बिहार में नई सरकार 20 नवंबर को लेगी शपथ, गांधी मैदान में PM मोदी की मौजूदगी में होगा भव्य समारोह
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) को मिले ऐतिहासिक जनादेश के बाद नई सरकार के गठन की प्रक्रिया अपने अंतिम चरण में पहुँच गई है। तय कार्यक्रम के अनुसार, एनडीए की नई सरकार का शपथ ग्रहण समारोह 20 नवंबर को पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में आयोजित किया जाएगा। इस भव्य समारोह को यादगार बनाने के लिए तैयारियां जोरों पर हैं और इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। उनके साथ कई केंद्रीय मंत्रियों, एनडीए शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों और गठबंधन के वरिष्ठ नेताओं का भी आगमन अपेक्षित है, जो इस जीत के महत्व को राष्ट्रीय स्तर पर रेखांकित करेगा।
गांधी मैदान में भव्य समारोह की तैयारी
पटना का गांधी मैदान, जो बिहार की राजनीति के कई ऐतिहासिक पलों का गवाह रहा है, एक बार फिर एक महत्वपूर्ण राजनीतिक घटना के लिए तैयार हो रहा है। समारोह की सुरक्षा और व्यवस्था को सुनिश्चित करने के लिए, जिला प्रशासन ने गांधी मैदान को 20 नवंबर तक आम जनता के लिए बंद कर दिया है। मैदान के चारों ओर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए जा रहे हैं और एक विशाल मंच तैयार किया जा रहा है, जहाँ से नए मंत्रिमंडल के सदस्य शपथ लेंगे। इस समारोह को न केवल एक औपचारिक प्रक्रिया, बल्कि एनडीए की प्रचंड जीत के शक्ति प्रदर्शन के रूप में भी देखा जा रहा है। उम्मीद है कि इस कार्यक्रम में हजारों की संख्या में एनडीए कार्यकर्ता और समर्थक शामिल होंगे।
एनडीए को मिला अभूतपूर्व जनादेश
हाल ही में संपन्न हुए बिहार विधानसभा चुनावों में एनडीए ने 243 सीटों में से 202 सीटें जीतकर एकतरफा जीत हासिल की है। यह जनादेश बिहार के राजनीतिक इतिहास में एक मील का पत्थर माना जा रहा है। इस जीत में गठबंधन के सभी घटक दलों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) 89 सीटें जीतकर सबसे बड़े दल के रूप में उभरी, जबकि जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) ने 85 सीटों पर अपना परचम लहराया। वहीं, लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) ने 19 सीटें जीतकर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई और अन्य सहयोगी दलों ने 9 सीटों पर विजय प्राप्त की। इस विशाल बहुमत ने एनडीए के लिए एक स्थिर और मजबूत सरकार बनाने का मार्ग प्रशस्त कर दिया है।
सरकार गठन की औपचारिक प्रक्रिया शुरू
नई सरकार के शपथ ग्रहण से पहले संवैधानिक औपचारिकताओं को पूरा करने की प्रक्रिया तेज हो गई है। इसी क्रम में, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आज सुबह 11:30 बजे अपनी वर्तमान कैबिनेट की अंतिम बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक का मुख्य एजेंडा वर्तमान 17वीं विधानसभा को भंग करने की सिफारिश का प्रस्ताव पारित करना था। कैबिनेट की मंजूरी के बाद, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राजभवन जाकर राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान से मुलाकात की और अपना इस्तीफा उन्हें सौंप दिया। राज्यपाल ने उनका इस्तीफा स्वीकार करते हुए उन्हें नई सरकार के गठन तक कार्यवाहक मुख्यमंत्री बने रहने का आग्रह किया है।
चूंकि वर्तमान विधानसभा का कार्यकाल 22 नवंबर को समाप्त हो रहा है, इसलिए सभी प्रक्रियाएं समय रहते पूरी की जा रही हैं।
कौन होगा बिहार का अगला मुख्यमंत्री?
नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद अब सभी की निगाहें एनडीए के विधायक दल की बैठक पर टिकी हैं, जहाँ गठबंधन के नेता का औपचारिक चुनाव किया जाएगा। प्रक्रिया के अनुसार, पहले जेडीयू और भाजपा अपने-अपने विधायक दलों की अलग-अलग बैठकें करेंगी, जिसमें वे अपने-अपने नेताओं का चुनाव करेंगे। उम्मीद है कि जेडीयू विधायक दल की बैठक में नीतीश कुमार को सर्वसम्मति से नेता चुन लिया जाएगा।इसके बाद एनडीए के सभी घटक दलों की एक संयुक्त बैठक होगी, जिसमें गठबंधन के नेता के नाम पर अंतिम मुहर लगेगी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नीतीश कुमार का अनुभव और गठबंधन को साथ लेकर चलने की उनकी क्षमता को देखते हुए, उन्हें ही एनडीए विधायक दल का नेता चुने जाने की प्रबल संभावना है। हालांकि, इस बार भाजपा के पास जेडीयू से अधिक सीटें हैं, जिससे उपमुख्यमंत्री पद और मंत्रिमंडल में विभागों के बंटवारे को लेकर नई समीकरण बन सकते हैं।
विधायक दल का नेता चुने जाने के बाद, एनडीए का एक प्रतिनिधिमंडल राज्यपाल से मिलकर सरकार बनाने का दावा पेश करेगा और विधायकों के समर्थन का पत्र सौंपेगा। हालांकि, इस बात पर अभी भी एक औपचारिक घोषणा का इंतजार है कि 20 नवंबर को मुख्यमंत्री पद की शपथ नीतीश कुमार ही लेंगे या गठबंधन किसी और चेहरे पर दांव लगाएगा। यह रहस्य एनडीए विधायक दल की बैठक के बाद ही समाप्त होगा।
नई सरकार के सामने चुनौतियां और उम्मीदें
एनडीए को मिले इस विशाल जनादेश के साथ ही जनता की उम्मीदें भी आसमान पर हैं। नई सरकार के सामने रोजगार सृजन, शिक्षा और स्वास्थ्य के बुनियादी ढांचे में सुधार, कानून-व्यवस्था को और मजबूत करना तथा राज्य में निवेश को आकर्षित करने जैसी कई बड़ी चुनौतियां होंगी। चुनावी वादों को पूरा करने का दबाव भी सरकार पर रहेगा। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि नई सरकार इन उम्मीदों पर कितनी खरी उतरती है और बिहार को विकास की नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए क्या कदम उठाती है। 20 नवंबर का दिन बिहार के लिए एक नए अध्याय की शुरुआत करेगा, जिस पर पूरे देश की नजरें टिकी रहेंगी।





