योगी सरकार के 9 वर्ष
242 करोड़ से अधिक पौधरोपण
चीन का रिकॉर्ड तोड़ रचा इतिहास
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में लगातार नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है। पिछले नौ वर्षों में प्रदेश में 242 करोड़ से अधिक पौधों का रोपण कर राज्य ने हरित विकास की दिशा में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। इस व्यापक अभियान का असर अब साफ दिखाई देने लगा है, जहां एक ओर प्रदेश में हरित आवरण बढ़ा है, वहीं दूसरी ओर लोगों में पर्यावरण के प्रति जागरूकता भी बढ़ी है।
भारतीय वन स्थिति रिपोर्ट 2023 के अनुसार उत्तर प्रदेश में वनाच्छादन में 559.19 वर्ग किलोमीटर की वृद्धि दर्ज की गई है। यह उपलब्धि इस बात का संकेत है कि प्रदेश में चल रहे पौधरोपण कार्यक्रम केवल औपचारिक अभियान नहीं हैं, बल्कि वे स्थायी पर्यावरणीय संतुलन स्थापित करने की दिशा में प्रभावी कदम साबित हो रहे हैं।
वाराणसी ने बनाया विश्व रिकॉर्ड
पर्यावरण संरक्षण के इस अभियान में वाराणसी ने इतिहास रच दिया। सुजाबाद डोमरी क्षेत्र में आयोजित वृहद पौधरोपण कार्यक्रम के दौरान काशीवासियों ने मात्र एक घंटे में 2,51,446 पौधे लगाकर गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बना दिया।
यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि इससे पहले यह रिकॉर्ड चीन के हेनान प्रांत के नाम था। वर्ष 2018 में वहां एक घंटे में 1,53,981 पौधे लगाए गए थे। उत्तर प्रदेश ने इस रिकॉर्ड को बड़े अंतर से तोड़ते हुए नया विश्व कीर्तिमान स्थापित किया।
इस ऐतिहासिक उपलब्धि ने न केवल वाराणसी बल्कि पूरे भारत का गौरव बढ़ाया है। पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में यह उपलब्धि यह भी दर्शाती है कि जब सरकार और जनता मिलकर प्रयास करते हैं तो बड़े से बड़ा लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।
शहरी वन का अनोखा मॉडल
वाराणसी के सुजाबाद डोमरी क्षेत्र में लगभग 350 बीघा जमीन पर आधुनिक शहरी वन विकसित किया जा रहा है। यह शहरी वन न केवल हरित आवरण बढ़ाने में मदद करेगा बल्कि शहर के पर्यावरणीय संतुलन को भी मजबूत करेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के शहरी वन भविष्य में महानगरों के लिए ऑक्सीजन बैंक की तरह काम करेंगे। साथ ही यह स्थानीय जैव विविधता को संरक्षित करने और तापमान को नियंत्रित रखने में भी मददगार साबित होंगे।
मिशन 2026: 35 करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य
उत्तर प्रदेश सरकार ने वर्ष 2026 के वर्षाकाल के लिए भी महत्वाकांक्षी योजना तैयार की है। इस वर्ष राज्य में 35 करोड़ से अधिक पौधे लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए सरकार ने बजट में भी पर्याप्त प्रावधान किए हैं। सामाजिक वानिकी योजना के लिए 800 करोड़ रुपये, पौधशाला प्रबंधन के लिए 220 करोड़ रुपये और राज्य प्रतिकारात्मक वन रोपण योजना के लिए 189 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है।
सरकार का मानना है कि बड़े पैमाने पर पौधरोपण से न केवल पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा बल्कि जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने में भी मदद मिलेगी।
‘ग्रीन चौपाल’ से बना जन आंदोलन
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के तहत पौधरोपण को केवल सरकारी कार्यक्रम तक सीमित न रखकर इसे जन आंदोलन का रूप दिया गया है। इसी उद्देश्य से प्रदेश के गांवों में ‘ग्रीन चौपाल’ कार्यक्रम की शुरुआत की गई है। अब तक प्रदेश के 15 हजार से अधिक गांवों में ग्रीन चौपाल आयोजित की जा चुकी हैं। इन चौपालों की अध्यक्षता ग्राम प्रधान करते हैं और गांव के लोग इसमें सक्रिय रूप से भाग लेते हैं। इन कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों को पर्यावरण संरक्षण, पौधों के महत्व और जलवायु संतुलन के बारे में जागरूक किया जा रहा है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में भी पर्यावरण के प्रति सकारात्मक सोच विकसित हो रही है।
बच्चों को जोड़ने की अनोखी पहल
सरकार ने इस अभियान को समाज के हर वर्ग से जोड़ने के लिए कई अभिनव पहलें भी शुरू की हैं। जुलाई 2025 में जन्मे बच्चों के अभिभावकों को ‘ग्रीन गोल्ड सर्टिफिकेट’ और फलदार पौधे प्रदान किए गए। इस पहल का उद्देश्य लोगों को पर्यावरण संरक्षण के साथ भावनात्मक रूप से जोड़ना है, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी प्रकृति के महत्व को समझ सकें।
2030 तक हरित आवरण बढ़ाने का लक्ष्य
प्रदेश सरकार ने वर्ष 2030 तक उत्तर प्रदेश के कुल हरित आवरण को 15 प्रतिशत तक बढ़ाने का लक्ष्य तय किया है। इसके लिए बड़े पैमाने पर पौधरोपण, वन संरक्षण और जनभागीदारी को बढ़ावा दिया जा रहा है। पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इसी तरह योजनाबद्ध तरीके से पौधरोपण अभियान जारी रहा तो आने वाले वर्षों में उत्तर प्रदेश देश के सबसे हरित राज्यों में शामिल हो सकता है।कुल मिलाकर, योगी सरकार के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में एक नई मिसाल पेश कर रहा है। पौधरोपण के इस व्यापक अभियान ने न केवल राज्य को हरित दिशा में आगे बढ़ाया है बल्कि यह भी साबित किया है कि सामूहिक प्रयासों से प्रकृति के संरक्षण और विकास के बीच संतुलन स्थापित किया जा सकता है।





