‘वन नेशन, वन हेल्पलाइन’ पहल को मध्यप्रदेश में मजबूती, महिला-बाल सुरक्षा तंत्र हुआ और सशक्त
मध्यप्रदेश में महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा, सम्मान और संरक्षण को मजबूत बनाने की दिशा में राज्य सरकार लगातार कदम उठा रही है। प्रदेश सरकार ने तकनीक आधारित सहायता तंत्र को सुदृढ़ करते हुए आपातकालीन सेवाओं को एकीकृत करने का प्रयास किया है। इसी क्रम में भारत सरकार की ‘वन नेशन, वन हेल्पलाइन’ पहल को प्रदेश में प्रभावी रूप से लागू करते हुए महिला हेल्पलाइन 181 और चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 को आपातकालीन सेवा 112 से जोड़ा गया है।
मुख्यमंत्री Mohan Yadav के नेतृत्व में प्रदेश में महिला और बाल सुरक्षा से जुड़े तंत्र को अधिक संवेदनशील, जवाबदेह और तकनीकी रूप से सक्षम बनाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। सरकार का कहना है कि समाज की वास्तविक प्रगति तभी संभव है जब महिलाओं और बच्चों को सुरक्षित वातावरण, सम्मान और समान अवसर प्राप्त हों। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए महिला सुरक्षा और बाल संरक्षण से जुड़ी सेवाओं को मजबूत किया जा रहा है।
महिलाओं और बेटियों के सम्मान के लिए सरकार की प्रतिबद्धता
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि महिलाओं और बेटियों की सुरक्षा राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। प्रदेश में महिलाओं को सुरक्षित वातावरण देने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए विभिन्न योजनाएं, जागरूकता अभियान और तकनीक आधारित सेवाएं संचालित की जा रही हैं।
राज्य सरकार का प्रयास है कि महिलाओं को किसी भी संकट की स्थिति में तुरंत सहायता उपलब्ध हो सके। इसके लिए महिला हेल्पलाइन, वन स्टॉप सेंटर, परामर्श सेवाएं और त्वरित सहायता प्रणाली को मजबूत किया गया है। इन व्यवस्थाओं का उद्देश्य महिलाओं को हिंसा, उत्पीड़न या किसी भी तरह की परेशानी की स्थिति में तुरंत राहत और मार्गदर्शन प्रदान करना है।
‘वन नेशन, वन हेल्पलाइन’ के तहत एकीकृत नियंत्रण कक्ष
भारत सरकार की पहल के अनुरूप मध्यप्रदेश में महिला हेल्पलाइन 181 और चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 को आपातकालीन सेवा 112 से जोड़कर महिला एवं बाल विकास विभाग का राज्य स्तरीय कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है। यह व्यवस्था 31 अगस्त 2023 से प्रभावी है। इस एकीकृत प्रणाली के माध्यम से अब प्रदेश की कोई भी महिला, 18 वर्ष से कम आयु का कोई भी बच्चा या उनकी ओर से कोई भी व्यक्ति सप्ताह के सातों दिन और चौबीसों घंटे 181, 1098 या 112 नंबर पर टोल-फ्री कॉल कर सहायता प्राप्त कर सकता है। तकनीक आधारित यह प्रणाली संकट की स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया सुनिश्चित करती है और जरूरतमंदों तक मदद तेजी से पहुंचाती है।
महिला हेल्पलाइन 181: संकट में महिलाओं का सहारा
प्रदेश में हिंसा या उत्पीड़न से प्रभावित महिलाओं को त्वरित सहायता उपलब्ध कराने के उद्देश्य से महिला हेल्पलाइन 181 का संचालन किया जा रहा है। यह सेवा प्रदेश के सभी वन स्टॉप सेंटर से जुड़ी हुई है, जिससे महिलाओं को एक ही मंच से विभिन्न सेवाओं तक पहुंच मिलती है।
इस हेल्पलाइन के माध्यम से जरूरत पड़ने पर पुलिस, अस्पताल, एम्बुलेंस, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण और संरक्षण अधिकारियों से संपर्क स्थापित कराया जाता है। साथ ही प्रशिक्षित परामर्शदाता महिलाओं को भावनात्मक और मनोवैज्ञानिक सहयोग भी प्रदान करते हैं।
महिला हेल्पलाइन का प्रभाव लगातार बढ़ रहा है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में 29 जनवरी 2026 तक लगभग 1 लाख 28 हजार महिलाओं को इस हेल्पलाइन के माध्यम से सहायता प्रदान की जा चुकी है। यह आंकड़ा इस सेवा के प्रति बढ़ते भरोसे और उसकी उपयोगिता को दर्शाता है।
चाइल्ड हेल्पलाइन 1098: बच्चों के संरक्षण की मजबूत व्यवस्था
प्रदेश में बच्चों की सुरक्षा और संरक्षण के लिए चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 भी सक्रिय रूप से कार्य कर रही है। इस हेल्पलाइन को भी आपातकालीन सेवा 112 से जोड़ा गया है, जिससे संकटग्रस्त बच्चों तक मदद तेजी से पहुंच सके। हेल्पलाइन पर प्राप्त कॉल्स को कॉल रिस्पॉन्डर उनकी प्रकृति के आधार पर वर्गीकृत करते हैं। यदि मामला आपातकालीन होता है तो उसे तुरंत आपातकालीन सेवा 112 और संबंधित जिले की जिला बाल संरक्षण इकाई को भेज दिया जाता है। वहीं अन्य मामलों में आवश्यक कार्रवाई के लिए सीधे जिला बाल संरक्षण इकाई को जानकारी दी जाती है।
वित्तीय वर्ष 2025-26 में 29 जनवरी 2026 तक चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 के माध्यम से 26 हजार 974 बच्चों को विभिन्न प्रकार की सहायता प्रदान की जा चुकी है। इसमें संकटग्रस्त बच्चों को संरक्षण देना, उन्हें परामर्श उपलब्ध कराना, पुनर्वास की व्यवस्था करना और आवश्यक सेवाओं तक उनकी पहुंच सुनिश्चित करना शामिल है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की तकनीक आधारित व्यवस्था न केवल संकटग्रस्त महिलाओं और बच्चों को त्वरित मदद उपलब्ध कराती है, बल्कि समाज में सुरक्षा और भरोसे का माहौल भी मजबूत करती है।
कुल मिलाकर, मध्यप्रदेश में ‘वन नेशन, वन हेल्पलाइन’ पहल के प्रभावी क्रियान्वयन के साथ महिला और बाल सुरक्षा के क्षेत्र में एक मजबूत और संवेदनशील सहायता तंत्र विकसित होता दिखाई दे रहा है। राज्य सरकार का मानना है कि ऐसी व्यवस्थाओं से महिलाओं और बच्चों को सुरक्षा का भरोसा मिलेगा और समाज में उनका सम्मान और अधिकार और अधिक सशक्त होंगे।





