‘अब हम रिफॉर्म एक्सप्रेस पर चल पड़े हैं…’
बजट सत्र से पहले पीएम मोदी का बड़ा संकेत, सुधारों के एजेंडे पर सरकार
नई दिल्ली:
संसद का बजट सत्र शुरू हो चुका है और इसकी औपचारिक शुरुआत राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के दोनों सदनों के संयुक्त संबोधन से हो गई है। इसी बीच बजट सत्र से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सरकार के इरादों और दिशा को लेकर बड़ा संदेश दिया है। संसद भवन परिसर में मीडिया को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने साफ कहा कि उनकी सरकार की पहचान रही है— “रिफॉर्म, परफॉर्म और ट्रांसफॉर्म”, और अब देश “रिफॉर्म एक्सप्रेस” पर सवार हो चुका है। प्रधानमंत्री के इस बयान को आगामी केंद्रीय बजट 2026 और सरकार की दीर्घकालिक आर्थिक रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। ऐसे समय में जब वैश्विक अर्थव्यवस्था अनिश्चितताओं से जूझ रही है, पीएम मोदी का यह संदेश बताता है कि सरकार सुधारों की रफ्तार और तेज करने के मूड में है।
राष्ट्रपति के संबोधन से बजट सत्र की शुरुआत
बुधवार, 28 जनवरी को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने संसद के सेंट्रल हॉल में लोकसभा और राज्यसभा के संयुक्त सत्र को संबोधित किया। अपने भाषण में राष्ट्रपति ने सरकार की उपलब्धियों, नीतिगत प्राथमिकताओं और आने वाले समय के लक्ष्यों का उल्लेख किया। उन्होंने संसद सदस्यों से अपेक्षा जताई कि वे सत्र के दौरान सार्थक चर्चा और सहयोगात्मक रवैया अपनाएंगे। प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रपति के संबोधन का उल्लेख करते हुए कहा कि सत्र के प्रारंभ में राष्ट्रपति ने सांसदों से जो अपेक्षाएं व्यक्त की हैं, उन्हें सभी सांसदों ने गंभीरता से लिया होगा। उन्होंने इस बजट सत्र को बेहद महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि यह सत्र देश के भविष्य की दिशा तय करने वाला साबित हो सकता है।
‘2047 विकसित भारत’ की राह का अहम पड़ाव
पीएम मोदी ने अपने संबोधन में दीर्घकालिक दृष्टिकोण पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि 21वीं सदी का एक चौथाई हिस्सा पूरा हो चुका है और अब दूसरे चौथाई की शुरुआत हो रही है। उनके अनुसार, यही वह समय है जब भारत को अगले 25 वर्षों की ठोस नींव रखनी है। प्रधानमंत्री ने कहा 2047 विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए अहम 25 वर्षों की शुरुआत हो चुकी है है। इस बयान से साफ है कि सरकार अल्पकालिक राजनीतिक लाभ से आगे बढ़कर दीर्घकालिक सुधारों और संरचनात्मक बदलावों पर फोकस करना चाहती है। ‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’ का संकेत इसी व्यापक सोच का प्रतीक माना जा रहा है।
बजट से पहले आर्थिक सर्वे की भूमिका
बजट सत्र के दौरान आज वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण लोकसभा में आर्थिक सर्वे पेश करेंगी। आर्थिक सर्वे देश की अर्थव्यवस्था का वार्षिक लेखा-जोखा होता है, जिसमें विकास दर, महंगाई, रोजगार, निवेश और वैश्विक परिस्थितियों के असर का विस्तृत विश्लेषण किया जाता है। आर्थिक सर्वे को बजट का रोडमैप भी माना जाता है, क्योंकि इसमें सामने आए आंकड़े और सुझाव अक्सर बजट की नीतियों में झलकते हैं। ऐसे में इस बार का आर्थिक सर्वे इस बात के संकेत देगा कि सरकार किन क्षेत्रों में सुधार और प्रोत्साहन देने की तैयारी में है।
1 फरवरी को पेश होगा केंद्रीय बजट 2026
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को लोकसभा में केंद्रीय बजट 2026 पेश करेंगी। यह एनडीए सरकार का लगातार नौवां बजट होगा, जो अपने आप में एक रिकॉर्ड है। ऐसे समय में जब वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव, मंदी की आशंका और सप्लाई चेन की चुनौतियां बनी हुई हैं, इस बजट से काफी उम्मीदें जुड़ी हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस बजट में सरकार का फोकस—
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आर्थिक विकास को गति देने,
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निवेश बढ़ाने,
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रोजगार सृजन,
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और बुनियादी ढांचे पर खर्च बढ़ाने
पर रह सकता है।
पीएम मोदी के ‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’ वाले बयान से संकेत मिलता है कि बजट में नीतिगत सुधारों और संरचनात्मक बदलावों को प्राथमिकता दी जा सकती है।
विपक्ष की मांगें और सरकार का रुख
बजट सत्र से पहले विपक्षी दलों ने कुछ मुद्दों पर चर्चा की मांग उठाई है। इनमें VB-G RAM-G बिल और स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) जैसे विषय शामिल हैं। विपक्ष का कहना है कि इन मुद्दों पर संसद में विस्तृत बहस जरूरी है। हालांकि केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने साफ कर दिया है कि ये विषय पहले ही शीतकालीन सत्र में उठाए जा चुके हैं और मौजूदा बजट सत्र में इन पर चर्चा की कोई योजना नहीं है। सरकार का कहना है कि बजट सत्र का मुख्य उद्देश्य आर्थिक नीतियों और बजट प्रस्तावों पर चर्चा करना है।
बजट सत्र से बढ़ी राजनीतिक सरगर्मी
कुल मिलाकर, बजट सत्र की शुरुआत के साथ ही संसद का माहौल गरमा गया है। एक तरफ सरकार सुधारों और विकास के एजेंडे को आगे बढ़ाने की बात कर रही है, तो दूसरी ओर विपक्ष विभिन्न मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने की तैयारी में है। प्रधानमंत्री मोदी का “रिफॉर्म एक्सप्रेस” वाला बयान यह संकेत देता है कि आने वाले दिनों में सरकार तेज फैसलों और बड़े सुधारों के जरिए अपनी आर्थिक और राजनीतिक प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने की कोशिश करेगी। अब सबकी नजरें आर्थिक सर्वे और 1 फरवरी को पेश होने वाले केंद्रीय बजट 2026 पर टिकी हैं, जो यह तय करेगा कि यह रिफॉर्म एक्सप्रेस किस रफ्तार से और किस दिशा में आगे बढ़ेगी।