डिनर के बहाने पिलाया ड्रिंक..फिर किया दुष्कर्म…NSUI ओडिशा अध्यक्ष उदित प्रधान गिरफ्तार
ओडिशा में कांग्रेस की छात्र इकाई NSUI भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन प्रदेश अध्यक्ष उदित प्रधान को एक 19 वर्षीय युवती से बलात्कार के गंभीर आरोप में पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। पीड़िता ने एफआईआर में दावा किया है कि उदित प्रधान ने उसे डिनर के लिए आमंत्रित किया था, जहां कोल्ड ड्रिंक में नशीला पदार्थ मिलाकर होटल के कमरे में उसके साथ दुष्कर्म किया गया। घटना मार्च 2025 की बताई जा रही है, लेकिन पीड़िता ने मानसिक रूप से स्थिर होने और परिजनों से बातचीत के बाद हाल ही में पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत दर्ज होते ही भुवनेश्वर के मंचेश्वर थाना पुलिस ने उदित प्रधान को हिरासत में लिया और पूछताछ के बाद औपचारिक तौर पर गिरफ्तार कर लिया।
- 19 वर्षीय युवती से होटल में दुष्कर्म का आरोप
- ड्रिंक में नशा मिलाने की बात कही
- NSUI की चुप्पी और कांग्रेस की किरकिरी
- डिनर के बहाने बुलाया था होटल
- ड्रिंक में नशा मिलाकर किया दुष्कर्म
पीड़िता की आपबीती: “जब होश आया, वो बगल में लेटे थे”
एफआईआर में पीड़िता ने अपनी आपबीती साझा करते हुए कहा “मुझे डिनर के बहाने होटल बुलाया गया। मैंने शराब पीने से इनकार किया, तो उन्होंने मुझे कोल्ड ड्रिंक दी। जैसे ही मैंने पीया, मुझे चक्कर आने लगे। मैंने घर छोड़ने की बात कही, लेकिन फिर मैं बेहोश हो गई। जब होश आया, तो मैं होटल के कमरे में थी और उदित प्रधान मेरे बगल में लेटे थे। मुझे शारीरिक पीड़ा हुई और अहसास हुआ कि मेरे साथ दुष्कर्म हुआ है।”
इस बयान ने पूरे घटनाक्रम को भयावह और चौंकाने वाला बना दिया है। युवती के अनुसार, वह मानसिक रूप से इस आघात को झेल नहीं पा रही थी, जिस कारण कुछ समय बाद उसने हिम्मत कर शिकायत दर्ज कराई।
FIR में दर्ज धाराएं… बलात्कार और आपराधिक विश्वासघात के तहत मामला
मंचेश्वर थाने में दर्ज एफआईआर के अनुसार, उदित प्रधान के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की कई गंभीर धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है, जिनमें शामिल हैं धारा 64(1): बलात्कार। धारा 123: नशीला पदार्थ देकर अपराध करना। धारा 296: आपराधिक विश्वासघात। धारा 74: धोखे से यौन संबंध बनाना। धारा 351(2).. किसी भी महिला की इच्छा के विरुद्ध Sexual harassment। पुलिस सूत्रों ने पुष्टि की है कि Medical examination और शुरुआती जांच में पीड़िता के दुष्कर्म के दावे की पुष्टि हो रही है। आरोपी को भुवनेश्वर court में पेश किया गया। जहां उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।
NSUI और कांग्रेस नेतृत्व की चुप्पी पर उठे सवाल
उदित प्रधान NSUI के ओडिशा प्रदेश अध्यक्ष हैं, और कांग्रेस की छात्र इकाई में यह पद एक राजनीतिक रूप से अत्यंत संवेदनशील माना जाता है। ऐसे में इतने गंभीर आरोपों के बाद भी NSUI और कांग्रेस दोनों की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है। अब तक न तो NSUI के राष्ट्रीय अध्यक्ष की ओर से कोई प्रतिक्रिया आई है, और न ही कांग्रेस के प्रदेश या केंद्रीय नेतृत्व ने कोई बयान जारी किया है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि ऐसी चुप्पी कांग्रेस की साख को और नुकसान पहुंचा सकती है, खासकर तब जब पार्टी महिला सुरक्षा और अधिकारों को लेकर सड़कों पर उतरती रही है।
क्या था उदित प्रधान का राजनीतिक और सामाजिक प्रोफाइल?
उदित प्रधान ओडिशा में कांग्रेस के उभरते युवा नेताओं में गिने जाते थे। छात्र राजनीति से शुरुआत करने के बाद उन्होंने राज्य स्तर पर कई आंदोलनों का नेतृत्व किया था। NSUI के माध्यम से वे युवाओं से जुड़ाव के कई कार्यक्रम चला रहे थे और अक्सर सोशल मीडिया व जनसभाओं में महिला अधिकारों और सम्मान की बातें करते थे। अब उनके ऊपर लगे आरोप ने उनकी छवि को ध्वस्त कर दिया है। कांग्रेस के लिए यह घटना राजनीतिक और नैतिक दोनों दृष्टिकोण से गंभीर संकट के रूप में देखी जा रही है।
राजनीतिक विरोधियों का हमला तेज
घटना के बाद BJP, BJD (बीजद) और अन्य राजनीतिक दलों ने कांग्रेस पर हमला बोलना शुरू कर दिया है। BJP महिला मोर्चा की ओर से कहा गया कि जिस राजनीतिक पार्टी की छात्र शाखा का अध्यक्ष ऐसी नीच हरकत करे, वो राजनीतिक पार्टी महिला सुरक्षा पर कोई नैतिकता से बात नहीं कर सकती। बीजू जनता दल (BJD) ने भी कांग्रेस से तत्काल कार्रवाई की मांग की है और पीड़िता को न्याय दिलाने में तेजी लाने की अपील की है।
क्या कांग्रेस लेगी कार्रवाई? संगठन पर नैतिक दबाव
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या कांग्रेस पार्टी इस मामले में स्वत: संज्ञान लेकर उदित प्रधान को संगठन से निलंबित या निष्कासित करेगी? चुप्पी की नीति से पार्टी को राजनीतिक नुकसान तो होगा ही, बल्कि उसके महिला हितैषी छवि को भी गहरा आघात पहुंचेगा। राजनीतिक जानकार मानते हैं कि यदि कांग्रेस नेतृत्व शीघ्र कोई ठोस कदम नहीं उठाता, तो यह मामला आगामी चुनावों में उसके खिलाफ मुद्दा बन सकता है, खासकर महिला मतदाताओं के बीच।
एक सनसनीखेज मामला, जिसमें नैतिकता और राजनीति आमने-सामने
उदित प्रधान की गिरफ्तारी ने एक बार फिर यह दिखा दिया कि सत्ता और संगठन में बैठे व्यक्ति अगर व्यक्तिगत आचरण की सीमाएं लांघते हैं, तो सिर्फ कानून ही नहीं, समाज भी उन्हें कठघरे में खड़ा करता है। जहां एक तरफ पुलिस ने त्वरित कार्रवाई कर पीड़िता को राहत दी है, वहीं कांग्रेस संगठन की मौन स्थिति समाज में गलत संकेत दे सकती है। अब देखना यह है कि कांग्रेस पार्टी इस मामले में नैतिकता की कसौटी पर खरी उतरती है या राजनीतिक मंथन में मामला दबा दिया जाता है। …(प्रकाश कुमार पांडेय)