प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हमेशा अपने नए अंदाज के लिए जाने जाते हैं। फिर चाहे वो कोई काम करने का नया अंदाज हो , सोशल मीडिया पर कोई पोस्ट का नया अंदाज या फिर भाषणों में विपक्ष को लेकर किए गए नए नएतंज का अंदाज। पीएम मोदी ने ऐसे ही 15 अगस्त को लाल किले की प्राचीर से कहा था दिमागी नक्सली। फिर क्या था दिमागी नकस्ली को लेकर सियासत ने जोर पकड़ा और विपक्ष ने तरह तरह के आरोप भी लगाए और पूर्व वित्त मंत्री पी चिंदबरम ने तो सोशल मीडिया पर ही पोस्ट करके लिख दिया कि हां मैं दिमागी नकस्ली हूं। लेकिन राजनीति कुछ ऐसी रही कि विपक्ष ने ये भी आरोप लगा दिया कि पीएम ने देश के जेन जी को दिमागी नकस्ली कहा।
इसके बाद पीएम मोदी श्री राम कॉलेज दिल्ली के कार्यक्रम में युवाओं या कहे कि जेन जी के बीच पहुंचे तब उन्होंने फिर एख बार दिमागी नक्सली शब्द का उपयोग करते हुए बताया कि उनके इन दो शब्दों ने किस तरह से होम्योपैथी दवा का काम किया और किस तरह से दिमागी नक्सली परेशान हो गए।
मजेदार बात ये है कि पीएम मोदी ने फिर एक ऐसे शब्द का उपयोग किया है जिसे लकर भारतीय समाज में कई तरह के किस्से और कहानियां हैं या कह सकते हैं कि कई तरह के चुटकुले पहले ही बन चुके हैं। पीएम मोदी ने दिमागी नक्सलियों को अब नाराज फूफा कह डाला और कहा कि नाराज फूफा किसी भी काम की शुरूआत में विरोध ही करते हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने स्वतंत्रता दिवस के भाषण में इस्तेमाल किए गए ‘दिमागी नक्सल’ शब्द को लेकर हुई राजनीतिक बहस पर अब पलटवार किया है। दिल्ली के श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स यानी SRCC के शताब्दी समारोह में प्रधानमंत्री ने अपने पुराने बयान का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने लाल किले से ऐसे लोगों को ‘होम्योपैथी की छोटी सी गोली’ दी थी और अब उसका असर दिखाई देने लगा है।
पीएम मोदी ने कहा कि आज 2013 के मुकाबले देश आर्थिक और सामाजिक रूप से ज्यादा सुरक्षित है, लेकिन देश की प्रगति देखकर कुछ लोगों की ‘छटपटाहट’ और ‘बौखलाहट’ बढ़ रही है। इसी संदर्भ में उन्होंने स्वतंत्रता दिवस के भाषण का उल्लेख किया।
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि उन्होंने ‘दिमागी नक्सल’ नाम की होम्योपैथी की गोली दी थी और उसके बाद एक-एक करके ऐसे लोगों के असली चेहरे सामने आने लगे। उनका इशारा उन आलोचकों और राजनीतिक विरोधियों की ओर था, जो उनके इस बयान को लेकर लगातार सवाल उठाते रहे हैं।
दरअसल, स्वतंत्रता दिवस के भाषण में ‘दिमागी नक्सल’ शब्द सामने आने के बाद विपक्ष की ओर से प्रधानमंत्री पर तीखी प्रतिक्रिया दी गई थी। आरोप लगाया गया कि सरकार आलोचना करने वाले युवाओं और असहमति रखने वालों को भी नक्सली नजरिए से देख रही है। अब SRCC में पीएम मोदी ने उसी बयान को नए अंदाज में सामने रखकर अपने आलोचकों पर निशाना साधा है। यानी एक तरफ प्रधानमंत्री इसे वैचारिक लड़ाई और देश विरोधी सोच के खिलाफ चेतावनी के तौर पर पेश कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ विपक्ष इसे असहमति की आवाज को निशाना बनाने वाला बयान बता रहा है।
इस बीच कॉकरोच जनता पार्टी ने पीएम मोदी के इस बयान पर अपना विरोध जताया है। सोशल मीडिया पर सीजेपी के आशुतोष रांका औऱ सौरभ दास ने दावा किया कि पीएम मोदी ने दिमागी नक्सली शब्द सवाल पूछने वाले युवा पीढी के लिए प्रयोग किया है।
ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है—‘दिमागी नक्सल’ शब्द क्या वैचारिक हिंसा के खिलाफ पीएम मोदी का राजनीतिक संदेश है, या फिर राजनीतिक विरोधियों और आलोचकों को कठघरे में खड़ा करने की नई भाषा?