One District One Product: बदली कारीगरों की तकदीर, 3.16 लाख को मिला रोजगार
कारीगरों को मिला प्रशिक्षण और आधुनिक टूल किट
सरकार के अनुसार अब तक 1.31 लाख से अधिक कारीगरों को मुफ्त प्रशिक्षण और उन्नत टूल किट उपलब्ध कराई गई है। पारंपरिक कौशल को आधुनिक डिजाइन, पैकेजिंग और गुणवत्ता मानकों से जोड़ने पर विशेष जोर दिया गया। इससे उत्पादों की फिनिशिंग बेहतर हुई और बाजार में उनकी प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ी। सहारनपुर में 2,275 कारीगरों को उन्नत टूल किट प्रदान की गई, जबकि 454 हस्तशिल्पियों को 16.26 करोड़ रुपये की मार्जिन मनी दी गई। इससे छोटे उद्यमियों को बैंक ऋण लेने और उत्पादन बढ़ाने में सहूलियत मिली। योजना के तहत लाभार्थियों को मुख्यमंत्री दुर्घटना बीमा योजना से जोड़कर 5 लाख रुपये तक का बीमा कवर भी दिया जा रहा है, जिससे सामाजिक सुरक्षा का दायरा मजबूत हुआ है।
पारंपरिक उत्पादों को नई पहचान
ओडीओपी का मूल विचार है—“एक जिला, एक विशेषता”। जैसे सहारनपुर की लकड़ी की नक्काशी, वाराणसी की रेशमी साड़ियां, मुरादाबाद का पीतल शिल्प और लखनऊ की चिकनकारी। इन उत्पादों को राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शनी, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म और निर्यात मेलों से जोड़ा गया। परिणामस्वरूप पारंपरिक हस्तशिल्प को नया जीवन मिला और युवा पीढ़ी भी इन व्यवसायों की ओर लौटने लगी। प्रदेश के 79 उत्पादों को जीआई टैग मिलने से ‘ब्रांड यूपी’ को वैश्विक पहचान मिली है। जीआई टैग से उत्पाद की मौलिकता और गुणवत्ता की गारंटी मिलती है, जिससे विदेशी बाजार में भरोसा बढ़ा है।
निर्यात में रिकॉर्ड बढ़ोतरी
ओडीओपी का असर निर्यात के आंकड़ों में साफ दिखता है। वर्ष 2017-18 में उत्तर प्रदेश का कुल निर्यात लगभग 86 हजार करोड़ रुपये था, जो अब बढ़कर 1.84 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। इसमें करीब 50 प्रतिशत योगदान ओडीओपी और हस्तशिल्प उत्पादों का बताया जा रहा है। यह वृद्धि केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सीधा लाभ मिला है। वर्ष 2018 से अब तक इस योजना के माध्यम से 3.16 लाख लोगों को रोजगार मिला है। गांवों और कस्बों में स्थानीय स्तर पर काम मिलने से पलायन में भी कमी आई है।
बढ़ा बजट, मजबूत प्रतिबद्धता
सरकार ने योजना के लिए बजट में भी निरंतर वृद्धि की है। पिछले वित्तीय वर्ष में 145 करोड़ रुपये का प्रावधान था, जिसमें से 135 करोड़ रुपये की मार्जिन मनी वितरित की जा चुकी है। वर्तमान वित्तीय वर्ष में यह बजट बढ़ाकर 200 करोड़ रुपये कर दिया गया है। यह बढ़ा हुआ प्रावधान दर्शाता है कि राज्य सरकार ओडीओपी को दीर्घकालिक आर्थिक रणनीति के रूप में देख रही है। सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग की पहल से बैंकिंग सहायता, मार्केट लिंक और डिजिटल प्लेटफॉर्म तक पहुंच आसान हुई है। ई-कॉमर्स के जरिए उत्पादों को देश-विदेश के ग्राहकों तक पहुंचाया जा रहा है।
सामाजिक सुरक्षा और समग्र विकास
ओडीओपी केवल आर्थिक सशक्तिकरण तक सीमित नहीं है। लाभार्थियों को आयुष्मान भारत जैसी स्वास्थ्य योजनाओं से जोड़कर चिकित्सा सुरक्षा दी जा रही है। शिक्षा और कौशल विकास कार्यक्रमों से भी कारीगर परिवारों को लाभ मिल रहा है। ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन व्यंजन’ जैसी नई पहल स्थानीय खानपान और पारंपरिक व्यंजनों को भी पहचान देने का प्रयास है। इससे पर्यटन और आतिथ्य क्षेत्र को भी बढ़ावा मिल रहा है, जो अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार सृजन में सहायक है।
आत्मनिर्भरता की ओर मजबूत कदम
ओडीओपी ने ‘लोकल से ग्लोबल’ की अवधारणा को जमीन पर उतारा है। कारीगरों की आय में वृद्धि, निर्यात में उछाल और रोजगार सृजन के आंकड़े बताते हैं कि यह योजना आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। आज प्रदेश के कारीगर केवल उत्पाद नहीं बना रहे, बल्कि अपनी पहचान और परंपरा को विश्व मंच तक पहुंचा रहे हैं। आधुनिक तकनीक, वित्तीय सहायता और बाजार से जुड़ाव ने उनकी तकदीर बदल दी है। उत्तर प्रदेश में ओडीओपी की यह यात्रा दिखाती है कि सही नीति, निरंतर समर्थन और स्थानीय कौशल पर विश्वास से व्यापक आर्थिक बदलाव संभव है। 3.16 लाख लोगों को रोजगार देने वाली यह पहल आने वाले वर्षों में और बड़े परिणाम देने की ओर अग्रसर है—जहां हर जिले की खासियत, प्रदेश की ताकत बनकर उभरेगी।





