मुस्लिम महिलाओं के लिए बेहद दर्दनाक होता है ‘निकाह मुताह’… जानें क्या है यह प्रथा और क्या कहते हैं मौलाना
- क्या एक हफ्ते वाला निकाह है यह..?
- क्या खुद हो जाता है खत्म..?
- जानें क्या कहते हैं मौलाना?
दुनिया के अलग-अलग धर्मों में विवाह की परंपराएं, नियम और मान्यताएं अलग-अलग हैं। विवाह को सामाजिक और धार्मिक जीवन की सबसे पवित्र संस्था माना जाता है। लेकिन यह भी एक सच्चाई है कि हर धर्म और समाज में समय-समय पर कुछ ऐसी प्रथाएं विकसित हुईं, जिनका दुरुपयोग रूढ़िवादी सोच रखने वाले लोग कमजोर तबके, खासकर महिलाओं के शोषण के लिए करते रहे हैं। ऐसी ही एक विवादित प्रथा है इस्लाम धर्म में प्रचलित निकाह मुताह, जिसे लेकर लंबे समय से बहस और आलोचना होती रही है।
-
निकाह मुताह है अस्थायी विवाह
-
पुरुष महिला तय अवधि विवाह
-
समाप्ति पर तलाक जरूरी नहीं
-
शिया संप्रदाय में मान्यता
-
सुन्नी संप्रदाय में निषिद्ध
-
महिलाओं की सामाजिक सुरक्षा प्रभावित
-
इतिहास में उत्पत्ति व्यापार यात्राएं
क्या है निकाह मुताह?
निकाह मुताह इस्लाम में किया जाने वाला एक अस्थायी विवाह है। ‘मुताह’ अरबी भाषा का शब्द है, जिसका अर्थ अस्थायी सुख या लाभ से जुड़ा माना जाता है। इस विवाह में पति और पत्नी के बीच पहले से तय कर लिया जाता है कि वे कितने समय तक पति-पत्नी के रूप में साथ रहेंगे। यह अवधि कुछ दिनों, महीनों या वर्षों की हो सकती है। तय समय पूरा होते ही यह विवाह स्वतः समाप्त हो जाता है और इसके लिए तलाक की सामान्य प्रक्रिया जरूरी नहीं होती।
शिया और सुन्नी में मतभेद
इस्लाम धर्म के दो प्रमुख संप्रदाय हैं—शिया और सुन्नी। दोनों की धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं में कई अहम अंतर हैं। निकाह मुताह भी इन्हीं मतभेदों में से एक है। शिया संप्रदाय में निकाह मुताह को धार्मिक और कानूनी मान्यता प्राप्त है। वहीं सुन्नी संप्रदाय इसे अवैध और इस्लामी शिक्षाओं के विरुद्ध मानता है। इसी कारण यह प्रथा पूरे मुस्लिम समाज में समान रूप से स्वीकार नहीं की गई है।
मौलाना के अनुसार, शुरुआत में निकाह मुताह की अनुमति थी, लेकिन बाद में स्वयं रसूलुल्लाह ﷺ ने इसकी मनाही का ऐलान कर दिया और इसे हमेशा के लिए समाप्त कर दिया गया। इस प्रकार क़यामत तक के लिए निकाह मुताह को हराम ठहराया गया है। आज के समय में जो लोग निकाह मुताह करते हैं, वे अस्थायी सुख या सीमित समय के संबंध के इरादे से ऐसा करते हैं और उसे धार्मिक रूप से जायज़ ठहराने की कोशिश करते हैं। इस्लाम की दृष्टि में यह पूरी तरह गलत है। इस्लाम स्थायी, जिम्मेदार और पवित्र निकाह की इजाजत देता है, न कि अस्थायी संबंधों की।
क्यों होता है विरोध?
आलोचकों का कहना है कि यह प्रथा महिलाओं की सामाजिक सुरक्षा को कमजोर करती है। विवाह समाप्त होने के बाद महिला को इद्दत की प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। बार-बार अस्थायी विवाह से महिला का सामाजिक सम्मान और स्थिरता प्रभावित होती है। इद्दत की अवधि लगभग चार महीने दस दिन की होती है, जिसमें महिला को पुनर्विवाह की अनुमति नहीं होती।
समर्थक क्या कहते हैं?
समर्थकों का तर्क है कि यह आपसी सहमति पर आधारित है। शिया धार्मिक कानून के तहत वैध है। इसे जबरन थोपने की अनुमति नहीं है।
क्या है निकाह मुताह?
निकाह मुताह इस्लाम में किया जाने वाला अस्थायी विवाह है। अरबी शब्द मुताह का अर्थ है—लाभ या अस्थायी सुख। इसमें पति-पत्नी के बीच पहले से तय अवधि के लिए विवाह होता है। यह अवधि कुछ दिनों, महीनों या वर्षों की हो सकती है। तय समय पूरा होते ही यह विवाह स्वतः समाप्त हो जाता है, इसके लिए तलाक की औपचारिक प्रक्रिया आवश्यक नहीं होती।
कैसे होता है मुताह विवाह?
पुरुष और महिला आपसी सहमति से विवाह करते हैं
विवाह की अवधि पहले तय होती है
मेहर (धनराशि) निर्धारित की जाती है
अवधि समाप्त होते ही संबंध खत्म हो जाता है
यह एक तरह का कॉन्ट्रैक्ट मैरिज माना जाता है।
किस संप्रदाय में मान्य?
इस्लाम में दो प्रमुख संप्रदाय हैं—शिया और सुन्नी। शिया संप्रदाय में निकाह मुताह को धार्मिक मान्यता प्राप्त है और इसे मुस्लिम पर्सनल लॉ के अंतर्गत स्वीकार किया जाता है। सुन्नी संप्रदाय में इसे अवैध और निषिद्ध माना जाता है।
क्यों शुरू हुई यह प्रथा?
इतिहासकारों के अनुसार, व्यापार या यात्राओं के कारण लंबे समय तक घर से दूर रहने वाले कुछ लोगों के लिए यह प्रथा अस्तित्व में आई। खासकर खाड़ी देशों में रहने वाले शिया समुदाय में यह देखने को मिलती है, जहां अस्थायी निवास के दौरान इस तरह के विवाह किए जाते रहे।