बीजेपी नेता निशिकांत दुबे अपने बेबाक बयानों के लिए जाने जाते है। कभी वो सुप्रीम कोर्ट पर बयान दे देते है तो कभी नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को कटघरे में खड़ा कर देते है। लगभग हर लोकसभा सत्र में इन दिनों सु्र्खियों में रहने वाले निशिकांत दुबे के बारे में जानते है कि मल्टीनेशनल्स में अपनी धाक जमाने के बाद उन्होंने राजनीति तक का सफर कैसे तय किया।
बिहार से है निशिकांत का नाता
निशिकांत दुबे एक जाने-माने भारतीय नेता हैं, जो गोड्डा चुनाव क्षेत्र से चार बार सांसद (MP) रह चुके हैं। निशिकांत का जन्म 28 जनवरी, 1969 को भागलपुर, बिहार में हुआ था। दुबे ने एक कॉर्पोरेट एग्जीक्यूटिव से एक अनुभवी राजनेता बनने का सफर तय किया है। दुबे ने भारत के सबसे कम विकसित इलाकों में से एक में इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट, शिक्षा और हेल्थकेयर में अपने योगदान से भारतीय राजनीति में अपनी एक अलग जगह बनाई है।
राजनीति में आने से पहले, दुबे ने एख कार्पोरेट एकजीक्यूटिव के पद पर काम किया। वो एस्सार ग्रुप में डायरेक्टर के पद पथ थे । यहा दुबे ने अपनी व्यापारिक समझ के झंडे गाडे। फिर 2009 से, उन्होंने लोकसभा में गोड्डा का प्रतिनिधित्व किया है । उन्होंने अपने संसदीय क्षेत्र गोड्डा को ऊपर उठाने में योगदान दिया। उनके समाज-सेवा के कामों और राष्ट्रीय मुद्दों पर उनकी आवाज़ ने उन्हें भारत की राजनीतिक में एक खास बना दिया है।2009 से लेकर अब तक दुबे को शानदार संसदीय प्रदर्शन के लिए 2025 में संसद रत्न अवॉर्ड जैसे सम्मान भी मिला। अपने चाचा की विरासत और कॉलेज के दौरान अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) में अपनी भागीदारी से प्रेरित होकर, दुबे भारतीय जनता युवा मोर्चा (BJYM) और बाद में BJP में शामिल हो गए, जिससे उनके पॉलिटिकल सफर की शुरुआत हुई।
राजनीति की शुरूआत 2009 में
2009 में, दुबे ने झारखंड के गोड्डा से लोकसभा चुनाव लड़ा, यह इलाका अपनी डेवलपमेंटल चुनौतियों के लिए जाना जाता है। उनकी शुरुआती चुनौतियों में गोड्डा की सामाजिक-आर्थिक मुश्किलों से निपटना प्रमुख था। ऐसे में दुबे ने सरकारी योजनाओं और सरकारी संस्थानो पर फोकस करते हुए काम किया । दुबे की जीत गोड्डा के लिए एक टर्निगं पाइंट रही। क्योंकि उन्होंने इंफ्रास्ट्रक्चर और हेल्थकेयर में सुधार के लिए अपने कॉर्पोरेट अनुभव का इस्तेमाल किया। उन्होंने झारखंड के संथाल परगना इलाके में हेल्थकेयर की पहुंच बढ़ाने के लिए AIIMS देवघर बनाने में अहम भूमिका निभाई। इसके अलावा, उनकी कोशिशों से देवघर एयरपोर्ट चालू हुआ, जिससे कनेक्टिविटी और आर्थिक संभावनाएं बढ़ीं। 13 साल की देरी के बाद तिलका मांझी एग्रीकल्चर कॉलेज को फिर से शुरू करने के लिए लोकल अधिकारियों के साथ उनका सहयोग, शिक्षा और खेती के प्रति उनके कमिटमेंट को दिखाता है, जो गोड्डा की ग्रामीण आबादी के लिए ज़रूरी सेक्टर हैं। 2009 के बाद 2014, 2019 और 2024 में सीट बरकरार रखते रखी और एक मंझे राजनेता के तौर पर अपनी पहचान स्थापित की।
पार्लियामेंट में भी दुबे की परफार्मेंस बेहतर है
दुबे ने केवल इफ्रास्ट्रक्टर के कामों के लिए जाने जाते हैं। बल्कि उनकी पार्लियामेंट्री परफॉर्मेंस भी गौर करने लायक है । 2023 तक 95% अटेंडेंस रिकॉर्ड, 178 डिबेट, 329 सवाल और 19 प्राइवेट मेंबर बिल के साथ, उन्होंने नेशनल एवरेज को पीछे छोड़ दिया । लोकसभा में उनकी बेबाक बयानी जिसमें महुआ मोइत्रा जैसे विपक्षी नेताओं पर “कैश-फॉर-क्वेरी” विवाद में हाई-प्रोफाइल आरोप शामिल हैं, ने उन्हें सुर्खियों में बनाए रखा है। 2025 में सुप्रीम कोर्ट के खिलाफ उनकी टिप्पणी ने उनको विवाद में रखा।
कितने करोड के मालिक है दुबे क्या है उनकी नेटवर्थ
2024 तक निशिकांत दुबे की नेट वर्थ ₹74.7 करोड़ होने का अनुमान है, जिसमें ₹30.8 करोड़ की चल संपत्ति और ₹43.9 करोड़ की अचल संपत्ति शामिल है, और ₹8.3 करोड़ की देनदारी है। उनकी दौलत एस्सार में उनके प्री-पॉलिटिकल करियर, ऑनलाइन एंटरटेनमेंट प्राइवेट लिमिटेड जैसी परिवार द्वारा चलाई जाने वाली कंसल्टेंसी फर्मों और राजनीतिक कमाई से आई है। खास संपत्तियों में भागलपुर और दिल्ली में रियल एस्टेट, 350 ग्राम सोना है।
दिल्ली में रहता है दुबे का परिवार
निशिकांत दुबे ने 2000 में अनामिका गौतम से शादी की । अनामिका उनकी बचपन की दोस्त हैं। ,अनामिका, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ फ़ैशन टेक्नोलॉजी (NIFT) से ग्रेजुएट हैं, और एक बिज़नेसवुमन हैं जो ऑनलाइन एंटरटेनमेंट प्राइवेट लिमिटेड को डायरेक्ट करती हैं और धन्य भूति एंटरप्राइजेज की मालिक हैं। कपल के दो बेटे हैं, माहिम और कनिष्क, जिनका ज़िक्र कभी-कभी दुबे की पब्लिक बातों में होता है। भागलपुर और दिल्ली में रहने वाली उनकी फ़ैमिली लाइफ़ में पॉलिटिकल और बिज़नेस से जुड़े कामों का मिला-जुला रूप दिखता है, जिसमें अनामिका फ़ैमिली के बिज़नेस इंटरेस्ट को मैनेज करती हैं।





