Parliament Winter Session 2025: 1 दिसंबर से शुरू होगा संसद का शीतकालीन सत्र, 19 दिसंबर तक चलेंगी 15 बैठकें

Parliament winter session will begin on 1 December 2025

Parliament Winter Session 2025: 1 दिसंबर से शुरू होगा संसद का शीतकालीन सत्र, 19 दिसंबर तक चलेंगी 15 बैठकें

नई दिल्ली। संसद का शीतकालीन सत्र (Winter Session) 1 दिसंबर 2025 से शुरू होकर 19 दिसंबर तक चलेगा। इस दौरान कुल 15 बैठकें आयोजित की जाएंगी। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू (Kiren Rijiju) ने शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर यह जानकारी साझा की।

रिजिजू ने कहा कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सत्र बुलाने के सरकार के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह सत्र “सार्थक, रचनात्मक और जन-आकांक्षाओं को प्रतिबिंबित करने वाला” होगा। मंत्री ने लिखा, “संसद लोकतंत्र की आत्मा है, और हमें विश्वास है कि सभी दल इस सत्र को सफल और उत्पादक बनाने में योगदान देंगे।”

पिछले सत्र का हाल
इससे पहले जुलाई-अगस्त 2025 में आयोजित मानसून सत्र विपक्षी दलों के विरोध-प्रदर्शन और हंगामे के कारण प्रभावित रहा था। 21 जुलाई से 21 अगस्त तक चले उस सत्र में कुल 21 बैठकें हुईं। लोकसभा में 120 घंटे चर्चा के लिए निर्धारित थे, लेकिन केवल 37 घंटे की ही कार्यवाही हो सकी। इसी तरह राज्यसभा में निर्धारित 110 घंटे में से सिर्फ 41 घंटे ही बहस हो पाई।

पारित हुए विधेयक

विपक्ष के हंगामे के बावजूद लोकसभा में 12 विधेयक और राज्यसभा में 15 विधेयक पारित किए गए। इनमें सबसे अधिक चर्चा में रहा “संविधान संशोधन विधेयक”, जिसमें गिरफ्तार प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या मंत्री को पद से हटाने के प्रावधान शामिल थे।
इस विधेयक को आगे की जांच के लिए संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के पास भेजने का प्रस्ताव पारित किया गया था।

शीतकालीन सत्र में क्या हो सकते हैं मुद्दे
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस बार का सत्र कई मायनों में महत्वपूर्ण रहेगा। अर्थव्यवस्था, महंगाई, किसानों की आय, बेरोजगारी, और रक्षा तैयारियों जैसे विषयों पर चर्चा हो सकती है।
इसके साथ ही, सरकार तीन महत्वपूर्ण विधेयक पेश कर सकती है। लोकपाल संशोधन विधेयक 2025, डिजिटल सुरक्षा और डेटा संरक्षण अधिनियम में संशोधन, और न्यायिक सुधार विधेयक, जो न्यायपालिका में लंबित मामलों को कम करने पर केंद्रित होगा।

सरकार और विपक्ष की रणनीति

सूत्रों के अनुसार, सत्तारूढ़ दल इस सत्र को “जनकल्याण और नीति पारदर्शिता” पर केंद्रित रखना चाहता है। वहीं, विपक्ष मंहगाई, रोजगार, और किसानों की समस्या जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी में है। कांग्रेस, टीएमसी, और आम आदमी पार्टी ने संकेत दिया है कि वे “लोकतांत्रिक जवाबदेही और पारदर्शिता” के मुद्दे पर संसद में जोरदार बहस की मांग करेंगे।

सुरक्षा और व्यवस्था की तैयारी
लोकसभा सचिवालय के सूत्रों के अनुसार, शीतकालीन सत्र के लिए सभी व्यवस्थाएँ लगभग पूरी हो चुकी हैं। सांसदों के लिए डिजिटल उपस्थिति प्रणाली को और मजबूत किया गया है। इसके अलावा, संसद भवन परिसर में नई तकनीकी सुविधाएँ भी जोड़ी जा रही हैं, जिससे रिकॉर्डिंग और ट्रांसलेशन की प्रक्रिया और सटीक हो सके।

जनता की उम्मीदें

विशेषज्ञों का कहना है कि यह सत्र न केवल विधायी दृष्टि से बल्कि राजनीतिक संदेश के लिहाज से भी अहम रहेगा। देश में कई राज्यों में आगामी विधानसभा चुनाव होने वाले हैं, ऐसे में यह सत्र सरकार और विपक्ष दोनों के लिए राजनीतिक एजेंडा तय करने का मंच बन सकता है। संसद का यह शीतकालीन सत्र साल का आखिरी और बेहद अहम सत्र माना जा रहा है। अब देखना होगा कि क्या इस बार संसद में संवाद की गरिमा और लोकतंत्र की परंपरा बरकरार रहती है या फिर यह सत्र भी राजनीतिक टकरावों की भेंट चढ़ जाता है।

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