पांच राज्यों में चुनावी जंग…सबकी नजर पश्चिम बंगाल पर..जानें यहां इस बार क्या होगा खेला
पांच राज्यों में चुनावों की जंग के बीच पूरे देश का ध्यान तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल पर टिका है। जहां सत्ता के लिए होने वाली लड़ाई के बेहद दिलचस्प और ज़ोरदार होने की उम्मीद है। असम भी राजनीतिक रूप से एक अहम चुनावी अखाड़ा बन गया है।
ऐसे में अगर हम पांच राज्यों का अलग अळग आकलन करें तो सबसे दिलचस्प तो बंगला का चुनाव होगा क्योंकि पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री ममता बेनर्जी और केंद्र की बीजेपी सरकार के बीच लगातार खींचतान चलती रही फिर चाहे वो अपराध से जुडे मामले हो जिनमें मेडिकल कॉलेज में ट्रेनी डाक्टर के साथ रेप और हत्या का हो या फिर टीएमसी नेताओं पर महिलाओं की ओर से शोषण करने का आरोप सभी मसलों पर केंद्र और राज्य के बीच खींचतान पूरे पांच साल बनी रही।
पश्चिम बंगाल में हाल ही दिनों में मुख्यमंत्री ममता बेनर्जी और केंद्रीय चुनाव आयोग के बीच ही खींचतान देखने को मिली। सत्ताधारी दल टीएमसी और मुख्यमंत्री ममता बेनर्जी ने बीच एसआईआर प्रक्रिया को लेकर छिडा झगडा। मुख्यमंत्री ममता बेनर्जी ने तो चुनाव आयोग के खिलाफ मोर्चा ही खोल दिया और एसआईआर प्रक्रिया के खिळाफ सुप्रीम अदालत का दरवाजा खटखटा लिया।
अब चुनावी तारीखों के आते ही पश्चिम बंगाल में दिलचस्प नजारे देखेने को मिलेंगे। मुख्यमंत्री ममात बेनर्जी के सामने सत्ता को बचाए रखने की चुनौती होगी तो वही बीजेपी के पश्चिम बंगाल से ममता की सत्ता को बाहर करने की चुनौती।
पश्चिम बंगाल देश का अकेला ऐसा राज्य है जहां केंद्र और राज्य सरकार के बीच पूरे पांच साल तू डाल डाल और मैं पात पात का झगड़ा चलता रहा। 294 सीटों के पश्चिम बंगाल विधानसभा का कार्यकाल 7 मई 2026 को खत्म होगा। फिलहाल 294 सीटों में से टीएमसी यानि की तृणमूल कांग्रेस के 213 सीटें हो तो बीजेपी के पास 77 ऐसे में अब लेफ्ट औऱ कांग्रेस दोनों के लिए ये चुनाव राजनैतिक रसूख बचाने वाला साबित होगा।
तमिलनाडु में ही दिलचस्प होगा मुकाबला
तमिलनाडु ऐसा राज्य है जहां पिछले छह दशकों में कभी बीजेपी या कांग्रेस की सरकार नहीं बनी। यहां एनडीए और इंडिया गठबंधन दोनों ही अपने घटकों के दम पर चुनाव लड़ते आए है। एनडीए का मुख्य घटक दल यहां एआईडीएमके (AIDMAK) के साथ गठबंधन है तो कांग्रेस का डीएमके (DMK) के साथ। एस बार पार्टी टीवीके (TVK) पार्टी जो सुपरस्टार विजय की है वो भी मैदान में होगी जो हार और जीत के समीकरणों को प्रभावित कर सकती है।
फिलहाल तमिलनाडु में डीएमके और कांग्रेस गठबंधन की सरकार है। तमिलनाडु में विधानसभा की 234 सीटें है और 2021 में एम के स्टानिल के अगुवाई में (AIDMAK) ने 133 सीटें जीती थी और कांग्रेस के पास 18 सीटें हैं। यहा अब तीसरे दल के मैदान में होने से मुकाबला दिलचस्प होगा। यहां एनडीए और इंडिया गठबंधन दोनों के सामने तीसरे फ्रंट की चुनौती है। एम के स्टालिन के सामने सरकार बनाए रखने की चुनौती भी बड़ी है।
केरल में होगी लेफ्ट की परीक्षा
केरल देश में अकेला ऐसा राज्य बचा है जहां लेफ्ट की सरकार है। ऐसे में केरल में लेफ्ट के सामने अपना दुर्ग बचाने की चुनौती है। केरल में 2021 के चुनावों में वाममोर्चे ने लगातार दूसरी बार सरकार बनाई थी। इस बीच कांग्रेस एंटी इनकबैसी को मुद्दा बनाना चाहती है। वहीं बीजेपी ने 2021 में विधानसभा की एक भी सीट नहीं जीती लेकिन 2024 में त्रिशूर लोकसभा सीट और 2025 में तिरूअंनतपुरम नगर निगम पर कब्जा कर लिया। इसलिए कांग्रेस बीजेपी की कोशिशों के बीच लेफ्ट के लिए दुर्ग बचाने की चुनौती है।
असम में बीजेपी के लिए वापसी की चुनौती
अगर बात असम की करें तो असम में बीजेपी के सामने सरकार बचाने की चुनौती है। बीजेपी फिलहाल असम में दस साल से सत्ता में है ऐसे में उसके सामने वापस सरकार में आने की चुनौती होगी। यहां काग्रेस ने बीजेपी को रोकने के लिए 8 दलों के साथ गठबंधन किया है। असम में बांग्लादेशी घुसपैठ और असली असमिया जैसे मुद्दे हावी होंगे।
राजनीतिक गलियारों में इस चुनाव को बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि इसका असर सिर्फ़ इन्हीं राज्यों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह राष्ट्रीय राजनीति की दिशा और दशा भी तय कर सकता है। पश्चिम बंगाल में चुनावी मुकाबला खास तौर पर दिलचस्प रहने की उम्मीद है, जहाँ BJP और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिलेगी। सूत्रों के मुताबिक, बंगाल में वोटिंग तीन से चार चरणों में होने की संभावना है।
जहां केरल और पुडुचेरी में एक ही चरण में चुनाव कराने की चर्चा है, वहीं तमिलनाडु और असम में दो चरणों में चुनाव हो सकते हैं। हालांकि, अंतिम फैसला और सटीक तारीखें चुनाव आयोग की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद ही सामने आएंगी।
चुनाव की तारीखों की घोषणा होने से पहले ही, इन राज्यों में राजनीतिक सरगर्मी तेज़ हो गई है। राजनीतिक दल अपने चुनावी गठबंधनों को मज़बूत करने में जुटे हैं। कांग्रेस ने भी असम में अपने 15 उम्मीदवारों के नामों की घोषणा कर दी है, जिससे चुनावी अभियान और भी तेज़ हो गया है।
इस बार, पूरे देश का ध्यान तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल पर टिका है, जहाँ सत्ता के लिए होने वाली लड़ाई के बेहद दिलचस्प और ज़ोरदार होने की उम्मीद है। असम भी राजनीतिक रूप से एक अहम चुनावी अखाड़ा बन गया है। अब सभी की नज़रें चुनाव आयोग की प्रेस कॉन्फ्रेंस पर टिकी हैं, जो यह तय करेगी कि आने वाले हफ़्तों में इन पाँच राज्यों में लोकतंत्र का यह महापर्व किन तारीखों पर शुरू होगा, और लोग अपने मताधिकार का इस्तेमाल करके यह फ़ैसला कब करेंगे कि सत्ता की बागडोर किसके हाथों में होगी।





