Pahalgam Terror Attack: पहलगाम हमले के एक साल बाद भी बंद बैसरन घाटी: सुरक्षा बनाम रोज़गार के बीच फंसा कश्मीर का पर्यटन

कश्मीर के पहलगाम में हुए भीषण आतंकी हमले को एक साल बीत चुका है, लेकिन उसके असर आज भी जमीनी स्तर पर साफ दिखाई दे रहे हैं। बैसरन घाटी अब भी पर्यटकों के लिए बंद है, जिससे हजारों परिवारों की रोज़ी-रोटी प्रभावित हो रही है और घाटी की अर्थव्यवस्था दबाव में है।

एक साल बाद भी जिंदा है दर्द, बैसरन घाटी अब तक नहीं खुल सकी

22 अप्रैल को हुए उस हमले ने पूरे देश को झकझोर दिया था, जब आतंकियों ने बैसरन घाटी में आम लोगों को निशाना बनाकर करीब 26 लोगों की जान ले ली थी। इस घटना के बाद सुरक्षा कारणों से घाटी को पर्यटकों के लिए बंद कर दिया गया, जो अब तक जारी है। एक साल गुजरने के बावजूद यह इलाका आम पर्यटकों की पहुंच से बाहर है, जिससे स्थानीय लोगों में चिंता बढ़ती जा रही है।

हजारों परिवारों पर पड़ा असर, पर्यटन से जुड़े कारोबार ठप

घाटी के बंद रहने का सीधा असर स्थानीय अर्थव्यवस्था पर पड़ा है। पहलगाम और आसपास के इलाकों में होटल, रेस्टोरेंट, ढाबे, टैक्सी सेवाएं और घोड़े-टट्टू से जुड़े करीब 5000 परिवार आर्थिक संकट झेल रहे हैं। जिन लोगों की आय पूरी तरह पर्यटन पर निर्भर थी, उनके सामने आज जीविका का संकट खड़ा हो गया है।

व्यापारिक संगठनों ने उठाई आवाज, पीएम से की पुनर्विचार की मांग

Chamber of Trade and Industry (CTI) ने इस मुद्दे को गंभीरता से उठाते हुए प्रधानमंत्री Narendra Modi को पत्र लिखा है। संगठन के चेयरमैन Brijesh Goyal ने मांग की है कि मौजूदा हालात की दोबारा समीक्षा की जाए और अगर सुरक्षा स्थिति संतोषजनक है, तो घाटी को फिर से खोलने पर विचार किया जाए।

स्थानीय संगठनों का दावा: हालात सामान्य, फिर भी कारोबार ठप

पहलगाम होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष जावेद बुर्जा का कहना है कि क्षेत्र में अब शांति है और हालात सामान्य हो चुके हैं। इसके बावजूद घाटी बंद रहने से पर्यटकों की संख्या में भारी गिरावट आई है। उनके मुताबिक, पिछले एक साल में टूरिस्ट्स की संख्या घटकर सिर्फ 15 से 20 प्रतिशत रह गई है, जिससे होटल और अन्य कारोबार लगभग ठहर गए हैं।

10 हजार करोड़ के नुकसान का अनुमान, घाटी खोलने से मिलेगी राहत

CTI के आकलन के अनुसार, इस घटना के बाद कश्मीर में करीब 10 हजार करोड़ रुपए का आर्थिक नुकसान हुआ है। संगठन का मानना है कि अगर बैसरन घाटी को दोबारा खोल दिया जाए, तो यह न सिर्फ स्थानीय लोगों के लिए राहत लेकर आएगा, बल्कि पर्यटन को भी नई गति देगा। साथ ही यह देश और दुनिया को एक सकारात्मक संदेश भी देगा कि कश्मीर अब सामान्य स्थिति की ओर लौट रहा है।

 

 

 

Exit mobile version