भारतीय वायुसेना को नया नेतृत्व : कौन हैं नए एयर चीफ आशुतोष दीक्षित. ऑपरेशन सिंदूर से तेजस तक

Indian Air Force

कौन हैं नए एयर चीफ आशुतोष दीक्षित. ऑपरेशन सिंदूर से तेजस तक

भारतीय वायुसेना को नया नेतृत्व मिलने जा रहा है। एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित को देश का अगला वायुसेना प्रमुख नियुक्त किया गया है। मौजूदा वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह 31 अक्टूबर को सेवानिवृत्त होंगे और उसी दिन आशुतोष दीक्षित एयर चीफ मार्शल के पद पर वायुसेना की कमान संभालेंगे। करीब चार दशक के सैन्य करियर वाले दीक्षित सिर्फ अनुभवी फाइटर पायलट ही नहीं, बल्कि ऑपरेशनल अनुभव, परीक्षण उड़ान और रक्षा तकनीक की गहरी समझ रखने वाले अधिकारी हैं।

फाइटर पायलट से एयर चीफ तक का सफर

आशुतोष दीक्षित को 6 दिसंबर 1986 को भारतीय वायुसेना की फाइटर स्ट्रीम में कमीशन किया गया था। उनके पास 3,500 घंटे से ज्यादा उड़ान का अनुभव है। उन्होंने मिराज-2000, मिग के विभिन्न संस्करण, जगुआर, हॉक और तेजस समेत कई तरह के विमानों को उड़ाया है। वह एक्सपेरिमेंटल टेस्ट पायलट और क्वालिफाइड फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर भी हैं।

यानी जिस अधिकारी को अब वायुसेना की पूरी कमान मिलने जा रही है, उसका करियर कॉकपिट से लेकर रणनीतिक स्तर तक फैला हुआ है।

ऑपरेशन सिंदूर से जुड़ा अनुभव

दीक्षित का सैन्य अनुभव सिर्फ प्रशिक्षण और प्रशासन तक सीमित नहीं रहा। वह ऑपरेशन सफेद सागर, ऑपरेशन रक्षक, कोप इंडिया और ऑपरेशन सिंदूर जैसे महत्वपूर्ण अभियानों और सैन्य अभ्यासों से जुड़े रहे हैं। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान वह चीफ ऑफ इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ की जिम्मेदारी संभाल रहे थे।

इस अनुभव का महत्व इसलिए बढ़ जाता है क्योंकि मौजूदा सुरक्षा माहौल में वायुसेना की भूमिका सिर्फ हवाई युद्ध तक सीमित नहीं है। तीनों सेनाओं के बीच तालमेल, संयुक्त अभियान और तेजी से बदलती सैन्य तकनीक भी उतनी ही महत्वपूर्ण हैं।

तेजस और स्वदेशी तकनीक पर फोकस

आशुतोष दीक्षित के करियर का एक अहम पहलू स्वदेशी रक्षा तकनीक और विमान परियोजनाओं से जुड़ा रहा है। उन्होंने तेजस सहित भारतीय विमान परियोजनाओं और आधुनिक लड़ाकू विमानों की तकनीकी क्षमता को आगे बढ़ाने से जुड़े महत्वपूर्ण काम किए हैं। वह मीडियम मल्टी-रोल कॉम्बैट एयरक्राफ्ट कार्यक्रम के तहत अलग-अलग लड़ाकू विमानों के तकनीकी मूल्यांकन और परीक्षण से भी जुड़े रहे।

ऐसे में उनके नेतृत्व में आत्मनिर्भर भारत के तहत स्वदेशी विमान, हथियार प्रणालियां और नई सैन्य तकनीकों को आगे बढ़ाना वायुसेना के लिए अहम प्राथमिकताओं में शामिल रह सकता है।

तीनों सेनाओं के तालमेल का अनुभव

दीक्षित की एक और बड़ी खासियत उनका संयुक्त रक्षा ढांचे में अनुभव है। वह चीफ ऑफ इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ के रूप में काम कर चुके हैं। इस दौरान तीनों सेनाओं के बीच संयुक्तता और एकीकरण को मजबूत करने पर जोर रहा। कई संयुक्त सिद्धांत और आदेश भी इस अवधि में जारी किए गए।

इसके अलावा वह सेंट्रल एयर कमांड के एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ भी रह चुके हैं और जुलाई 2026 से वाइस चीफ ऑफ एयर स्टाफ की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।

सम्मान से भरा सैन्य करियर

आशुतोष दीक्षित को उनकी सेवा के लिए वायु सेना मेडल, विशिष्ट सेवा मेडल, अति विशिष्ट सेवा मेडल और परम विशिष्ट सेवा मेडल से सम्मानित किया जा चुका है। आधिकारिक जानकारी के मुताबिक उन्हें वायु सेना मेडल 2006, विशिष्ट सेवा मेडल 2011, अति विशिष्ट सेवा मेडल 2023 और परम विशिष्ट सेवा मेडल 2026 में मिला।

नई जिम्मेदारी. नई चुनौतियां

अब उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती एक आधुनिक और तकनीक आधारित वायुसेना को और मजबूत करने की होगी। स्वदेशी लड़ाकू विमानों की क्षमता बढ़ाना, भविष्य की युद्ध तकनीक को अपनाना, तीनों सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल और बदलते सुरक्षा वातावरण के हिसाब से वायु शक्ति को तैयार रखना उनकी नई जिम्मेदारी का हिस्सा होगा।

कुल मिलाकर एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित की प्रोफाइल में तीन चीजें खास तौर पर दिखाई देती हैं. लंबा ऑपरेशनल अनुभव, आधुनिक सैन्य तकनीक की समझ और तीनों सेनाओं के बीच तालमेल का अनुभव। ऑपरेशन सफेद सागर और रक्षक से लेकर ऑपरेशन सिंदूर तक का अनुभव और तेजस जैसी स्वदेशी परियोजनाओं से जुड़ाव उन्हें एक ऐसे समय में वायुसेना की कमान तक ले जा रहा है, जब भारत अपनी सैन्य ताकत को आत्मनिर्भर और तकनीकी रूप से और सक्षम बनाने पर जोर दे रहा है। 31 अक्टूबर से उनकी नई पारी शुरू होगी और देश की निगाहें इस बात पर रहेंगी कि उनके नेतृत्व में भारतीय वायुसेना आने वाली चुनौतियों के लिए किस तरह खुद को और मजबूत करती है।

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