सामाजिक न्याय के प्रतीक रामविलास पासवान को प्रधानमंत्री मोदी की श्रद्धांजलि – कहा, गरीबों को सशक्त बनाने के लिए हमेशा समर्पित रहे
नई दिल्ली। लोक जनशक्ति पार्टी (एलजेपी) के संस्थापक और पूर्व केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान की पुण्यतिथि पर बुधवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि पासवान जी सामाजिक न्याय के प्रतीक थे और उन्होंने अपना पूरा जीवन देश के वंचित, शोषित और गरीब तबकों के उत्थान के लिए समर्पित कर दिया। प्रधानमंत्री ने उन्हें एक ऐसा नेता बताया, जिन्होंने भारतीय राजनीति में सेवा, संघर्ष और समर्पण का आदर्श स्थापित किया।
- रामविलास पासवान की पुण्यतिथि आज
- पीएम मोदी ने दी श्रद्धांजलि
- गरीबों के मसीहा कहे गए पासवान
- सामाजिक न्याय के प्रतीक नेता
- राष्ट्र निर्माण में रहा अहम योगदान
- जनसेवा को जीवन बनाया उद्देश्य
- पीएम बोले, “पासवान मेरे मित्र थे”
- एलजेपी संस्थापक को देश का नमन
- बिहार की राजनीति में अमिट छाप
- उनके विचार आज भी प्रासंगिक
रामविलास पासवान की पुण्यतिथि आज
8 अक्टूबर 2025 को राष्ट्र ने एक बार फिर उस नेता को याद किया जिसने चार दशकों से अधिक समय तक भारतीय राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाई। रामविलास पासवान न सिर्फ बिहार बल्कि पूरे देश में सामाजिक न्याय की आवाज बने रहे। गरीब, दलित और पिछड़े वर्गों के अधिकारों की लड़ाई में वे हमेशा अग्रिम पंक्ति में रहे।
पीएम मोदी ने दी श्रद्धांजलि
प्रधानमंत्री मोदी ने ‘एक्स’ (पूर्व ट्विटर) पर लिखा – “सामाजिक न्याय के प्रतीक और जनसेवा के प्रति समर्पित बिहार के लोकप्रिय नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान जी को उनकी पुण्यतिथि पर मेरी भावभीनी श्रद्धांजलि। उन्होंने हमेशा समाज के वंचित और शोषित समुदायों के कल्याण के लिए कार्य किया। राष्ट्र निर्माण के लिए उनका योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा।”
गरीबों के मसीहा कहे गए पासवान
रामविलास पासवान को गरीबों और दलितों का मसीहा कहा जाता था। वे हमेशा समाज के उस तबके के लिए बोले जो आवाजहीन था। चाहे केंद्र की राजनीति हो या बिहार का सियासी मैदान, पासवान ने हमेशा समानता और न्याय की पैरवी की। यही कारण है कि उन्हें हर राजनीतिक दल के नेताओं का सम्मान मिला।
सामाजिक न्याय के प्रतीक नेता
पासवान ने अपने राजनीतिक जीवन में कई उतार-चढ़ाव देखे, लेकिन वे हमेशा अपनी विचारधारा पर डटे रहे। वे डॉ. भीमराव अंबेडकर के आदर्शों से प्रेरित थे। उनका मानना था कि सामाजिक न्याय सिर्फ नारा नहीं बल्कि शासन की मूल आत्मा होना चाहिए। उन्होंने अपने मंत्रालयों में रहते हुए कई ऐसी योजनाएं शुरू कीं जिनका लाभ गरीबों तक पहुंचा।
राष्ट्र निर्माण में रहा अहम योगदान
रामविलास पासवान ने केंद्र सरकार में रेल, दूरसंचार, कोयला, खाद्य एवं उपभोक्ता मामले जैसे अहम मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाली। उन्होंने हर क्षेत्र में जनता के हितों को प्राथमिकता दी। प्रधानमंत्री मोदी ने भी अपने संदेश में लिखा कि “मैं भाग्यशाली हूं कि मुझे पासवान जी के साथ वर्षों तक काम करने का अवसर मिला। उनकी गहरी समझ और देशहित के प्रति समर्पण से बहुत कुछ सीखने को मिला।”
जनसेवा को जीवन बनाया उद्देश्य
राजनीति में प्रवेश के बाद से ही पासवान ने स्पष्ट कर दिया था कि उनका लक्ष्य सत्ता नहीं, सेवा है। 1977 में जनता पार्टी के टिकट पर जब उन्होंने पहली बार लोकसभा चुनाव जीता तो उन्होंने संसद में दलितों और किसानों की आवाज बुलंद की। यही कारण था कि वे लगातार आठ बार लोकसभा के लिए चुने गए – जो अपने आप में एक रिकॉर्ड है।
पीएम बोले, “पासवान मेरे मित्र थे”
प्रधानमंत्री मोदी ने भावुक शब्दों में लिखा कि वे पासवान जी को सिर्फ एक साथी नहीं बल्कि “प्रिय मित्र” मानते थे। उन्होंने कहा कि “कई बार जब भी कोई नीति बनाते समय गरीबों के हितों की बात आती थी, पासवान जी की सोच और सुझाव याद आते थे। उनकी समझदारी और संवेदनशीलता राजनीति से परे थी।”
एलजेपी संस्थापक को देश का नमन
रामविलास पासवान ने 2000 में लोक जनशक्ति पार्टी की स्थापना की थी। यह पार्टी जल्द ही बिहार की राजनीति में एक सशक्त आवाज बन गई। उनके पुत्र चिराग पासवान अब पार्टी की बागडोर संभाल रहे हैं और पिता के अधूरे सपनों को आगे बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं। चिराग पासवान ने भी अपने पिता को याद करते हुए लिखा – “आपकी कमी कभी पूरी नहीं हो सकती। आपने जो रास्ता दिखाया, वही हमारा संबल है।”
बिहार की राजनीति में अमिट छाप
बिहार की राजनीति में पासवान का स्थान अद्वितीय था। वे उन गिने-चुने नेताओं में रहे जिन्होंने हर सरकार में सहयोग किया, लेकिन अपनी अलग पहचान बरकरार रखी। चाहे नीतीश कुमार का दौर हो या लालू प्रसाद यादव का, पासवान हमेशा जनहित को प्राथमिकता देते रहे। रामविलास पासवान की नीतियां और विचार आज भी प्रासंगिक हैं। उनका मानना था कि जब तक समाज के अंतिम व्यक्ति को न्याय और अवसर नहीं मिलेगा, तब तक लोकतंत्र अधूरा रहेगा। उन्होंने हमेशा “सबका साथ, सबका विकास” की भावना के साथ राजनीति की।
रामविलास पासवान का जीवन भारतीय लोकतंत्र की उस यात्रा का प्रतीक है जिसमें सामाजिक न्याय, समानता और समर्पण की धारा बहती रही। प्रधानमंत्री मोदी की श्रद्धांजलि ने एक बार फिर याद दिलाया कि सच्चे जनसेवक अमर होते हैं। उनकी नीतियां और आदर्श आज भी देश के नीति-निर्माताओं के लिए प्रेरणा बने हुए हैं। प्रकाश कुमार पांडेय





