यूपी में योगी सरकार की नई पहल…गोशालाएं बनेंगी ऊर्जा केंद्र… आईआईटी तकनीक से बदलेगा यूपी का मॉडल

Uttar Pradesh to integrate cow protection

गोशालाएं बनेंगी ऊर्जा केंद्र, आईआईटी तकनीक से बदलेगा यूपी का मॉडल

उत्तर प्रदेश में गोसंरक्षण को आधुनिक तकनीक से जोड़ने की दिशा में एक नई पहल शुरू होने जा रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में राज्य सरकार ने एक महत्वाकांक्षी योजना तैयार की है, जिसके तहत प्रदेश की 300 से अधिक गोशालाओं को बायोगैस प्लांट और स्वच्छ ऊर्जा केंद्रों के रूप में विकसित किया जाएगा। इस परियोजना में आईआईटी खड़गपुर के पूर्व छात्रों की टीम तकनीकी सहयोग प्रदान करेगी। इस पहल का उद्देश्य गोसंरक्षण को केवल परंपरा तक सीमित न रखकर उसे ऊर्जा उत्पादन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जोड़ना है।

सरकार का मानना है कि गोबर और गोमूत्र जैसे संसाधनों का वैज्ञानिक उपयोग कर बिजली, बायो-सीएनजी और जैविक खाद का उत्पादन किया जा सकता है। इससे न केवल पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि किसानों और ग्रामीणों की आय बढ़ाने का भी नया रास्ता खुलेगा।

तकनीक और परंपरा का संगम

राज्य सरकार की इस पहल में आधुनिक तकनीक और पारंपरिक गोसंरक्षण मॉडल का अनूठा संगम देखने को मिलेगा। योजना के तहत गोशालाओं में बायोगैस प्लांट लगाए जाएंगे, जिनमें गोबर और जैविक अपशिष्ट से ऊर्जा उत्पन्न की जाएगी। इसके अलावा गोमूत्र और अन्य जैविक संसाधनों से जैविक खाद और अन्य उत्पाद तैयार किए जाएंगे।

विशेषज्ञों के अनुसार, यदि इस मॉडल को व्यवस्थित तरीके से लागू किया जाए तो गोशालाएं केवल पशुधन संरक्षण का स्थान नहीं रहेंगी, बल्कि ऊर्जा उत्पादन और आय के स्थायी केंद्र बन सकती हैं। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।

आईआईटीयन ने छोड़ा करोड़ों का पैकेज

इस परियोजना की सबसे प्रेरणादायक बात यह है कि इसे आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी आईआईटी खड़गपुर के पूर्व छात्र यशराज गुप्ता और उनकी टीम ने संभाली है। यशराज ने एक बड़ी सॉफ्टवेयर कंपनी में मिलने वाला लगभग दो करोड़ रुपये का सालाना पैकेज छोड़कर इस सामाजिक मिशन को चुना है।

उनका मानना है कि भारत के ग्रामीण विकास और स्थायी अर्थव्यवस्था के लिए गो-आधारित मॉडल बेहद महत्वपूर्ण हो सकता है। इसी सोच के साथ उन्होंने अपनी तकनीकी विशेषज्ञता को गोसंरक्षण और ग्रामीण विकास से जोड़ने का निर्णय लिया।

यशराज और उनकी टीम ने हाल ही में जालौन जिले में गोसेवा आयोग के पदाधिकारियों के साथ बैठक कर इस योजना की रूपरेखा तैयार की है। इसके तहत गोशालाओं में ऊर्जा उत्पादन और पंचगव्य आधारित उत्पादों के निर्माण की दिशा में काम किया जाएगा।

जालौन से होगी शुरुआत

इस महत्वाकांक्षी परियोजना की शुरुआत जालौन जिले से की जाएगी। यहां की गोशालाओं में सबसे पहले बायोगैस प्लांट स्थापित किए जाएंगे और ऊर्जा उत्पादन की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

इसके बाद इस मॉडल का विस्तार चरणबद्ध तरीके से प्रदेश की अन्य गोशालाओं तक किया जाएगा। योजना के अनुसार आने वाले समय में उत्तर प्रदेश की 300 से अधिक गोशालाओं को इस तकनीकी मॉडल से जोड़ा जाएगा।

‘पंचगव्य वैल्यू चेन’ पर विशेष जोर

इस पहल के तहत ‘पंचगव्य वैल्यू चेन’ को विकसित करने की भी योजना बनाई गई है। पंचगव्य में दूध, दही, घी, गोबर और गोमूत्र जैसे उत्पाद शामिल होते हैं। इन सभी का उपयोग पारंपरिक और औद्योगिक दोनों क्षेत्रों में किया जा सकता है। यशराज गुप्ता और उनकी टीम किसानों और गोशाला संचालकों को पंचगव्य उत्पादों के वैज्ञानिक उपयोग और उनके व्यावसायिक उत्पादन का प्रशिक्षण भी देंगे। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर तैयार होंगे. छोटे उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा बल

विशेषज्ञों का मानना है कि इस परियोजना से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत आधार मिलेगा। गोबर से तैयार होने वाली जैविक खाद का उपयोग खेती में किया जा सकेगा, जिससे रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम होगी। इसके साथ ही बायो-सीएनजी और बिजली उत्पादन से ऊर्जा की जरूरतें भी पूरी की जा सकेंगी। इससे गांवों में स्वच्छ ऊर्जा का उपयोग बढ़ेगा और पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।

पर्यावरण संरक्षण की दिशा में कदम

गोबर और अन्य जैविक अपशिष्ट का सही प्रबंधन न होने से कई बार प्रदूषण की समस्या उत्पन्न होती है। लेकिन इस परियोजना के तहत इन्हीं संसाधनों का उपयोग ऊर्जा और जैविक उत्पादों के निर्माण में किया जाएगा। इससे कचरे का वैज्ञानिक प्रबंधन होगा और पर्यावरण पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

युवाओं के लिए बनेगा प्रेरणा मॉडल

जालौन से शुरू होने वाला यह मॉडल आने वाले समय में पूरे प्रदेश के लिए प्रेरणा बन सकता है। सरकार का मानना है कि यदि यह योजना सफल होती है तो इससे युवाओं को ग्रामीण क्षेत्रों में ही रोजगार के अवसर मिल सकेंगे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की इस पहल का उद्देश्य गोसंरक्षण को आर्थिक आत्मनिर्भरता और ग्रामीण विकास से जोड़ना है। तकनीक और परंपरा के इस संगम से उत्तर प्रदेश एक नया मॉडल प्रस्तुत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, जो देश के अन्य राज्यों के लिए भी उदाहरण बन सकता है।

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