10 अक्तूबर को दूसरा नमचा बरवा फोरम और शीत्सांग में राष्ट्रीय पारिस्थितिक सभ्यता उच्चभूमि
निर्माण मंच शीत्सांग स्वायत्त प्रदेश के न्यिंगची शहर में आयोजित हुआ। इस बार फोरम का विषय था,
"प्रौद्योगिकी से सशक्तिकरण, हरित पठार"। इसमें एक मुख्य सत्र और दो विषयगत सत्र आयोजित
किए गए। इस दौरान विशेषज्ञों और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने पठारी क्षेत्र के पारिस्थितिक
संरक्षण, जलवायु संबंधी जोखिम, आपदा रोकथाम और क्षेत्रीय सहयोग जैसे मुद्दों पर चर्चा की।
मुख्य सत्र में विशेषज्ञों ने छिंगहाई-शीत्सांग पठार पर जलवायु परिवर्तन से पैदा होने वाले आपदा
जोखिमों और उनकी रोकथाम के उपायों पर अपने विचार रखे। इसके अलावा, जलवायु परिवर्तन का
हिमनदों के आसपास के पारिस्थितिक तंत्र और प्रजातियों की विविधता पर पड़ने वाले प्रभावों, एशिया
के जल स्रोतों के प्रमुख क्षेत्र में ग्लेशियरों और हिमझीलों के सर्वेक्षण तथा हिमस्खलन और हिमझीलों के
फटने से होने वाले खतरों के आकलन पर भी रिपोर्ट पेश की गई। साथ ही, प्रतिनिधियों ने पठारी क्षेत्र के
पारिस्थितिक संरक्षण से जुड़ी नई उपलब्धियों और तकनीक की मदद से हरित विकास को आगे बढ़ाने
के तरीकों पर चर्चा की।
इसी क्रम में, 10 अक्तूबर की शाम को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में फोरम की पांच प्रमुख उपलब्धियों की
घोषणा की गई। पहली, रचनात्मक कार्य सुझाव तैयार किए गए। दूसरी, "14वीं पंचवर्षीय योजना"
(2021-2025) के दौरान शीत्सांग में राष्ट्रीय पारिस्थितिक सभ्यता उच्चभूमि निर्माण से जुड़ी
उपलब्धियों के मूल्यांकन की रिपोर्ट जारी की गई। तीसरी, दूसरे छिंगहाई-शीत्सांग वैज्ञानिक अभियान
से मिले निष्कर्षों के आधार पर बताया गया कि छिंगहाई-शीत्सांग पठार पर्यावरणीय बदलाव के तीसरे
चरण से गुजर रहा है। चौथी, नमचा बरवा प्रौद्योगिकी विशेष पहल का प्रस्ताव पेश किया गया। पांचवीं,
शीत्सांग और छिंगहाई, सछ्वान एवं युन्नान प्रांतों के बीच पठारी क्षेत्र के समन्वित संरक्षण को लेकर
सहमति बनी।
(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)





