पेट्रोल-डीजल के दाम स्थिर, लेकिन आम आदमी की जेब पर महंगाई का दबाव बरकरार
20 अक्टूबर 2026 को देश के प्रमुख शहरों में पेट्रोल और डीजल के खुदरा दाम जारी हो गए हैं। दिल्ली से लेकर हैदराबाद तक ईंधन की कीमतों में बड़ा अंतर दिखाई दे रहा है। दिल्ली में पेट्रोल 102.12 रुपये प्रति लीटर है, जबकि हैदराबाद में यही कीमत बढ़कर 116.15 रुपये प्रति लीटर पहुंच गई है। यानी दोनों शहरों के बीच पेट्रोल की कीमत में 14.03 रुपये प्रति लीटर का अंतर है। डीजल के मामले में भी हैदराबाद में 104.23 रुपये प्रति लीटर की कीमत के मुकाबले दिल्ली में 95.20 रुपये प्रति लीटर चुकाने पड़ रहे हैं।
यह अंतर केवल तेल की कीमतों का नहीं, बल्कि देश की कर व्यवस्था और राज्यों की अलग-अलग नीतियों का भी प्रतिबिंब है।
छह शहर, ईंधन की अलग-अलग कीमतें
दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, बेंगलुरु और हैदराबाद के आंकड़ों पर नजर डालें तो पेट्रोल की सबसे कम कीमत दिल्ली में 102.12 रुपये प्रति लीटर है, जबकि सबसे अधिक 116.15 रुपये हैदराबाद में। मुंबई में पेट्रोल 111.21 रुपये, कोलकाता में 113.51 रुपये, चेन्नई में 107.76 रुपये और बेंगलुरु में 111.68 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है।
डीजल के दाम भी इसी तरह अलग-अलग हैं। दिल्ली में 95.20 रुपये प्रति लीटर डीजल मिल रहा है, जबकि हैदराबाद में इसकी कीमत 104.23 रुपये है। मुंबई में डीजल 97.83 रुपये, कोलकाता में 99.82 रुपये, चेन्नई में 99.55 रुपये और बेंगलुरु में 99.56 रुपये प्रति लीटर है।
आखिर क्यों अलग-अलग हैं पेट्रोल-डीजल के दाम?
भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें कई कारकों से निर्धारित होती हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत, डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति, रिफाइनिंग की लागत, परिवहन खर्च और केंद्र तथा राज्य सरकारों के कर इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
विशेष रूप से राज्यों में लगने वाले वैट और अन्य स्थानीय शुल्क के कारण एक ही पेट्रोलियम उत्पाद की कीमत अलग-अलग हो जाती है। यही वजह है कि कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमत समान होने के बावजूद दिल्ली और हैदराबाद के उपभोक्ताओं को अलग-अलग कीमत चुकानी पड़ती है।
तेल कंपनियां सामान्यतः प्रतिदिन सुबह छह बजे खुदरा कीमतों की समीक्षा कर नई दरें लागू करती हैं। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम बढ़ने या घटने का असर घरेलू कीमतों पर तत्काल दिखाई देना जरूरी नहीं है।
महंगे ईंधन का असर सिर्फ वाहन चालकों तक सीमित नहीं
पेट्रोल और डीजल की कीमतों का सीधा असर आम आदमी के घरेलू बजट पर पड़ता है। पेट्रोल महंगा होने से निजी वाहन चलाने वालों का खर्च बढ़ता है, जबकि डीजल की कीमतें माल ढुलाई, कृषि कार्यों और सार्वजनिक परिवहन की लागत को प्रभावित करती हैं।
यदि परिवहन लागत बढ़ती है तो इसका असर सब्जियों, खाद्यान्न, दूध और दूसरी रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों पर भी पड़ सकता है। इसलिए ईंधन के दाम स्थिर रहने की स्थिति में भी उपभोक्ता यह देखना चाहते हैं कि क्या इससे उन्हें महंगाई से वास्तविक राहत मिल रही है।
मध्य प्रदेश के उपभोक्ताओं के लिए क्या मायने?
मध्य प्रदेश जैसे बड़े राज्य में पेट्रोल-डीजल की कीमतों का महत्व और बढ़ जाता है, जहां लंबी दूरी की यात्रा, कृषि और सड़क परिवहन अर्थव्यवस्था के महत्वपूर्ण हिस्से हैं। हालांकि, यहां के वास्तविक खुदरा दाम शहर और स्थानीय करों के अनुसार अलग हो सकते हैं। इसलिए भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर के उपभोक्ताओं को अपने शहर की ताजा दरों की अलग से पुष्टि करनी चाहिए।
20 अक्टूबर के उपलब्ध आंकड़े बताते हैं कि देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतों का अंतर उपभोक्ताओं पर अलग-अलग आर्थिक बोझ डाल रहा है। असली सवाल केवल यह नहीं है कि आज पेट्रोल कितने रुपये लीटर है, बल्कि यह भी है कि ईंधन की कीमतें आम आदमी के मासिक बजट और रोजमर्रा की वस्तुओं की लागत को कितना प्रभावित कर रही हैं।