अब MP के स्कूली बच्चे पढ़ेंगे रानी दुर्गावती का शौर्यगाथा …सीएम डॉ.मोहन यादव ने किया ऐलान

Now CM Mohan Yadav announced the valor of Rani Durgavati in MP school curriculum

अब एमपी के स्कूली पाठ्यक्रम रानी दुर्गावती का शौर्य …सीएम डॉ.मोहन यादव ने किया ऐलान

MP के स्कूली पाठ्यक्रम में रानी दुर्गावती के शौर्य की कहानी होगी शामिल

रानी दुर्गावती ने अपने जीवनकाल में करीब 52 लड़ाई लड़ीं जिनमें से 51 में उन्होंने विजय श्री हासिल की थी। उनके गौंडवाना साम्राज्य में करीब 23 हजार से अधिक गांव शामिल थे। वीर रानी दुर्गावती ने तीन बार मुगल सेना को युद्ध में धूल चटाई थी। अब मध्यप्रदेश की डॉ. मोहन सरकार ने उनकी वीरता की कहानियों को स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है।

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने ऐतिहासिक घोषणा करते हुए कहा कि रानी दुर्गावती की वीरता, नेतृत्व और बलिदान की कहानी को अब राज्य के स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल किया जाएगा। यह निर्णय न केवल इतिहास की स्मृति को संजोने वाला है, बल्कि नई पीढ़ी को प्रेरणा देने वाला भी।

कौन थीं रानी दुर्गावती?
जन्म: 5 अक्टूबर 1524
साम्राज्य: गोंडवाना
विवाह: राजा संग्राम शाह के पुत्र दलपत शाह से
शासनकाल: लगभग 14 वर्ष
युद्ध: कुल 52 युद्ध, जिनमें से 51 में विजय
उल्लेखनीय उपलब्धि: तीन बार मुगलों को पराजित किया
बलिदान: 24 जून 1564, आत्मबलिदान द्वारा वीरगति प्राप्त की

रानी दुर्गावती का शौर्य और बलिदान

1564 में मुगल सेनापति आसफ खां ने धोखे से रानी पर हमला किया और तोपों का उपयोग कर भारी नुकसान पहुँचाया। रानी दुर्गावती को आंख और गले में तीर लगे, लेकिन उन्होंने युद्ध छोड़ने से इनकार कर दिया। अंततः जब वह घायल हो गईं और दुश्मनों के हाथों गिरफ्तारी की आशंका थी, तो उन्होंने अपनी तलवार खुद के सीने में घोंपकर आत्मबलिदान दिया। उनका यह बलिदान स्वतंत्रता और आत्मसम्मान की मिसाल बन गया।

पाठ्यक्रम में क्यों शामिल किया जा रहा है?

मुख्यमंत्री के अनुसार यह फैसला “विरासत से विकास” की सोच का हिस्सा है। रानी दुर्गावती की गाथा विद्यार्थियों को राष्ट्रप्रेम, साहस और नेतृत्व की प्रेरणा देगी। लोकल हीरो के माध्यम से इतिहास को स्थानीय और जीवंत संदर्भ में पढ़ाया जा सकेगा। उनके जल संरक्षण और प्रशासनिक योगदान भी विद्यार्थियों को समझाए जाएंगे।

रानी दुर्गावती के नाम पर योजनाएं
राज्य सरकार ने मोटे अनाज (मिलेट्स) के प्रोत्साहन और खरीद हेतु एक योजना “रानी दुर्गावती योजना” के नाम पर शुरू की है। इससे यह स्पष्ट होता है कि सरकार इतिहास और वर्तमान नीतियों को जोड़ने का प्रयास कर रही है। रानी दुर्गावती न केवल गोंड समाज की गौरवशाली प्रतिनिधि थीं, बल्कि वे भारत की उन वीरांगनाओं में शामिल हैं जिन्होंने मुगल साम्राज्य के विस्तार को चुनौती दी। उनका आत्मबलिदान चंद्रशेखर आज़ाद की तरह याद किया जाता है – “आजाद ही जिएं और आज़ाद ही मरें।” रानी दुर्गावती का पाठ्यक्रम में शामिल होना केवल ऐतिहासिक सम्मान नहीं, बल्कि यह भारतीय नारीशक्ति, नेतृत्व और लोकगाथाओं को नयी पीढ़ी से जोड़ने का प्रयास है। शिक्षा का यह दृष्टिकोण विद्यार्थियों को पुस्तकीय ज्ञान से आगे बढ़ाकर संस्कार, संस्कृति और कर्तव्यबोध की ओर प्रेरित करेगा।…(प्रकाश कुमार पांडेय)

Exit mobile version