40% पार्ट्स होंगे सस्ते!
सर्विस बिल में राहत, GST कट से आसान होगा कार-बाइक्स का मेंटनेंस
रिपेयर का बोझ होगा हल्का
अभी तक गाड़ी का सर्विस बिल देखते ही अक्सर लोगों का माथा ठनक जाता था। पेट्रोल-डीजल और इंश्योरेंस का बोझ अलग, ऊपर से रिपेयरिंग और पार्ट्स बदलने का खर्च किसी के भी बजट को हिला देता था। लेकिन अब सरकार ने इस बोझ को हल्का करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। हाल ही में घोषित GST 2.0 के तहत ऑटो कंपोनेंट्स पर टैक्स स्ट्रक्चर को सरल किया गया है। पहले पुर्ज़ों पर दो अलग-अलग टैक्स दरें (18% और 28%) लागू थीं, अब सभी पर एक समान 18% GST लगेगा।
क्या है नया बदलाव?
- पहले लगभग 40% ऑटो पार्ट्स पर 28% टैक्स दर थी।
- इन्हें “लग्ज़री” या “परफॉर्मेंस” पार्ट्स की श्रेणी में रखा गया था।
- अब इन्हें भी 18% के दायरे में ला दिया गया है।
यानी, अब ब्रेक पैड्स, क्लच प्लेट्स, हेडलाइट्स और अन्य पार्ट्स जिन पर भारी टैक्स लगता था, वे करीब 10% तक सस्ते हो जाएंगे। नई दरें 22 सितंबर से लागू होंगी। इस बदलाव से गाड़ियों की टोटल कॉस्ट ऑफ ओनरशिप (TCO) घटेगी और वाहन मालिकों को लंबे समय तक फायदा मिलेगा।
इंडस्ट्री ने किया स्वागत
ऑटो कंपोनेंट मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ACMA) की प्रेसिडेंट श्रद्धा सूरी मारवाह ने कहा—
“सभी कंपोनेंट्स पर जीएसटी को 18% तक सीमित करना हमारी लंबे समय से मांग थी। यह फैसला न केवल नकली पुर्जों के बाज़ार को रोकेगा, बल्कि MSMEs को ताकत देगा और भारत की 80.2 बिलियन डॉलर की ऑटो कंपोनेंट इंडस्ट्री को मजबूती प्रदान करेगा।”
Eka Mobility के चेयरमैन डॉ. सुधीर मेहता ने कहा “ऑटो कंपोनेंट्स पर टैक्स घटाना बेहद अहम है। इससे सप्लाई चेन पर लागत का दबाव कम होगा और एम्बुलेंस व अन्य स्पेशलाइज्ड गाड़ियों को भी किफायती बनाया जा सकेगा। यह फैसले आम उपभोक्ता से लेकर इंडस्ट्री, दोनों के लिए फायदेमंद हैं।
आपको क्या फायदा होगा?
पार्ट्स होंगे सस्ते – जिन पुर्जों पर अब तक 28% टैक्स लगता था, वे अब 18% जीएसटी में मिलेंगे। सर्विस बिल हल्का होगा – गाड़ी रिपेयर करवाते समय जेब पर कम बोझ पड़ेगा। टोटल कॉस्ट ऑफ ओनरशिप घटेगी – लंबे समय तक वाहन रखने की लागत कम होगी। नकली पुर्ज़ों पर लगाम – कम कीमत के कारण उपभोक्ता ऑथेंटिक पार्ट्स खरीदेंगे, जिससे डुप्लीकेट मार्केट पर असर पड़ेगा। MSMEs को ताकत – छोटे और मझोले कारोबारियों के लिए समान टैक्स दर से कारोबार आसान होगा। इंडस्ट्री को बढ़ावा – ऑटो आफ्टरमार्केट का साइज पहले से ही ₹99,000 करोड़ है, जो 7.4% CAGR से बढ़ रहा है। नई दरें इस ग्रोथ को और तेज करेंगी।
क्यों जरूरी था बदलाव?
अब तक 40% पार्ट्स को “लग्ज़री” मानकर ऊंचे टैक्स स्लैब में रखा गया था। लेकिन असलियत यह है कि ये पार्ट्स रोजमर्रा की जरूरत वाले पुर्जे हैं, जैसे ब्रेक पैड, गियर सिस्टम, हेडलैंप्स, आदि। इन पर ज्यादा टैक्स का सीधा असर आम उपभोक्ता पर पड़ता था। छोटे शहरों और कस्बों में लोग महंगे बिल से बचने के लिए लोकल/नकली पुर्जे लगवा लेते थे। इससे न केवल सुरक्षा पर असर पड़ता था बल्कि इंडस्ट्री को भी नुकसान होता था। सरकार का मानना है कि नए जीएसटी स्लैब से उपभोक्ता ऑथेंटिक और सुरक्षित पार्ट्स की ओर शिफ्ट होंगे।
सर्विस सेंटर पर कैसा असर?
सर्विस स्टेशन पर गाड़ी की मरम्मत अब किफायती होगी। उदाहरण के लिए अगर पहले किसी रिपेयर का पार्ट्स का खर्च ₹10,000 था, तो 28% टैक्स के साथ बिल ₹12,800 तक पहुंच जाता था। अब वही खर्च ₹11,800 में निपटेगा। यानी, सीधे 1000 रुपये की बचत। बड़ी मरम्मत या महंगे पार्ट्स के मामले में यह बचत और भी ज्यादा होगी।
रोजगार और इंडस्ट्री का फायदा
भारत की ऑटो कंपोनेंट इंडस्ट्री का मूल्य करीब 80.2 बिलियन डॉलर है। इसमें लाखों लोगों को रोजगार मिला हुआ है। टैक्स कटौती से MSMEs को कारोबार में राहत मिलेगी। सप्लाई चेन की लागत घटेगी। एक्सपोर्ट को बढ़ावा मिलेगा। नकली पुर्जों का कारोबार घटेगा, जिससे इंडस्ट्री की विश्वसनीयता बढ़ेगी।
उपभोक्ताओं के लिए राहत का पैकेज
नई जीएसटी व्यवस्था को सिर्फ नई गाड़ियां खरीदने वालों के लिए नहीं, बल्कि पुराने वाहन मालिकों के लिए भी राहत माना जा रहा है। अब सर्विस सेंटर का बिल देखकर जेब पर उतना बोझ महसूस नहीं होगा। सीधी भाषा में कहें तो—अब आपकी कार और बाइक का रिपेयर बिल कम होगा, पार्ट्स सस्ते होंगे और इंडस्ट्री मजबूत होगी।