यात्री सुविधाओं और स्वच्छ रेलवे संचालन…रेलवे ने उठाया ये बढ़ा कदम

Passenger facilities and clean railway operations Railways took this big step

यात्री सुविधाओं और स्वच्छ रेलवे संचालन…रेलवे ने उठाया ये बढ़ा कदम

नई दिल्ली। भारतीय रेलवे देश में रेल यात्रा को अधिक आरामदायक, सुरक्षित और पर्यावरण के अनुकूल बनाने की दिशा में लगातार ठोस कदम उठा रही है। रेल मंत्रालय ने यात्रियों की सुविधा बढ़ाने, रेल अवसंरचना को मजबूत करने और स्वच्छ व सतत रेलवे संचालन को बढ़ावा देने के लिए कई महत्वपूर्ण पहलें की हैं। इन प्रयासों के तहत आधुनिक ट्रेनों की शुरुआत, नवीकरणीय ऊर्जा का उपयोग और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वदेशी रेल उत्पादों का निर्यात शामिल है।

देश में रेल यात्रा की परिभाषा बदलने के उद्देश्य से भारतीय रेलवे ने वर्ष 2019 में वंदे भारत एक्सप्रेस की शुरुआत की थी। आज वंदे भारत ट्रेनें भारतीय रेल की आधुनिकता और तकनीकी क्षमता का प्रतीक बन चुकी हैं। वर्तमान में देशभर के प्रमुख शहरों को जोड़ने वाली 164 विश्वस्तरीय वंदे भारत सेवाएं संचालित हो रही हैं, जो यात्रियों को तेज, सुरक्षित और अत्यंत आरामदायक यात्रा का अनुभव प्रदान कर रही हैं। रेल मंत्रालय के अनुसार, 2019 से अब तक 7 करोड़ 50 लाख से अधिक यात्री इस अत्याधुनिक ट्रेन में यात्रा कर चुके हैं।

वंदे भारत ट्रेनें पूरी तरह से ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत देश में ही निर्मित की गई हैं। प्रत्येक ट्रेन सेट अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस है। इनमें ऑटोमैटिक प्लग डोर, घूमने वाली आरामदायक सीटें, बायो-वैक्यूम शौचालय, जीपीएस आधारित यात्री सूचना प्रणाली और पूरी तरह सीसीटीवी कवरेज जैसी सुविधाएं शामिल हैं। इन सुविधाओं के माध्यम से यात्रियों को न केवल आरामदायक यात्रा मिलती है, बल्कि सुरक्षा और सुविधा के उच्च मानक भी सुनिश्चित होते हैं।

वंदे भारत ट्रेनें देश के सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और आर्थिक केंद्रों को तेज गति और बेहतर कनेक्टिविटी के साथ जोड़ रही हैं। वर्तमान में ये ट्रेनें देश के 274 जिलों में संचालित हो रही हैं। इस व्यापक नेटवर्क से न केवल दैनिक यात्रियों को लाभ मिल रहा है, बल्कि पर्यटन, व्यापार और क्षेत्रीय विकास को भी नई गति मिली है। विशेषज्ञों का मानना है कि वंदे भारत जैसी आधुनिक ट्रेनों से भारत में रेल परिवहन की छवि वैश्विक स्तर पर और मजबूत हुई है।

यात्री सुविधाओं के साथ-साथ भारतीय रेलवे स्वच्छ और हरित ऊर्जा की दिशा में भी उल्लेखनीय प्रगति कर रही है। रेल मंत्रालय ने बताया कि वर्तमान में देश के 2,600 से अधिक रेलवे स्टेशन सौर ऊर्जा का उपयोग कर रहे हैं। बड़े पैमाने पर सौर ऊर्जा को अपनाने से न केवल ऊर्जा लागत में कमी आई है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी यह एक बड़ा कदम साबित हुआ है। रेलवे द्वारा नवीकरणीय ऊर्जा के उपयोग से कार्बन उत्सर्जन को कम करने में मदद मिल रही है।

रेल मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि इस तरह की पहलें भारतीय रेलवे की 2030 तक नेट ज़ीरो कार्बन उत्सर्जन के लक्ष्य को प्राप्त करने की प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं। आने वाले वर्षों में रेलवे अपने नेटवर्क पर और अधिक हरित ऊर्जा परियोजनाओं को लागू करने की योजना पर काम कर रही है, जिससे पर्यावरण के अनुकूल परिवहन व्यवस्था को और सशक्त किया जा सके।

इस बीच, भारतीय रेलवे के अंतर्गत सार्वजनिक क्षेत्र की इकाई बनारस लोकोमोटिव वर्क्स (BLW) ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। BLW ने हाल ही में मोज़ाम्बिक को स्वदेशी रूप से निर्मित 3,300 हॉर्स पावर एसी-एसी डीजल-इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव की छठी खेप सफलतापूर्वक भेजी है। इसके साथ ही BLW उन्नत लोकोमोटिव निर्माण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण निर्यात केंद्र के रूप में उभरकर सामने आया है।

‘मेक इन इंडिया’ और ‘मेक फॉर द वर्ल्ड’ की परिकल्पना के अनुरूप, इन निर्यातों से यह स्पष्ट होता है कि भारतीय रेलवे विभिन्न देशों में प्रचलित अलग-अलग गेज प्रणालियों के अनुरूप रोलिंग स्टॉक की डिजाइन, निर्माण और आपूर्ति करने में सक्षम है। यह उपलब्धि न केवल तकनीकी दक्षता को दर्शाती है, बल्कि भारतीय इंजीनियरिंग और निर्माण क्षमता पर वैश्विक विश्वास को भी मजबूत करती है।

भारतीय रेलवे की इन पहलों के माध्यम से भारत अपने साझेदार देशों को उनके रेल अवसंरचना के उन्नयन में सहयोग प्रदान कर रहा है। साथ ही, रेलवे रोलिंग स्टॉक और संबंधित सेवाओं के एक विश्वसनीय निर्यातक के रूप में भारत की स्थिति और सुदृढ़ हो रही है। कुल मिलाकर, आधुनिक ट्रेनों की शुरुआत, स्वच्छ ऊर्जा का उपयोग और वैश्विक स्तर पर रेल उत्पादों का निर्यात—ये सभी पहलें यह दर्शाती हैं कि भारतीय रेलवे न केवल देश के भीतर यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा को प्राथमिकता दे रही है, बल्कि सतत विकास और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के माध्यम से भविष्य की रेलवे व्यवस्था को भी मजबूत बना रही है।

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