भोपाल एयरपोर्ट पर कोहरे में भी उतर सकेंगे विमान…कैसे काम करता है CAT-2 लैंडिंग सिस्टम?

Planes will be able to land at Bhopal Airport even in fog How does the CAT 2 landing system work

भोपाल एयरपोर्ट पर कोहरे में भी उतर सकेंगे विमान…कैसे काम करता है CAT-2 लैंडिंग सिस्टम?

भोपाल की सर्दियां अब तक शहर के हवाई यात्रियों के लिए परेशानी लेकर ही आती थीं। दिसंबर-जनवरी की ठिठुरती सुबहें, घना कोहरा और रनवे की कम दृश्यता—इन सबके कारण अक्सर फ्लाइट्स लेट होती थीं या डायवर्ट कर दी जाती थीं। लेकिन अब तस्वीर बदलने जा रही है। राजाभोज एयरपोर्ट पर अत्याधुनिक CAT-II लैंडिंग सिस्टम लग चुका है और इसका सफल परीक्षण भी पूरा हो चुका है। 27 नवंबर से यह सिस्टम आधिकारिक रूप से शुरू हो जाएगा। इसके साथ ही भोपाल देश का तीसरा और मध्यप्रदेश का पहला ऐसा एयरपोर्ट बन गया है, जहां कम विजिबिलिटी में भी विमान सुरक्षित लैंड कर सकेंगे।

भोपाल में लगा देश का तीसरा CAT-II सिस्टम

अब तक यह उन्नत तकनीक केवल कोलकाता और अमृतसर एयरपोर्ट पर थी। CAT-II सिस्टम के सक्रिय होते ही राजाभोज एयरपोर्ट उन चुनिंदा शहरों में शामिल हो जाएगा, जहां 350 मीटर तक की दृश्यता में भी विमान आसानी से उतर सकते हैं। पहले यहां CAT-I सिस्टम था, जिसमें विज़िबिलिटी कम होने पर फ्लाइट्स को या तो डायवर्ट करना पड़ता था या घंटों इंतजार करना पड़ता था।

एयरपोर्ट के कार्यकारी डायरेक्टर्स, इंजीनियरों और तकनीकी टीम ने बीते कुछ सप्ताहों में सभी महत्वपूर्ण परीक्षण पूरे किए। रनवे का ग्राउंड लाइटिंग सिस्टम पहले से सक्रिय था, जिसे CAT-II के नए उपकरणों के साथ सिंक्रोनाइज़ किया गया है। परीक्षणों ने साबित कर दिया है कि अब कोहरा भोपाल के एयर ट्रैफिक को पहले जैसा प्रभावित नहीं करेगा।

एयरलाइंस और यात्रियों के लिए राहत

CAT-II सिस्टम के लागू होने से एयरलाइंस को सबसे बड़ी राहत मिलेगी—अब मौसम खराब होने पर फ्लाइट डायवर्जन की संभावना बहुत कम हो जाएगी। बीते सालों में कोहरे के कारण भोपाल की कई उड़ानें इंदौर, अहमदाबाद या नागपुर की ओर मोड़ दी जाती थीं। इससे यात्रियों की यात्रा लंबी हो जाती थी और एयरलाइंस को अतिरिक्त ईंधन और ऑपरेशन लागत उठानी पड़ती थी।

नई तकनीक के साथ…समयपालन सुधरेगा

एयरपोर्ट की ऑपरेशनल क्षमता बढ़ेगी। आने वाले महीनों में नई उड़ानों की शुरुआत की संभावना बढ़ेगी। एविएशन इंडस्ट्री के विशेषज्ञ मानते हैं कि CAT-II सिस्टम एक बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर अपग्रेड है, जो भोपाल को क्षेत्रीय हवाई नेटवर्क में और मजबूत बनाएगा।

DGCA की मंजूरी और स्टाफ का प्रशिक्षण पूरा

उन्नत लैंडिंग सिस्टम के उपयोग के लिए DGCA (डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन) की विशेष अनुमति आवश्यक होती है। यह अनुमति मिल चुकी है और एयरपोर्ट के सभी तकनीकी कर्मचारियों, एयर ट्रैफिक कंट्रोल ऑपरेटर्स और इंजीनियरिंग टीम को CAT-II संचालन का पूरा प्रशिक्षण दिया गया है। एयरपोर्ट अधिकारियों का कहना है कि “नया सिस्टम लागू होने के बाद भोपाल एयरपोर्ट की सुरक्षा और सेवा गुणवत्ता दोनों बेहतर होंगी।

कैसे काम करता है CAT-II लैंडिंग सिस्टम?

CAT-II, इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम (ILS) का एक ज्यादा उन्नत और संवेदनशील रूप है। यह तकनीक पायलट को बेहद कम विज़िबिलिटी में भी सटीक दिशा, ऊंचाई और एप्रोच की जानकारी देती है।

इसके तीन महत्वपूर्ण हिस्से हैं

1. लोकलाइज़र (Localizer)

यह विमान को रनवे की सेंटरलाइन की दिशा बताता है, यानी कितना दायें या बायें है।

2. ग्लाइड स्लोप (Glide Slope)

यह विमान को बताता है कि वह कितनी ऊंचाई पर है और किस कोण से नीचे उतरना है।

3. हाई-इंटेंसिटी रनवे लाइटिंग

कोहरे में रोशनी बेहद मदद करती है। CAT-II के लिए रनवे पर विशेष हाई-पावर लाइट्स लगाई गई हैं, जो पायलट को जरूरी विज़ुअल रेफरेंस देती हैं। इन तीनों तकनीकों का संयोजन यह सुनिश्चित करता है कि घने कोहरे में भी। तेज हवा या हल्की बारिश के दौरान भी। दृश्यता 350 मीटर तक घटने पर भी। विमान आराम से रनवे पर उतर सके। पायलटों को भी CAT-II एप्रोच के लिए अलग से प्रशिक्षण दिया जाता है, जिससे वे उपकरणों की मदद से अधिक सटीक लैंडिंग कर सकें।

एयरपोर्ट प्रबंधन का बयान

राजाभोज एयरपोर्ट के डायरेक्टर ने कहा देश का तीसरा CAT-II सिस्टम भोपाल में स्थापित हो चुका है। 27 नवंबर से इसे उपयोग में लाया जाएगा। इसके बाद 350 मीटर विज़िबिलिटी में भी विमान बिना दिक्कत लैंड कर सकेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि यह अपग्रेड एयरपोर्ट की क्षमता और भरोसेमंद संचालन को एक नई ऊंचाई देगा।

भोपाल के लिए इसका क्या मतलब है?

यह तकनीक सिर्फ एयरपोर्ट के लिए नहीं, बल्कि पूरे शहर के लिए बड़ा बदलाव है भोपाल को देश के प्रमुख एयर रूट्स से बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी। सर्दियों में फ्लाइट कैंसिलेशन और देरी बेहद कम होंगी। बिजनेस ट्रैवलर्स, छात्रों और यात्रियों के लिए तेज और विश्वसनीय यात्रा सुनिश्चित होगी। अंतरराज्यीय पर्यटन और निवेश को भी बढ़ावा मिलेगा। मध्यप्रदेश की राजधानी अब टेक्नोलॉजी और कनेक्टिविटी दोनों में तेजी से आगे बढ़ रही है।
CAT-II सिस्टम का लागू होना भोपाल एयरपोर्ट के लिए एक मील का पत्थर है। जहाँ पहले कोहरा शहर के हवाई यातायात को ठप कर देता था, वहीं अब उन्नत तकनीक के साथ सर्दियों का असर न्यूनतम होगा। यात्रियों को सुरक्षित, समय पर और सुचारू हवाई सेवा मिलेगी। भोपाल एक नए अध्याय में कदम रख रहा है। जहां तकनीक हवा के धुंधलके को मात देगी और विमान बिना रुके उतर सकेंगे।

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