8 जुलाई को पेट्रोल और डीजल की कीमतें: मुंबई, बेंगलुरु, चेन्नई, कोलकाता और अन्य शहरों में ईंधन के नए दाम देखें
पिछले हफ़्ते जियो-पॉलिटिकल तनाव कम होने और OPEC+ द्वारा ज़्यादा उत्पादन के कारण ग्लोबल स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आई है, लेकिन भारतीय ग्राहकों को अभी भी पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई राहत नहीं मिली है क्योंकि इनके दाम जस के तस बने हुए हैं।
पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव कम होने के साथ ही, पिछले हफ़्ते से अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल की कीमतें गिर रही हैं। इसके बावजूद, भारत में पेट्रोल और डीज़ल की कीमतों में कोई खास बदलाव नहीं हुआ है।
बुधवार 8 जुलाई 2026 को, पिछले हफ़्ते ग्लोबल कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बावजूद पेट्रोल और डीज़ल की कीमतें जस की तस बनी रहीं। IOCL, HPCL और BPCL जैसी सरकारी तेल मार्केटिंग कंपनियों ने उस दिन ईंधन की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया।
पिछले हफ़्ते, तेल मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा था कि इस समय ईंधन की कीमतें कम करना कोई ऐसा कदम नहीं है जिस पर वे विचार कर रहे हों।
OPEC+ के अगस्त 2026 से तेल उत्पादन को बढाएगा
OPEC+ के अगस्त 2026 से तेल उत्पादन को 1,88,000 बैरल प्रति दिन और बढ़ाने के फ़ैसले के बाद भी कीमतें नहीं बदली हैं। यह इस शीर्ष संगठन द्वारा लगातार 50वीं बार मासिक उत्पादन बढ़ाने का फ़ैसला है।
अमेरिका-ईरान युद्ध के पिछले चार महीनों में भारत में ईंधन की कीमतें चार बार बढ़ाई गईं। कुल मिलाकर, युद्ध की शुरुआत के बाद से कीमतों में लगभग 7.5-8 रुपये की वृद्धि हुई।
8 जुलाई को देश के बड़े शहरों में पेट्रोल और डीजल के दाम
प्रमुख शहरों में ईंधन की कीमतें (8 जुलाई)
दिल्ली में पेट्रोल की कीमत ₹ 102.12 और डीजल की कीमत ₹ 95.20 प्रति लीटर है। वहीं
कोलकाता में पेट्रोल की कीमत ₹ 113.51 और डीजल की कीमत ₹ 99.82 प्रति लीटर है।
मुंबई में पेट्रोल की कीमत ₹111.21 और ₹ 97.83 प्रति लीटर है
चेन्नई ₹ 107.76 प्रति लीटर और डीजल ₹ 99.55 प्रति लीटर है।
ग्लोबल क्रूड ऑयल की कीमतें
मंगलवार को तेल की कीमतें स्थिर रहीं। खबर है कि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के पास एक टैंकर पर किसी चीज़ से हमला हुआ है। इस घटना ने दुनिया के सबसे अहम एनर्जी शिपिंग रूट पर बने खतरों को फिर से उजागर कर दिया है।
दूसरी तिमाही में क्रूड ऑयल की कीमतों में 30% की गिरावट आई थी। ऐसा तब हुआ जब वॉशिंगटन और तेहरान एक अंतरिम शांति समझौते पर सहमत हुए, जिससे मध्य पूर्व से तेल की सप्लाई में बड़ी रुकावट आने का डर कम हो गया।