Bihar: पहली किस्त में 10,000, फिर 6 महीने बाद पूरे 2 लाख…..नीतीश सरकार की महत्वाकांक्षी योजना ने महिलाओं की कर दी बल्ले-बल्ले
बिहार में विधानसभा के चुनाव से पहल की नीतीश सरकार ने ग्रामीण महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता की नई राह खोल दी है। मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत अब महिलाओं को स्वरोजगार शुरू करने के लिए पहली किस्त में 10,000 रुपये की आर्थिक मदद मिलेगी। छह महीने बाद उनके काम का मूल्यांकन कर अतिरिक्त दो लाख रुपये तक की सहायता भी दी जाएगी। यह योजना न केवल महिलाओं की आय और आत्मविश्वास बढ़ाएगी, बल्कि पलायन की समस्या को भी कम करेगी।
आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम
बिहार में मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना का उद्देश्य महिलाओं को स्वरोजगार के माध्यम से आर्थिक और सामाजिक रूप से सशक्त बनाना है। सरकार का कहना है कि इससे महिलाएं दूसरों पर निर्भर रहने के बजाय अपने दम पर रोजगार खड़ा करेंगी। ग्रामीण इलाकों की महिलाओं को अब मजदूरी या पलायन की मजबूरी नहीं रहेगी। डेहरी प्रखंड समेत रोहतास जिले के विभिन्न पंचायतों में महिलाओं ने इस पहल का स्वागत किया है। उनका मानना है कि योजना से गांव में ही रोजगार के अवसर मिलेंगे, जिससे परिवार की स्थिति सुधरेगी और समाज में महिलाओं की पहचान मजबूत होगी।
क्या है योजना?
इस योजना के तहत पात्र महिलाओं को स्वरोजगार शुरू करने के लिए पहली किस्त में 10,000 रुपये सीधे उनके बैंक खाते में भेजे जाएंगे। सितंबर से इसका भुगतान शुरू होगा। रोजगार शुरू करने के छह महीने बाद जब उनके काम का मूल्यांकन होगा, तब दो लाख रुपये तक की अतिरिक्त राशि उपलब्ध कराई जाएगी। इस तरह महिलाएं अपने छोटे-छोटे काम को विस्तार देकर बड़े स्तर पर रोजगार कर सकेंगी। इसके साथ ही सरकार ने ग्रामीण और शहरी इलाकों में हाट-बाजार और विपणन केंद्र खोलने की भी योजना बनाई है। इससे महिलाओं को अपने उत्पाद बेचने के लिए स्थायी बाजार मिलेगा और उन्हें उचित मूल्य भी मिलेगा।
बिहार की महिलाओं की राय
कल्पना ठाकुर , दरिहट भी इसकी सराहना करते हुए कहती हैं कि “अब तक पैसों की कमी से हम रोजगार शुरू नहीं कर पाते थे। सरकार से 10 हजार की मदद मिलने से हिम्मत बढ़ेगी। छह महीने बाद अतिरिक्त मदद मिल गई तो काम को और आगे बढ़ाना आसान होगा। यह योजना महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाएगी।”
मनफुलकुमारी देवी, चकन्हा पंचायत की माने तो “पहले सीमित संसाधनों के कारण महिलाएं रोजगार का सपना पूरा नहीं कर पाती थीं। लेकिन अब सरकार से मिलने वाली दो लाख रुपये तक की सहायता काम का विस्तार करेगी। इससे न सिर्फ महिलाएं कमाएंगी, बल्कि परिवार के अन्य सदस्यों को भी रोजगार मिलेगा।”
पुष्पमा सिंह कटार का कहना है “मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना ने हमें नया हौसला दिया है। पहले महिलाएं दूसरों पर निर्भर थीं, अब अपने सपनों को पूरा कर सकेंगी। यह कदम न केवल आत्मनिर्भर बनाएगा बल्कि परिवार और समाज की आर्थिक प्रगति में भी हमारी बड़ी भूमिका होगी।”
रामप्यारी सहनी, डेहरी कहती हैं कि “यदि सरकार लगातार सहयोग देती रही तो महिलाएं दूध उत्पादन, सब्जी की खेती, बकरी पालन और हस्तशिल्प जैसे काम बड़े पैमाने पर शुरू कर सकती हैं। यह योजना महिलाओं को आर्थिक आजादी और समाज में सम्मान दिलाने की दिशा में मील का पत्थर है।”
पलायन की समस्या होगी कम
विशेषज्ञों का मानना है कि मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना बिहार की ग्रामीण अर्थव्यवस्था में क्रांतिकारी बदलाव ला सकती है। गांव की महिलाएं अब स्वरोजगार से जुड़ेंगी, जिससे पलायन की समस्या पर अंकुश लगेगा। पुरुषों के साथ-साथ महिलाएं भी परिवार की जिम्मेदारी संभाल सकेंगी। ग्रामीण विकास विशेषज्ञों का कहना है कि जब गांव की महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त होंगी, तो परिवार का हर सदस्य मजबूत होगा। इससे गांवों में आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी और छोटे-छोटे उद्योगों का भी विकास होगा।
आत्मनिर्भर बिहार की ओर कदम
नीतीश सरकार का यह कदम ‘आत्मनिर्भर बिहार’ की दिशा में एक बड़ा प्रयास है। महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़कर न केवल उनकी स्थिति सुधरेगी, बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। योजना के तहत पहली किस्त से महिलाएं छोटे काम जैसे सब्जी बेचने, बकरी पालन, सिलाई-कढ़ाई, पापड़-मुरब्बा बनाने जैसे रोजगार शुरू कर सकती हैं। छह महीने बाद मिलने वाली दो लाख की अतिरिक्त राशि से वे इन्हें बड़े पैमाने पर विस्तारित कर सकती हैं।
महिलाओं का आत्मविश्वास बढ़ा
ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाएं इस योजना को लेकर बेहद उत्साहित हैं। पहले जहां रोजगार का सपना अधूरा रह जाता था, अब वे अपने दम पर खड़ा करने की हिम्मत जुटा रही हैं। योजना का सबसे बड़ा लाभ यह है कि इससे महिलाएं समाज में अपनी पहचान मजबूत कर पाएंगी। अब वे केवल परिवार संभालने तक सीमित नहीं रहेंगी, बल्कि आर्थिक मजबूती भी देंगी।
मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना से बिहार की महिलाएं न सिर्फ आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर होंगी, बल्कि सामाजिक रूप से भी सम्मान पाएंगी। यह योजना ग्रामीण महिलाओं के लिए सुनहरा अवसर है।
पहली किस्त की 10 हजार की मदद से शुरू हुआ छोटा रोजगार, छह महीने बाद दो लाख तक के सहयोग से बड़े कारोबार का रूप ले सकता है। यही नहीं, इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी, पलायन रुकेगा और बिहार के गांवों में महिलाओं की भूमिका नई ऊंचाई पर पहुंचेगी। (प्रकाश कुमार पांडेय)