PM मोदी का ट्रंप को करारा जवाब: “किसानों के हितों से कोई समझौता नहीं…हर कीमत चुकाने को तैयार” … अमेरिकी टैरिफ पर PM मोदी का दो टूक

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत पर 50% टैरिफ लगाने की घोषणा के बाद अब भारत की तरफ से पहली बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस पर कड़ा और स्पष्ट जवाब दिया है। पीएम मोदी ने साफ शब्दों में कहा कि भारत अपने किसानों, पशुपालकों और मछुआरों के हितों की रक्षा करेगा और इसके लिए अगर उन्हें व्यक्तिगत कीमत भी चुकानी पड़ी, तो वह तैयार हैं।

PM मोदी का ट्रंप को करारा जवाब

“किसानों के हितों से कोई समझौता नहीं…

हर कीमत चुकाने को तैयार” …

अमेरिकी टैरिफ पर PM मोदी का दो टूक

ट्रंप की टैरिफ नीति पर भारत का तीखा पलटवार

अमेरिका ने भारत द्वारा रूसी तेल खरीदने को लेकर पहले 25% और फिर अतिरिक्त 25% टैरिफ लगाते हुए कुल 50% टैरिफ की घोषणा की थी। यह ट्रंप प्रशासन द्वारा भारत पर अब तक की सबसे बड़ी आर्थिक कार्रवाई मानी जा रही है। ट्रंप लगातार भारत पर कृषि और डेयरी बाजार को अमेरिकी उत्पादों के लिए खोलने का दबाव बना रहे हैं, लेकिन पीएम मोदी ने इसे देश की 60% आबादी के जीवन से जुड़ा मामला बताते हुए दो टूक इनकार कर दिया।

पीएम मोदी ने क्या कहा?

एमएस स्वामीनाथन के शताब्दी समारोह के अवसर पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में बोलते हुए प्रधानमंत्री ने कहा “हमारे लिए हमारे किसानों का हित सर्वोपरि है। भारत अपने किसानों, मछुआरों और डेयरी किसानों के हितों से कभी समझौता नहीं करेगा। पीएम ने कहा उन्हें व्यक्तिगत तौर पर पता है कि इसके लिए उन्हें भारी कीमत चुकानी पड़ेगी। लेकिन वे इसके लिए तैयार हैं।
बता दें यह बयान ऐसे समय आया है जब भारत अब तक अमेरिका की ओर से टैरिफ की घोषणा पर संयम बरत रहा था और पीछे के दरवाज़ों से डिप्लोमैटिक समाधान खोजने की कोशिश कर रहा था।

कृषि और डेयरी क्षेत्र को अमेरिका के लिए नहीं खोलेगा भारत

भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील को लेकर पिछले कुछ वर्षों में कई दौर की बातचीत हुई। लेकिन बात उस समय टूट गई जब अमेरिका ने भारत से डेयरी और कृषि सेक्टर को खोलने की मांग की। अमेरिका चाहता था कि भारतीय बाजार में उसके डेयरी उत्पादों और कृषि सामग्रियों को अधिक पहुंच दी जाए। हालांकि भारत ने इस मांग को ठुकरा दिया क्योंकि देश की करीब 60% आबादी कृषि और संबंधित क्षेत्रों पर निर्भर है। यदि अमेरिका को इन क्षेत्रों में प्रवेश की इजाजत दी जाती तो इससे लाखों किसानों, मछुआरों और पशुपालकों पर प्रतिकूल असर पड़ता।

स्वामीनाथन समारोह से दिया रणनीतिक संदेश

प्रधानमंत्री मोदी ने यह बयान भारत में हरित क्रांति के जनक एमएस स्वामीनाथन के शताब्दी समारोह में दिया। यह स्थान और अवसर दोनों ही प्रतीकात्मक थे। डॉ. स्वामीनाथन ने भारतीय कृषि को आत्मनिर्भरता और वैज्ञानिक सोच की दिशा दी थी। उनके सम्मान में दिए गए इस बयान से साफ संकेत गया कि भारत कृषि क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की नीति से पीछे नहीं हटेगा।

पीएम मोदी ने इस दौरान डॉ. स्वामीनाथन के विचार “बायो-हैपिनेस” का भी जिक्र किया और कहा “जैव विविधता के बल पर हम स्थानीय लोगों के जीवन में महत्वपूर्ण बदलाव ला सकते हैं, और हमारी सरकार इसी दिशा में काम कर रही है।”

अमेरिका को भारत की स्पष्ट चेतावनी

मोदी सरकार का यह रुख अमेरिका को साफ चेतावनी है कि भारत वैश्विक दबाव में आकर अपने मूलभूत आर्थिक हितों की अनदेखी नहीं करेगा। भारत ने पहले भी वैश्विक मंचों पर अपनी प्राथमिकताओं को सामने रखा है – चाहे वह WTO में विकासशील देशों के अधिकारों की बात हो, या हाल ही में G20 सम्मेलन में ग्लोबल साउथ की आवाज़ बुलंद करने की कोशिश।

किसानों का समर्थन और राजनीतिक संदेश

पीएम मोदी का यह बयान सिर्फ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नहीं, बल्कि घरेलू राजनीति में भी बड़ा संदेश है। 2024 के लोकसभा चुनावों से पहले कृषि से जुड़े वर्गों को भरोसे में लेना सरकार की प्राथमिकता रही है। ट्रंप के दबाव को नकार कर पीएम मोदी ने यह भी स्पष्ट किया है कि उनकी प्राथमिकता “भारत फर्स्ट” है, न कि “अमेरिका फर्स्ट” के दबाव को झेलना। डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ धमकियों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह सख्त और भावनात्मक बयान भारत की संप्रभुता और कृषि आत्मनिर्भरता की वकालत करता है। उन्होंने यह दिखा दिया है कि अगर भारत को अपनी किसान-प्रधान अर्थव्यवस्था की रक्षा करनी पड़ी, तो वह किसी भी अंतरराष्ट्रीय दबाव के आगे झुकने वाला नहीं है—भले ही इसकी व्यक्तिगत या राजनीतिक कीमत चुकानी पड़े। अब देखने वाली बात यह होगी कि ट्रंप प्रशासन इस भारतीय रुख पर क्या प्रतिक्रिया देता है और आने वाले समय में द्विपक्षीय रिश्ते किस दिशा में बढ़ते हैं। (प्रकाश कुमार पांडेय)

Exit mobile version