मध्य प्रदेश में ग्रामीण आबादी की जमीन से जुड़े अधिकारों को मजबूत करने की दिशा में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक चलने वाले ‘सेवा-संकल्प अभियान’ के साथ 50 लाख से अधिक ग्रामीणों को उनकी आबादी भूमि के नि:शुल्क पंजीयन और स्वामित्व अधिकार अभिलेख उपलब्ध कराने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। राज्य सरकार के मुताबिक, पात्र हितग्राहियों के पंजीयन का खर्च सरकार वहन करेगी।
यह फैसला सिर्फ रजिस्ट्री शुल्क माफ करने की कवायद नहीं है। इसके पीछे ग्रामीण परिवारों को अपनी संपत्ति का वैध और दर्ज मालिकाना हक देने की बड़ी सोच दिखाई देती है। यही वजह है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के इस फैसले को ग्रामीण सुशासन और संपत्ति अधिकार के नजरिए से भी देखा जा रहा है।
1. कागज का मालिकाना हक, गांव के परिवार के लिए बड़ा बदलाव
गांवों में मकान और आबादी की जमीन पर लंबे समय से कब्जा या उपयोग तो होता है, लेकिन हर परिवार के पास संपत्ति का ऐसा पंजीकृत दस्तावेज नहीं होता जिसे जरूरत पड़ने पर कानूनी और आर्थिक रूप से मजबूत प्रमाण के तौर पर इस्तेमाल किया जा सके।
स्वामित्व अधिकार अभिलेख मिलने से पात्र परिवारों की संपत्ति की पहचान और रिकॉर्ड अधिक स्पष्ट हो सकता है। केंद्र की स्वामित्व योजना का मूल उद्देश्य भी ग्रामीण आबादी क्षेत्रों में संपत्ति मालिकों को अधिकारों का रिकॉर्ड उपलब्ध कराना और संपत्ति की सीमाओं को स्पष्ट करना है। इसके लिए ड्रोन सर्वे और आधुनिक मानचित्रण तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है।
यानी मोहन सरकार की पहल को ‘जमीन है, लेकिन कागज भी हो’ की सोच से जोड़कर देखा जा सकता है।
2. मुफ्त रजिस्ट्री से सीधे आर्थिक राहत
संपत्ति का पंजीयन आम ग्रामीण परिवार के लिए सिर्फ कागजी प्रक्रिया नहीं होता। इसमें शुल्क और प्रशासनिक प्रक्रिया दोनों जुड़े होते हैं। ऐसे में सरकार द्वारा पात्र ग्रामीणों की रजिस्ट्री का खर्च उठाने का फैसला आर्थिक राहत का माध्यम बन सकता है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सरकार ने इसे किसी एक जिले या क्षेत्र तक सीमित नहीं रखा, बल्कि प्रदेशव्यापी अभियान के तौर पर आगे बढ़ाया है। यानी मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का फोकस सिर्फ योजना घोषित करने पर नहीं, बल्कि बड़ी संख्या में ग्रामीण परिवारों तक उसका लाभ पहुंचाने पर है।
3. जमीन का दस्तावेज मतलब भविष्य की आर्थिक ताकत
स्वामित्व का दस्तावेज मिलने के बाद संपत्ति की पहचान अधिक स्पष्ट होती है। इससे भविष्य में संपत्ति से जुड़े लेन-देन, उत्तराधिकार और विवादों में रिकॉर्ड की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। केंद्र सरकार भी स्वामित्व योजना को ग्रामीण संपत्ति विवाद कम करने और संपत्ति मालिकों को अधिकारों का रिकॉर्ड देने से जोड़ती रही है। अगस्त 2026 में पंचायती राज मंत्रालय ने बताया था कि स्वामित्व संपत्ति कार्ड के आधार पर देशभर में हजारों ऋण भी वितरित किए जा चुके हैं। इस लिहाज से मध्य प्रदेश में बड़े पैमाने पर स्वामित्व दस्तावेज उपलब्ध कराने की पहल को ग्रामीण संपत्ति को आर्थिक संसाधन में बदलने की दिशा में एक कदम माना जा सकता है।
4. सेवा-संकल्प सिर्फ रजिस्ट्री तक सीमित नहीं
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने ‘सेवा-संकल्प अभियान’ को व्यापक जनभागीदारी से जोड़ने पर जोर दिया है। अभियान 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक चलाया जा रहा है और इसमें सरकारी योजनाओं से जुड़े लाभार्थियों तथा विभिन्न सामाजिक गतिविधियों को भी जोड़ा जा रहा है। 17 सितंबर को प्रदेशभर में 58 लाख आशीर्वाद के दीपक जलाने का कार्यक्रम भी रखा गया है। सरकार ने जिला प्रशासन को स्थानीय स्तर पर जनभागीदारी के साथ कार्यक्रम आयोजित करने के निर्देश दिए हैं। यानी अभियान का संदेश दो स्तरों पर है—सरकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना और समाज को जनभागीदारी से जोड़ना।
5. CM मोहन यादव के ‘सुशासन मॉडल’ की अगली कड़ी
डॉ. मोहन यादव सरकार की इस पहल का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि जमीन जैसे संवेदनशील विषय को रिकॉर्ड, पंजीयन और पारदर्शिता से जोड़ा जा रहा है। भूमि रिकॉर्ड को डिजिटल और अधिक व्यवस्थित बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने भी DILRMP 3.0 के तहत 2026 से 2031 तक आधुनिक ‘लैंड स्टैक’ की दिशा में काम शुरू किया है। इसका उद्देश्य भूमि प्रशासन को अधिक पारदर्शी और नागरिक-केंद्रित बनाना है। ऐसे व्यापक बदलावों के बीच मध्य प्रदेश में ग्रामीण आबादी की संपत्तियों का पंजीयन अभियान जमीन के अधिकार को दस्तावेजी मजबूती देने की दिशा में अहम कदम बन सकता है।
50 लाख से ज्यादा ग्रामीणों तक लाभ पहुंचाने का लक्ष्य अपने आप में बड़ा है। इसलिए इस फैसले की सफलता का सबसे महत्वपूर्ण पैमाना होगा—कितने पात्र परिवारों को वास्तव में दस्तावेज मिलते हैं, प्रक्रिया कितनी सरल रहती है और विवादित मामलों का समाधान कितनी पारदर्शिता से होता है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अधिकारियों को अभियान को केवल सरकारी कार्यक्रम तक सीमित न रखने और जनप्रतिनिधियों, युवाओं, सामाजिक संगठनों तथा आम नागरिकों की भागीदारी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। मध्य प्रदेश में 50 लाख से अधिक ग्रामीण संपत्तियों की नि:शुल्क रजिस्ट्री का फैसला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह जमीन के इस्तेमाल से आगे बढ़कर जमीन के अधिकार को दस्तावेजी पहचान देने की कोशिश है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सरकार के लिए यह अभियान ग्रामीण परिवारों को राहत देने के साथ-साथ सुशासन, पारदर्शिता और संपत्ति अधिकार को मजबूत करने की बड़ी परीक्षा भी है। अगर अभियान अपने लक्ष्य के मुताबिक जमीन के वास्तविक पात्र परिवारों तक स्वामित्व दस्तावेज पहुंचाने में सफल रहता है, तो इसका असर सिर्फ रजिस्ट्री रिकॉर्ड तक सीमित नहीं रहेगा। यह ग्रामीण परिवारों में मालिकाना सुरक्षा, संपत्ति संबंधी स्पष्टता और भविष्य की आर्थिक संभावनाओं को भी मजबूत कर सकता है।