घर में पार्थिव श्रीगणेश की स्थापना कैसे करें? जानें भगवान गणेश की स्थपना का शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

Parthiva Lord Ganesha

कैसे करें पार्थिव श्रीगणेश प्रतिमा की स्थापना – मुहूर्त एवं पूजन विधि”

पार्थिव श्रीगणेश प्रतिमा की स्थापना का सबसे बड़ा संयोग बन रहा है। पंडितों के अनुसार इस बार 14 सितंबर 2026, सोमवार को गणेश चतुर्थी का महासंयोग है। भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी पर ही पार्थिव गणेश की स्थापना सबसे फलदायी मानी जाती है। 14 सितंबर 2026 को गणेश चतुर्थी है। मध्याह्न काल में गणेश स्थापना का सबसे शुभ समय माना गया है।

शुभ मुहूर्त इस प्रकार हैं –

सुबह का शुभ मुहूर्त: सुबह 07:04 से दोपहर 15:15 तक – 07:45 बजे तक दोपहर का विशेष मुहूर्त: 11:11 से 13:34 बजे तक – ये मध्याह्न काल है, जब पार्थिव गणेश की स्थापना सबसे शुभ मानी जाती है। शुभ स्थापना का सर्वश्रेष्ठ समय: सुबह 9:18 से 10:52 तक और फिर 11:14 से 12:48 तक। लाभ और अमृत मुहूर्त: सुबह 15:26 से 16:58 तक और शाम 16:58 से 18:30 तक भी स्थापना कर सकते हैं। राहुकाल से बचें: दोपहर 07:08 से 08:33 तक राहुकाल माना गया है, इसमें स्थापना टालें। पंडितों का कहना है – अगर आप घर में पार्थिव यानी मिट्टी के गणेश जी ला रहे हैं तो मध्याह्न काल यानी 11 से 1 बजे के बीच ही स्थापना करें। इसी समय भगवान शिव ने गणेश जी को प्रथम पूज्य का वरदान दिया था।

2. पार्थिव गणेश ही क्यों? बाजार की POP मूर्ति क्यों नहीं?

बार में जोर देकर “पार्थिव” शब्द लिखा है। इसका मतलब है पृथ्वी से बने गणेश। शास्त्रों के अनुसार पार्वती जी ने अपने शरीर के मैल से नहीं, बल्कि पृथ्वी की पवित्र मिट्टी से गणेश जी को बनाया था। इसलिए शास्त्रों में 3 जगह की मिट्टी सबसे पवित्र मानी गई है – हाथी के पैर के नीचे की मिट्टी, घोड़े के पैर के नीचे की मिट्टी और तालाब के बीच की मिट्टी। POP की मूर्ति सस्ती और चमकदार लगती है, लेकिन वो पानी में घुलती नहीं, नर्मदा में प्रदूषण करती है। इसलिए प्रशासन भी इस बार पार्थिव गणेश पर जोर दे रहा है।

3. स्थापना की पूरी पूजन विधि – 7 स्टेप में

सुबह स्नान करके लाल वस्त्र पहनें। स्थापना की चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं। एक तांबे के कलश में जल भरकर उस पर आम के पत्ते रखें। अखबार में लिखा है – “संकल्प लेकर ही पूजा शुरू करें – मैं अपने परिवार की सुख-समृद्धि के लिए पार्थिव गणेश की स्थापना कर रहा हूं।”

आवाहन
गणेश जी को लाकर चौकी पर रखें। मंत्र पढ़ें – “ॐ गं गणपतये नमः आवाहयामि”। इसके बाद उनका आचमन कराएं।
षोडशोपचार पूजन
ये 16 तरह की पूजा है जो पेपर में भी बताई गई है – आवाहन 2. आसन 3. पाद्य 4. अर्घ्य 5. आचमन 6. स्नान 7. वस्त्र 8. यज्ञोपवीत 9. गंध 10. पुष्प 11. धूप 12. दीप 13. नैवेद्य 14. तांबूल 15. दक्षिणा 16।
घर पर आप सरल तरीके से – जल, मौली, चंदन, अक्षत, दूर्वा, फूल, धूप, दीप, लड्डू चढ़ा सकते हैं। गणेश जी को दूर्वा सबसे प्रिय है। कम से कम 21 दूर्वा जरूर चढ़ाएं।

बप्पा का भोग
मोदक, लड्डू, फल। “तिल के लड्डू, गुड़-धनिया और केले का भोग अवश्य लगाएं।
मंत्र जाप
पूजा के बाद 108 बार इस मंत्र का जाप करें –
“वक्रतुंड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ, निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा”
बप्पा की आरती
जय गणेश जय गणेश देवा की आरती करें। कपूर से आरती करना सबसे शुभ माना गया है।

विसर्जन का संकल्प

पार्थिव गणेश को 1 दिन, 3 दिन, 5 दिन या 10 दिन रख सकते हैं। लेकिन विसर्जन घर के ही किसी बड़े बर्तन में जल में करें, ताकि मिट्टी घर में ही रहे और नर्मदा में प्रदूषण न हो। इस मिट्टी को बाद में तुलसी के गमले में डाल दें।

इस बार क्या विशेष है?

ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इस बार गणेश चतुर्थी पर रवि योग और सर्वार्थ सिद्धि योग दोनों हैं। जो लोग नया व्यापार, गृह प्रवेश या वाहन खरीदना चाहते हैं, उनके लिए स्थापना के बाद का समय बेहद शुभ है। भोपाल नगर निगम ने भी इस बार बड़े पंडालों के लिए POP पर पूरी तरह बैन लगाया है। लालघाटी और बैरागढ़ में पार्थिव गणेश बनाने वाले कारीगरों को 20% सब्सिडी दी गई है, इसलिए आपको सस्ते और सुंदर गणेश आसानी से मिल जाएंगे। गणेश जी बुद्धि के देवता हैं। उनकी स्थापना सिर्फ मूर्ति लाना नहीं, अपने घर में एक पॉजिटिव सोच लाना है। इस बार 14 सितंबर को अगर आप सुबह 11:14 से 12:48 के बीच पार्थिव गणेश लाकर पूरे विधि-विधान से स्थापना करते हैं, तो शास्त्रों के अनुसार पूरे साल विघ्न दूर रहते हैं। बप्पा को लाइए, लेकिन मिट्टी वाले ही लाइए – यही इस साल का सबसे बड़ा पुण्य है।

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