्यूज एजेंसी शिन्हुआ को दिए इंटरव्यू में कहा कि रूस और चीन वैश्विक व्यापार में ‘भेदभावपूर्ण प्रतिबंधों’ का विरोध करते हैं। क्रेमलिन ने इस दौरे को “अभूतपूर्व” बताया है। गौरतलब है कि चीन, रूस का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है और यूक्रेन युद्ध के बाद दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग और भी गहरा हुआ है।
SCO शिखर सम्मेलन क्यों अहम है?
शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की स्थापना 2001 में हुई थी और आज यह एशिया का सबसे बड़ा क्षेत्रीय संगठन माना जाता है। इसमें भारत, चीन, रूस, पाकिस्तान समेत कुल आठ सदस्य देश शामिल हैं। यह संगठन सुरक्षा, आतंकवाद निरोधक अभियान, आर्थिक सहयोग और सांस्कृतिक आदान-प्रदान जैसे मुद्दों पर काम करता है।
इस बार के सम्मेलन में ऊर्जा सुरक्षा, क्षेत्रीय स्थिरता और व्यापारिक साझेदारी मुख्य एजेंडा रहेंगे। भारत के लिए यह सम्मेलन इसलिए भी अहम है क्योंकि यह उसे एशियाई देशों के साथ संतुलित कूटनीतिक रणनीति बनाने का अवसर देगा।
मोदी का संदेश और भारत की प्राथमिकताएं
तिआनजिन पहुंचने के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर लिखा “तिआनजिन, चीन पहुंच गया हूं। SCO शिखर सम्मेलन में विचार-विमर्श और विभिन्न विश्व नेताओं से मिलने का इंतजार है।” भारत की प्राथमिकता इस सम्मेलन में क्षेत्रीय शांति, ऊर्जा सहयोग, आतंकवाद के खिलाफ साझा रणनीति और कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट्स को आगे बढ़ाना होगी। मोदी-शी बैठक के बाद इस बात पर नजर रहेगी कि क्या दोनों देश सीमा विवाद और व्यापारिक तनाव पर व्यावहारिक समाधान की ओर कदम बढ़ाते हैं या नहीं। तिआनजिन में चल रही मोदी-जिनपिंग बैठक केवल औपचारिक मुलाकात नहीं है, बल्कि यह भारत-चीन रिश्तों में नए अध्याय की शुरुआत हो सकती है। SCO शिखर सम्मेलन इस बार न सिर्फ एशिया बल्कि वैश्विक राजनीति की दिशा तय करने में भी अहम साबित हो सकता है। ..(प्रकाश कुमार पांडेय)