ईरान-इजरायल जंग के बीच उत्तर कोरिया का मिसाइल परीक्षण, दागीं इतनी बैलिस्टिक मिसाइलें..जापान ने दी ये प्रतिक्रिया

North Korea missile test

ईरान-इजरायल जंग के बीच उत्तर कोरिया का मिसाइल परीक्षण, 10 बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं

पश्चिम एशिया में जारी तनाव और युद्ध के माहौल के बीच पूर्वी एशिया में भी स्थिति अचानक गर्म होती नजर आ रही है। इसी बीच उत्तर कोरिया ने शनिवार को अपने पूर्वी तट से कई बैलिस्टिक मिसाइलें दागकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय को चौंका दिया। दक्षिण कोरिया और जापान ने पुष्टि की है कि उत्तर कोरिया ने करीब 10 बैलिस्टिक मिसाइलों का परीक्षण किया, जो बाद में समुद्र में जाकर गिर गईं। इस घटनाक्रम को उत्तर कोरिया की सैन्य ताकत का प्रदर्शन और क्षेत्रीय तनाव बढ़ाने वाली कार्रवाई के रूप में देखा जा रहा है।

जानकारी के अनुसार उत्तर कोरिया ने यह मिसाइल परीक्षण अपने पूर्वी तट से समुद्र की दिशा में किया। मिसाइलों के प्रक्षेपण के बाद दक्षिण कोरिया और जापान की सुरक्षा एजेंसियां तुरंत सतर्क हो गईं और उन्होंने इस गतिविधि पर कड़ी निगरानी शुरू कर दी। दोनों देशों ने कहा कि दागी गई मिसाइलें संभवतः बैलिस्टिक श्रेणी की थीं और वे कुछ दूरी तय करने के बाद समुद्र में गिर गईं। दक्षिण कोरिया की सेना ने इस घटना की पुष्टि करते हुए कहा कि उसने उत्तर कोरिया की ओर से किए गए इस प्रक्षेपण को ट्रैक कर लिया था। दक्षिण कोरिया की सैन्य कमान ने बताया कि मिसाइलें पूर्व दिशा की ओर दागी गई थीं। हालांकि शुरुआत में इसे “अज्ञात प्रोजेक्टाइल” बताया गया, लेकिन बाद में विशेषज्ञों ने इसे बैलिस्टिक मिसाइल परीक्षण माना।

जापान की ओर से भी इस घटना पर तत्काल प्रतिक्रिया दी गई। जापान के तटरक्षक बल ने कहा कि उत्तर कोरिया की ओर से दागी गई संदिग्ध मिसाइलें पहले ही समुद्र में गिर चुकी हैं और फिलहाल किसी तरह के नुकसान की सूचना नहीं मिली है। जापान सरकार ने अपने जहाजों और नागरिक विमानों को सावधानी बरतने की सलाह भी जारी की है। विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तर कोरिया का यह कदम ऐसे समय में आया है जब क्षेत्र में पहले से ही तनाव बढ़ा हुआ है। पश्चिम एशिया में ईरान और इजरायल के बीच पिछले करीब दो हफ्तों से संघर्ष की स्थिति बनी हुई है। ऐसे माहौल में उत्तर कोरिया का मिसाइल परीक्षण वैश्विक सुरक्षा चिंताओं को और बढ़ाने वाला माना जा रहा है।

दरअसल, यह मिसाइल परीक्षण उस समय हुआ है जब संयुक्त राज्य अमेरिका और दक्षिण कोरिया संयुक्त रूप से अपना वार्षिक सैन्य अभ्यास “फ्रीडम शील्ड” कर रहे हैं। यह अभ्यास हर साल आयोजित किया जाता है और इसका उद्देश्य दोनों देशों की संयुक्त सैन्य तैयारी को मजबूत करना होता है।हालांकि उत्तर कोरिया लंबे समय से इस सैन्य अभ्यास का विरोध करता रहा है। उत्तर कोरिया का आरोप है कि अमेरिका और दक्षिण कोरिया का यह संयुक्त युद्धाभ्यास वास्तव में उस पर हमले की तैयारी है। इसी वजह से जब भी यह अभ्यास शुरू होता है, उत्तर कोरिया अक्सर मिसाइल परीक्षण या सैन्य गतिविधियों के जरिए अपनी प्रतिक्रिया देता है।

विश्लेषकों के अनुसार इस बार भी उत्तर कोरिया का मिसाइल परीक्षण उसी रणनीति का हिस्सा हो सकता है। इसे अमेरिका और दक्षिण कोरिया को संदेश देने और अपनी सैन्य ताकत दिखाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। उत्तर कोरिया लगातार अपने हथियार कार्यक्रम को मजबूत करने की दिशा में काम कर रहा है और बीते कुछ वर्षों में उसने कई मिसाइल परीक्षण किए हैं।

इससे पहले भी किम जोंग उन के नेतृत्व में उत्तर कोरिया कई बार छोटी और लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों का परीक्षण कर चुका है। जनवरी में भी उत्तर कोरिया ने पूर्वी सागर की दिशा में कई छोटी दूरी की मिसाइलें दागी थीं, जिससे क्षेत्र में सुरक्षा चिंताएं बढ़ गई थीं।दक्षिण कोरिया और जापान ने इस ताजा परीक्षण को गंभीरता से लिया है और कहा है कि वे स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए हैं। दोनों देशों ने यह भी कहा है कि वे अमेरिका के साथ मिलकर क्षेत्रीय सुरक्षा को मजबूत बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाते रहेंगे।इस घटनाक्रम के बाद एशिया-प्रशांत क्षेत्र के कई देशों में चिंता बढ़ गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि उत्तर कोरिया लगातार इस तरह के परीक्षण करता रहा तो इससे क्षेत्रीय स्थिरता प्रभावित हो सकती है और हथियारों की होड़ भी तेज हो सकती है।

दूसरी ओर अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी इस घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है। संयुक्त राष्ट्र सहित कई वैश्विक संस्थाएं पहले ही उत्तर कोरिया के मिसाइल और परमाणु कार्यक्रम को लेकर चिंता व्यक्त कर चुकी हैं। कई देशों का मानना है कि उत्तर कोरिया को अपने हथियार कार्यक्रम को नियंत्रित करने और कूटनीतिक समाधान की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।  फिलहाल उत्तर कोरिया के इस ताजा मिसाइल परीक्षण ने एक बार फिर दुनिया का ध्यान कोरियाई प्रायद्वीप की ओर खींच लिया है। पश्चिम एशिया में पहले से जारी संघर्ष के बीच पूर्वी एशिया में बढ़ती सैन्य गतिविधियां वैश्विक सुरक्षा के लिए नई चुनौती बनती दिखाई दे रही हैं। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि क्षेत्रीय शक्तियां इस स्थिति को संभालने के लिए किस तरह के कदम उठाती हैं और क्या कूटनीति के जरिए तनाव कम करने की कोशिश सफल हो पाती है।

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