बिहार चुनाव में गरमाई सियासत…चिराग पासवान के बयान से उठा नया तूफान
बिहार विधानसभा चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आ रहे हैं, राज्य की सियासत और भी गरमा गई है। एनडीए और महागठबंधन के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर अपने चरम पर है। इस बीच लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने राष्ट्रीय जनता दल (RJD) और महागठबंधन पर बड़ा हमला बोला है। चिराग ने “मुस्लिम मुख्यमंत्री” के मुद्दे पर राजद की चुप्पी को लेकर सवाल उठाया और 2005 की एक पुरानी घटना का जिक्र करते हुए कहा कि उनके पिता स्वर्गीय रामविलास पासवान ने उस समय मुस्लिम मुख्यमंत्री के लिए अपनी पार्टी तक कुर्बान कर दी थी, लेकिन तब भी राजद तैयार नहीं था — और आज भी नहीं है।
- चिराग ने फिर खोली पुरानी बात
- मुस्लिम सीएम पर आरजेडी पर निशाना
- रामविलास की कुर्बानी का किया जिक्र
- फेसबुक पोस्ट से मचाया सियासी तूफान
- महागठबंधन पर भेदभाव का आरोप लगाया
- सीट शेयरिंग पर उठाए गंभीर सवाल
- अल्पसंख्यकों की अनदेखी पर नाराजगी जताई
- बिहार चुनावी संग्राम में बढ़ी गरमी
- बंधुआ वोट बैंक पर चिराग का तंज
- महागठबंधन की रणनीति पर उठे सवाल
चिराग का सोशल मीडिया पोस्ट बना सियासी बवंडर
चिराग पासवान ने अपने आधिकारिक फेसबुक पेज पर लिखा “2005 में मेरे नेता और मेरे पिता स्वर्गीय रामविलास पासवान ने मुस्लिम मुख्यमंत्री बनाने के लिए अपनी पार्टी तक कुर्बान कर दी थी। तब भी राजद तैयार नहीं था और आज 2025 में भी नहीं है। न मुस्लिम मुख्यमंत्री देने को तैयार हैं, न उपमुख्यमंत्री देने को।” उन्होंने आगे लिखा अगर आप बंधुआ वोट बैंक बनकर रहेंगे तो सम्मान और भागीदारी कैसे मिलेगी?। चिराग की यह पोस्ट कुछ ही घंटों में सोशल मीडिया पर वायरल हो गई। समर्थकों और विरोधियों दोनों की ओर से तीखी प्रतिक्रियाएं आने लगीं। कुछ ने इसे “साहसिक सियासी बयान” कहा तो कुछ ने “राजनीतिक स्टंट” बताया।
2005 की घटना से जोड़ी यादें
चिराग के बयान का संदर्भ 2005 के बिहार विधानसभा चुनावों से जुड़ा है। उस समय रामविलास पासवान ने बिहार में मुस्लिम मुख्यमंत्री बनाने की वकालत की थी। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा था कि यदि राज्य में धर्मनिरपेक्ष ताकतों को एकजुट होना है, तो किसी मुस्लिम नेता को मुख्यमंत्री बनाया जाए। लेकिन तब राजद और लालू प्रसाद यादव ने इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया था। पासवान ने विरोध में राज्य में राजद से अलग होकर तीसरा मोर्चा खड़ा किया और लोक जनशक्ति पार्टी (LJP) ने स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ा। परिणामस्वरूप उस समय बिहार की राजनीति में बड़ा उलटफेर हुआ और राज्य में किसी पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला। अब 20 साल बाद, चिराग ने उसी घटना को दोहराकर राजद की “अल्पसंख्यक विरोधी मानसिकता” पर सवाल खड़ा किया है।
सीट शेयरिंग और मुस्लिम प्रतिनिधित्व पर उठे सवाल
महागठबंधन में हाल ही में सीट बंटवारे की घोषणा के बाद यह विवाद और बढ़ गया है। सूत्रों के मुताबिक, सीटों का वितरण इस तरह हुआ है कि 14 प्रतिशत यादव, 18 प्रतिशत मुस्लिम, और लगभग ढाई प्रतिशत निषाद समुदायों की राजनीतिक हिस्सेदारी का असंतुलन दिखा। महागठबंधन की तरफ से निषाद समाज को डिप्टी सीएम पद देने की बात कही गई, जबकि अल्पसंख्यक (मुस्लिम) समाज, जिसकी जनसंख्या राज्य में 17-18 प्रतिशत है, को लेकर कोई ठोस घोषणा नहीं की गई। इसी मुद्दे पर चिराग ने सवाल उठाते हुए कहा कि “महागठबंधन को मुस्लिम समाज की केवल वोटों के समय याद आती है, प्रतिनिधित्व के समय नहीं।
महागठबंधन में मची हलचल
चिराग के बयान से पहले तक महागठबंधन के अंदर सीट बंटवारे को लेकर उठे विवाद लगभग शांत हो चुके थे। लेकिन इस बयान ने फिर से अंदरूनी हलचल बढ़ा दी है। राजद और कांग्रेस दोनों ने इस मुद्दे पर अब तक सीधा जवाब नहीं दिया है, लेकिन सूत्रों के अनुसार, गठबंधन के अंदर अल्पसंख्यक प्रतिनिधित्व पर नाराजगी बढ़ रही है। महागठबंधन के सहयोगी दलों के कुछ नेताओं का मानना है कि चिराग पासवान के इस बयान ने “आरजेडी की पुरानी राजनीति” को फिर से उजागर कर दिया है।
एनडीए के लिए मौका, विपक्ष के लिए चुनौती
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चिराग का यह बयान एनडीए के लिए राजनीतिक रूप से फायदेमंद साबित हो सकता है। एक ओर जहां भाजपा और जदयू पहले से महागठबंधन को “वोट बैंक की राजनीति” का प्रतीक बता रहे हैं, वहीं अब चिराग के बयान ने उस नैरेटिव को और मजबूती दी है। एनडीए नेताओं ने इसे “सच्चाई सामने लाने वाला बयान” बताया है। भाजपा प्रवक्ता ने कहा “चिराग पासवान ने जो कहा, वह वही बात है जो बिहार की जनता पिछले 20 सालों से देख रही है। आरजेडी सिर्फ वोट लेती है, लेकिन प्रतिनिधित्व देने से कतराती है।
राजद की प्रतिक्रिया का इंतजार
अब तक राजद की ओर से इस बयान पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। हालांकि पार्टी सूत्रों का कहना है कि “चिराग पासवान का बयान चुनावी लाभ के लिए दिया गया है और इसका कोई वास्तविक आधार नहीं है। राजद नेताओं का यह भी कहना है कि उनके गठबंधन में “समानता और प्रतिनिधित्व” की पूरी व्यवस्था है, और चुनाव के बाद इसका असर सीटों और पदों के बंटवारे में दिखेगा।
राजनीतिक माहौल और भविष्य की रणनीति
बिहार में इस समय हर दल जातीय समीकरणों और धार्मिक संतुलन के हिसाब से अपनी रणनीति बना रहा है। ऐसे में चिराग पासवान का यह बयान न केवल महागठबंधन को असहज कर रहा है, बल्कि अल्पसंख्यक वोटरों के मन में भी नए सवाल पैदा कर रहा है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि चिराग पासवान की यह चाल महागठबंधन के वोट बैंक को विभाजित करने की कोशिश भी हो सकती है। चुनाव से ठीक पहले चिराग पासवान का यह बयान बिहार की सियासत में एक बड़ा मोड़ लेकर आया है। जहां एक ओर यह राजद और महागठबंधन के अंदर असंतोष को हवा दे सकता है। वहीं दूसरी ओर एनडीए इसे एक नए सियासी हथियार के रूप में भुना सकता है। बीस साल पुरानी घटना को दोहराते हुए चिराग ने न केवल अपने पिता की राजनीतिक विरासत को याद किया है, बल्कि यह संदेश भी दिया है कि बिहार की राजनीति में “वोट बैंक की राजनीति” के खिलाफ वे खुलकर बोलने को तैयार हैं। प्रकाश कुमार पांडेय




