केंद्रीय बजट 2026 को लेकर नौकरीपेशा वर्ग, छोटे कारोबारी और निवेशकों को बड़ी उम्मीदें थीं। खासकर यह चर्चा तेज थी कि आयकर स्लैब में बदलाव होगा या टैक्स दरों में राहत मिलेगी। लेकिन बजट में जो तस्वीर सामने आई, वह कुछ अलग है। सरकार ने आयकर दरों में कोई बदलाव नहीं किया, बल्कि फोकस प्रक्रियाओं को आसान बनाने, अनुपालन को सरल करने और टैक्स सिस्टम को ज्यादा पारदर्शी बनाने पर रखा है। आइए विस्तार से समझते हैं आम व्यक्तियों के लिए बजट 2026 के 10 बड़े टैक्स हाइलाइट्स।
आयकर स्लैब और दरों में कोई बदलाव नहीं
सबसे बड़ी घोषणा यही रही कि वित्त वर्ष 2026-27 (आकलन वर्ष 2027-28) के लिए न तो नए टैक्स रिजीम में और न ही पुराने टैक्स रिजीम में किसी प्रकार का बदलाव किया गया है। मौजूदा आयकर दरें और स्लैब अगले साल भी वैसे ही लागू रहेंगे। यानी जो करदाता अभी जिस दर से टैक्स दे रहे हैं, उन्हें उसी ढांचे में टैक्स देना होगा।
नया आयकर अधिनियम 2025 लागू होगा
1 अप्रैल 2026 से नया आयकर अधिनियम 2025 लागू किया जाएगा, जो 1961 के पुराने कानून की जगह लेगा। इसका उद्देश्य कानून को सरल बनाना, जटिल धाराओं को कम करना, रिटर्न फॉर्म को आसान बनाना और विवादों को घटाना है। सरकार का दावा है कि इससे आम करदाता के लिए टैक्स फाइलिंग प्रक्रिया ज्यादा पारदर्शी और समझने योग्य होगी।
ITR और संशोधित रिटर्न दाखिल करने की नई समयसीमा
अब करदाता आकलन वर्ष की 31 मार्च तक संशोधित रिटर्न दाखिल कर सकेंगे, जबकि पहले यह सीमा 31 दिसंबर थी।
- 5 लाख रुपये तक की आय वालों के लिए संशोधित रिटर्न शुल्क ₹1,000
- 5 लाख से अधिक आय वालों के लिए ₹5,000
मूल (Original) रिटर्न की अंतिम तिथि नॉन-ऑडिट मामलों में 31 जुलाई रहेगी, जबकि नॉन-ऑडिट बिजनेस और ट्रस्ट के लिए 31 अगस्त तय की गई है। इससे करदाताओं को गलतियां सुधारने के लिए अतिरिक्त समय मिलेगा।
TCS दरों में तर्कसंगत बदलाव
Tax Collected at Source (TCS) में महत्वपूर्ण राहत दी गई है।
- विदेशी टूर पैकेज, विदेश में शिक्षा और चिकित्सा खर्च (LRS के तहत) पर TCS घटाकर 2% कर दिया गया है। पहले यह 5% या 20% तक था।
- शराब, स्क्रैप, खनिज और तेंदूपत्ता जैसी वस्तुओं की बिक्री पर भी TCS दर सामान्य रूप से 2% की गई है।
इससे विदेश यात्रा, पढ़ाई या इलाज के लिए जाने वालों पर अग्रिम टैक्स का बोझ कम होगा।
मोटर दुर्घटना मुआवजा ब्याज पूरी तरह टैक्स फ्री
मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल (MACT) द्वारा दिए गए मुआवजे के ब्याज को अब पूरी तरह टैक्स मुक्त कर दिया गया है। इस पर कोई TDS भी नहीं कटेगा। इसका सीधा लाभ दुर्घटना पीड़ितों और उनके परिवारों को मिलेगा।
डेरिवेटिव्स पर STT में बढ़ोतरी
शेयर बाजार में फ्यूचर्स और ऑप्शंस (F&O) ट्रेडिंग करने वालों के लिए लागत बढ़ेगी।
- फ्यूचर्स पर STT 0.02% से बढ़ाकर 0.05%
- ऑप्शंस प्रीमियम और एक्सरसाइज पर 0.15%
इससे सक्रिय ट्रेडर्स की ट्रेडिंग कॉस्ट बढ़ सकती है।
विदेशी निवेश और खुलासा योजना
गैर-निवासी व्यक्तिगत निवेशक अब पोर्टफोलियो इन्वेस्टमेंट स्कीम (PIS) के तहत भारतीय सूचीबद्ध कंपनियों में 5% के बजाय 10% तक निवेश कर सकेंगे। इसके अलावा विदेशी संपत्तियों के एकमुश्त खुलासे के लिए विशेष विंडो दी गई है, जिसमें शर्तों के तहत अभियोजन से राहत मिल सकती है।
TDS/TCS प्रक्रिया में सरलीकरण
छोटे करदाताओं के लिए लोअर या निल TDS सर्टिफिकेट प्राप्त करने की प्रक्रिया को स्वचालित और आसान बनाया जाएगा। इससे मैनुअल प्रक्रियाओं की जटिलता कम होगी और अनुपालन बोझ घटेगा।
स्टैंडर्ड डिडक्शन और रिबेट में कोई बदलाव नहीं
स्टैंडर्ड डिडक्शन की राशि या धारा 87A जैसी रिबेट में कोई परिवर्तन नहीं किया गया है। यानी मौजूदा लाभ यथावत रहेंगे, लेकिन अतिरिक्त राहत नहीं मिली।
दंड प्रावधानों में तर्कसंगत सुधार
नए आयकर अधिनियम में छोटी प्रक्रियात्मक त्रुटियों के लिए कठोर दंड के बजाय साधारण शुल्क का प्रावधान किया गया है। इसका उद्देश्य मुकदमेबाजी कम करना और स्वैच्छिक अनुपालन को बढ़ावा देना है।
इस बजट का मुख्य संदेश साफ है — टैक्स दरों में राहत नहीं, लेकिन प्रक्रियाओं में आसानी। सरकार ने आयकर ढांचे को स्थिर रखा है, जबकि फोकस अनुपालन को सरल बनाने, विवाद घटाने और डिजिटल सिस्टम को मजबूत करने पर है। नौकरीपेशा वर्ग को भले सीधी कर राहत नहीं मिली, लेकिन रिटर्न दाखिल करने में लचीलापन, TCS में कमी और कानूनी सरलीकरण से कुछ राहत जरूर महसूस होगी। कुल मिलाकर, बजट 2026-27 करदाताओं के लिए “संरचनात्मक सुधार” वाला बजट कहा जा सकता है — जहां टैक्स स्लैब स्थिर हैं, लेकिन सिस्टम को सरल और पारदर्शी बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है।





