नीतीश कुमार की सियासी यात्रा: विधायक से मुख्यमंत्री और अब राज्यसभा तक का लंबा राजनीतिक सफर
बिहार की राजनीति में नीतीश कुमार का नाम एक ऐसे नेता के रूप में लिया जाता है जिन्होंने चार दशक से अधिक समय तक सक्रिय राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। छात्र राजनीति से लेकर विधायक, सांसद, केंद्रीय मंत्री और कई बार बिहार के मुख्यमंत्री बनने तक उनका राजनीतिक सफर बेहद उतार-चढ़ाव और अनुभवों से भरा रहा है। अब जब उन्होंने राज्यसभा की ओर कदम बढ़ाया है, तो उनकी पूरी सियासी यात्रा एक बार फिर चर्चा में है।
1985 में शुरू हुई राजनीतिक पारी
नीतीश कुमार की सक्रिय राजनीतिक यात्रा वर्ष 1985 में शुरू हुई, जब वे पहली बार बिहार विधानसभा के लिए विधायक चुने गए। उस समय वे युवा लोकदल से जुड़े हुए थे और राज्य की राजनीति में तेजी से उभरते नेता के रूप में पहचाने जाने लगे थे। 1987-88 के दौरान उन्होंने युवा लोकदल, बिहार के अध्यक्ष के रूप में भी काम किया, जिससे संगठन में उनकी पकड़ मजबूत हुई।
1989 में पहली बार बने सांसद
1989 में नीतीश कुमार राष्ट्रीय राजनीति में पहुंचे और पहली बार लोकसभा सांसद चुने गए। इसके बाद उन्होंने लगातार कई बार लोकसभा चुनाव जीते और संसद में अपनी सक्रियता के कारण पहचान बनाई। वे कुल छह बार लोकसभा के सदस्य रहे। 1991 में वे दूसरी बार और 1996 में तीसरी बार लोकसभा के लिए चुने गए।
1990 में केंद्र में मंत्री
1990 में नीतीश कुमार को पहली बार केंद्र सरकार में मंत्री बनने का अवसर मिला। उन्हें कृषि और सहकारिता विभाग में केंद्रीय राज्य मंत्री बनाया गया। इसके बाद उनका राजनीतिक कद लगातार बढ़ता गया। 1998 में अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली सरकार में उन्हें केंद्रीय कैबिनेट मंत्री बनाया गया। इस दौरान उन्होंने रेलवे मंत्री के रूप में काम किया। साथ ही कुछ समय तक भूतल परिवहन मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार भी संभाला।
1999 में वे फिर लोकसभा के लिए चुने गए और केंद्रीय कैबिनेट मंत्री के रूप में भूतल परिवहन तथा कृषि मंत्रालय की जिम्मेदारी निभाई। बाद में 2001 से 2004 तक उन्होंने फिर से रेलवे मंत्री के रूप में कार्य किया। रेलवे मंत्री के रूप में उनके कई निर्णयों की उस समय काफी चर्चा हुई।
3 मार्च 2000 को पहली बार बिहार के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली
नीतीश कुमार ने 3 मार्च 2000 को पहली बार बिहार के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। हालांकि यह कार्यकाल बहुत छोटा रहा और 10 मार्च 2000 तक ही चला। उस समय वे समता पार्टी के नेता थे और राज्य की राजनीति में बदलाव की कोशिश कर रहे थे।
2005 में मिली बड़ी सफलता
2005 का वर्ष नीतीश कुमार के राजनीतिक जीवन का बड़ा मोड़ साबित हुआ। 24 नवंबर 2005 को वे फिर बिहार के मुख्यमंत्री बने और इस बार उन्होंने राज्य की राजनीति में लंबा कार्यकाल शुरू किया।
2005 से 2010 तक उन्होंने पहली बार स्थिर सरकार चलाई और विकास, सड़क निर्माण, कानून-व्यवस्था और शिक्षा सुधार जैसे मुद्दों पर काम किया। इसके बाद 2010 के विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी को दोबारा जनादेश मिला और वे 26 नवंबर 2010 से फिर मुख्यमंत्री बने।
कई बार बदलती रही सरकार
नीतीश कुमार का राजनीतिक सफर कई बार सत्ता परिवर्तन और गठबंधन बदलाव के कारण भी चर्चा में रहा। 2014 में उन्होंने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दिया, लेकिन 2015 में वे फिर सत्ता में लौट आए। 22 फरवरी 2015 से 19 नवंबर 2015 तक उनका एक और कार्यकाल रहा। इसके बाद 20 नवंबर 2015 से 26 जुलाई 2017 तक उन्होंने मुख्यमंत्री के रूप में सरकार चलाई। 2017 में उन्होंने एक बार फिर राजनीतिक समीकरण बदले और नई सरकार बनाई। 27 जुलाई 2017 से 12 नवंबर 2020 तक वे मुख्यमंत्री रहे। इसके बाद 16 नवंबर 2020 से 9 अगस्त 2022 तक उनका अगला कार्यकाल चला। 10 अगस्त 2022 से 28 जनवरी 2024 तक भी उन्होंने मुख्यमंत्री के रूप में जिम्मेदारी निभाई। इसके बाद 28 जनवरी 2024 से 19 नवंबर 2025 तक और फिर 20 नवंबर 2025 से उन्होंने एक और कार्यकाल संभाला।
विधान परिषद में भी निभाई भूमिका
2006 में नीतीश कुमार पहली बार बिहार विधान परिषद के सदस्य (MLC) भी बने। यह उनके राजनीतिक जीवन का एक और महत्वपूर्ण पड़ाव था, जहां उन्होंने राज्य की विधायी प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी निभाई।
छह बार लोकसभा सांसद
नीतीश कुमार छह बार लोकसभा के लिए चुने गए। उनका संसदीय करियर 1989 में शुरू हुआ और 2004 तक जारी रहा। संसद में उन्होंने जनता दल के महासचिव और उपनेता के रूप में भी भूमिका निभाई। इस दौरान वे राष्ट्रीय स्तर पर एक प्रमुख नेता के रूप में उभरे।
चार दशक का लंबा राजनीतिक अनुभव
लगभग चार दशक से अधिक समय तक सक्रिय राजनीति में रहने वाले नीतीश कुमार का करियर कई महत्वपूर्ण पदों से होकर गुजरा है। विधायक, सांसद, केंद्रीय मंत्री और कई बार मुख्यमंत्री बनने के कारण उन्हें भारतीय राजनीति के अनुभवी नेताओं में गिना जाता है। अब जब वे राज्यसभा की ओर बढ़ रहे हैं, तो माना जा रहा है कि उनकी राजनीतिक भूमिका राष्ट्रीय स्तर पर और अधिक सक्रिय हो सकती है। बिहार की राजनीति में लंबे समय तक प्रभाव रखने वाले नीतीश कुमार का यह नया कदम उनके राजनीतिक जीवन का एक और महत्वपूर्ण अध्याय माना जा रहा है।




