ओडिशा के पुरी में भगवान जगन्नाथ का रत्न भंडार पूरे 46 साल बाद खोला गया। रत्न भंडार में भगवान जगन्नाथ, बालभद्र और सुभद्रा और सुदर्शन के जेवर ऱखे हैं। रत्न भंडार में सात तहखाने में हैं।
- 11 सदस्यों की टीम के सामने खोला रत्न भंडार
- सांप पकड़ने वालों को भी बुलाया गया था
- भगवान जगन्नाथ के भंडार की रक्षा करते हैं सर्प
बाह्य कक्ष में लगभग रोज सजावट के लिए इस्तेमाल होने वाले गहनों को रखा जाता है। आंतरिक कक्षों में प्राचीन जेवरात रखे है जिन्हें रोज भगवान के श्रृंगार के लिए इस्तेमाल नहीं किया जाता है। रत्न भंडार 11 सदस्यों की टीम के सामने खोला गया। जिसमें रिटायर जज में मौजूद रहे। इस दौरान सांप पकड़ने वालों को भी बुलाया गया था। ऐसी मान्यता है कि भगवान जगन्नाथ के भंडार की रक्षा सांप करते हैं।
भंडार में मिले सोने और चांदी के आभूषणों को सात बक्सों में सुरक्षित रख दिया है। खजाने में सोने और चांदी के आभूषणों की गिनती बाद में की जाएगी। खजाना खोलने के पहले देवी विमला और देवी देवताओं की पूजा पाठ के बाद मंजूरी ली गई।
ये लोग गए रत्न भंडार के अंदर
जगन्नाथ मंदिर रत्न भंडार को खोलने के लिए मंदिर के अंदर जो लोग गए उनमें मंदिर प्रशासक प्रमुख और पुरी कलेक्टर के साथ ASI सुपरिटेंडेंट, रत्न भंडार सब कमेटी सदस्य, सुपरवाइजरी पैनल के दो सदस्य अंदर गए हैं। इसके साथ ही गजपति महाराज के प्रतिनिधि ही नहीं सेवक समुदाय से चार सदस्य शामिल हैं। इसे लेकर ओडिशा की उप मुख्यमंत्री प्रवती परिदा ने कहा राज्य के सीएम ने निर्देश दिए हैं कि उन्हें वहां मौजूद रहना है। सभी वहीं पर रुकेंगे। देखेंगे कि गिनती में किसी तरह की परेशानी न हो। डिप्टी सीएम परिदा ने कहा उन्हें विश्वास है प्रभु की कृपा से सब कुछ आसान होगा।
अंतिम बार 1978 में खोला गया था रत्न भंडार
इससे पहले रत्न भंडार 1978 में खोला गया था। 1978 में यहां 128 किलो सोना और 221.53 किलो चांदी मिली थी। भगवान जगन्नाथ मंदिर के खजाने से करोड़ों का सोना और चांदी मिली थी। इसमें साल 1905, 1926 में भी खजाना खोला गया था। वहां पर मिली महंगी वस्तुओं की सूची बनाई गई थी। रिपोर्ट के अनुसार 1985 में रत्न भंडार का भीतरी हिस्सा ही खुला था। लेकिन सूची अपडेट नहीं की जा सकी। हालांकि अंतिम बार 1978 में जो सूची बनी थी। उस सूची में करीब 128 किलो सोना, 222 किलो चांदी होने का दावा किया था। इसके अतिरिक्त सोने और चांदी की वस्तुओं के बारे में नहीं बताया गया था। ऐसे में अंतिम बार 1978 के बाद से अब तक भगवान जगन्नाथ मंदिर के पास कितनी संपत्ति आई है। इसका अब तक कोई अंदाजा नहीं लगाया जा सका है।




